सोशल मीडिया कानून पर अरविंद केजरीवाल ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि आलोचनात्मक पोस्ट हटाने के लिए प्लेटफॉर्म पर दबाव बनाया जा रहा है।
आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने केंद्र सरकार के कथित नए सोशल मीडिया कानून को लेकर तीखा हमला बोला है। केजरीवाल ने आरोप लगाया कि नए नियमों का इस्तेमाल सरकार की आलोचना करने वाली सोशल मीडिया पोस्ट को हटाने के लिए किया जा सकता है।
समर्थकों को संबोधित करते हुए केजरीवाल ने दावा किया कि यदि सरकार किसी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को किसी पोस्ट या वीडियो को हटाने का निर्देश देती है, तो प्लेटफॉर्म को निर्धारित समय सीमा के भीतर उस कंटेंट पर कार्रवाई करनी होगी।
‘तीन घंटे के भीतर पोस्ट हटाने का प्रावधान’
अरविंद केजरीवाल ने दावा किया कि नए नियमों के तहत Instagram, Facebook और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को सरकार की ओर से चिन्हित किसी पोस्ट या वीडियो को तीन घंटे के भीतर हटाना पड़ सकता है।
उन्होंने आरोप लगाया कि इस व्यवस्था का इस्तेमाल सरकार की नीतियों और कामकाज की आलोचना करने वाले कंटेंट के खिलाफ किया जा सकता है।
हालांकि, तीन घंटे में पोस्ट हटाने संबंधी केजरीवाल के दावे और नए कानून के वास्तविक प्रावधानों की स्वतंत्र पुष्टि इस दिए गए कंटेंट से नहीं होती, इसलिए इसे केजरीवाल के आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
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इथेनॉल और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों का किया जिक्र
AAP नेता ने दावा किया कि सरकार की आलोचना से जुड़े कई मुद्दों पर सोशल मीडिया पोस्ट को निशाना बनाया जा सकता है। उन्होंने इथेनॉल नीति, कथित दस्तावेजों के लीक और भ्रष्टाचार जैसे मामलों का उदाहरण देते हुए सरकार पर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता सीमित करने का आरोप लगाया।
केजरीवाल ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार के समर्थकों की ओर से की जाने वाली आपत्तिजनक पोस्ट पर समान कार्रवाई नहीं होती।
जंतर-मंतर प्रदर्शन का भी किया जिक्र
केजरीवाल ने हाल में जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शनों का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी निशाना साधा। उन्होंने दावा किया कि सरकार युवाओं, महिलाओं और आम लोगों की आवाज से चिंतित है।
उन्होंने कहा कि जनता की नाराजगी को दबाने के बजाय सरकार को लोगों की समस्याओं को सुनकर उनका समाधान करना चाहिए।
‘आलोचना दबाना समाधान नहीं’
दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी भी सरकार के लिए जनता की आलोचना से बचने के बजाय उसके कारणों को समझना ज्यादा जरूरी है। उनके अनुसार, यदि सरकार बेहतर काम करती है तो जनता अपने आप उसके काम की सराहना करेगी।
केजरीवाल ने चेतावनी दी कि लोगों की आवाज को दबाने की कोशिश से असंतोष और बढ़ सकता है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सरकार को जनता के सवालों और आलोचनाओं का सामना करना चाहिए।
Meta पर भी केजरीवाल ने उठाए सवाल
केजरीवाल ने इससे पहले Meta से जुड़े अपने सोशल मीडिया अकाउंट को प्रतिबंधित किए जाने का दावा भी किया था। उन्होंने इस मामले को लेकर सोशल मीडिया कंपनी और उसके प्रमुख मार्क जुकरबर्ग की आलोचना की थी।
सोशल मीडिया नियमों और कंटेंट मॉडरेशन को लेकर केजरीवाल के ताजा बयान ने एक बार फिर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, सरकारी निर्देश और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की जिम्मेदारी को लेकर राजनीतिक बहस को तेज कर दिया है।

