E20 विवाद पर अरविंद केजरीवाल ने सरकार से नीति स्पष्ट करने की मांग की और लोगों से फिलहाल पेट्रोल-डीजल वाहन खरीदने से बचने की अपील की।
E20 ईंधन को लेकर देश में जारी बहस के बीच आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने लोगों से पेट्रोल और डीजल से चलने वाले नए वाहन खरीदने से फिलहाल बचने की अपील की है। गोवा में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान केजरीवाल ने सरकार से E20 ईंधन को लेकर अपनी नीति और आगे की योजना स्पष्ट करने की मांग की।
केजरीवाल ने आरोप लगाया कि E20 ईंधन को लागू करने से पहले पर्याप्त परीक्षण नहीं किया गया। उन्होंने दावा किया कि E20 के इस्तेमाल के बाद कई प्रकार के वाहनों के माइलेज में उल्लेखनीय कमी आई है।
माइलेज में 25-30 फीसदी गिरावट का दावा
अरविंद केजरीवाल ने दावा किया कि मोटरसाइकिल, स्कूटर, कार, SUV और अन्य चार पहिया वाहनों के माइलेज में करीब 25 से 30 प्रतिशत तक कमी आई है।
उन्होंने कहा कि माइलेज कम होने से वाहन मालिकों पर ईंधन खर्च का अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है। हालांकि, माइलेज में इस स्तर की गिरावट के दावे को स्वतंत्र रूप से सत्यापित आंकड़े के तौर पर नहीं, बल्कि केजरीवाल के आरोप के रूप में देखा जाना चाहिए।
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‘सरकार पहले अपना रुख स्पष्ट करे’
केजरीवाल ने केंद्र सरकार से E20 नीति को लेकर स्पष्ट जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की। उन्होंने कहा कि जब तक सरकार अपना रुख स्पष्ट नहीं करती, तब तक लोगों को पेट्रोल और डीजल वाहन खरीदने से बचना चाहिए।
उनके अनुसार, सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि E20 ईंधन के कारण मौजूदा और नए वाहनों पर क्या प्रभाव पड़ेगा और उपभोक्ताओं के हितों की सुरक्षा के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं।
गोवा में ज्यादा असर का दावा
केजरीवाल ने गोवा को E20 नीति से अधिक प्रभावित होने वाला राज्य बताया। उन्होंने कहा कि गोवा में बड़ी संख्या में परिवारों के पास कार और दोपहिया वाहन हैं।
उनके मुताबिक, गोवा में करीब 45 प्रतिशत परिवारों के पास कार है, जबकि लगभग 86 प्रतिशत लोगों के पास दोपहिया वाहन हैं। उन्होंने दावा किया कि दोनों तरह के वाहनों की मौजूदगी को देखते हुए राज्य के करीब 85-90 प्रतिशत परिवार इस फैसले से प्रभावित हो सकते हैं।
E20 पर ब्राजील का उदाहरण दिया
E20 नीति पर अपनी बात रखते हुए केजरीवाल ने ब्राजील का उदाहरण भी दिया। उन्होंने कहा कि ब्राजील ने पेट्रोल में इथेनॉल मिश्रण को धीरे-धीरे बढ़ाया और E20 तक पहुंचने में उसे कई दशक लगे।
केजरीवाल के मुताबिक, ब्राजील ने वर्ष 1931 में E5 से शुरुआत की और 1985 में E20 तक पहुंचा। उन्होंने दावा किया कि वहां E5 से E20 तक जाने में करीब 50-55 साल लगे। उन्होंने यह भी कहा कि ब्राजील अब फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों और अधिक इथेनॉल मिश्रण की दिशा में आगे बढ़ चुका है।
E20 नीति पर बहस जारी
E20 यानी पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण को लेकर भारत में वाहन मालिकों, ऑटोमोबाइल उद्योग और सरकार के बीच चर्चा जारी है। केजरीवाल ने सरकार से नीति के प्रभाव, परीक्षण और उपभोक्ताओं पर पड़ने वाले असर को लेकर अधिक स्पष्टता की मांग की है।
फिलहाल, E20 को लेकर केजरीवाल के दावों और सरकार की नीति पर राजनीतिक बहस तेज है। इस मुद्दे पर अंतिम निष्कर्ष के लिए आधिकारिक तकनीकी आंकड़ों और विशेषज्ञ आकलन को भी ध्यान में रखना जरूरी होगा।

