पंजाब सरकार हाईकोर्ट के डीए बकाया और विज्ञापन रोकने के आदेश की कानूनी समीक्षा कर रही है। जानें हरपाल सिंह चीमा का बयान और सरकार की आगे की रणनीति।
पंजाब सरकार ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के उस आदेश की कानूनी समीक्षा शुरू कर दी है, जिसमें राज्य सरकार को लगभग 8 लाख कर्मचारियों और पेंशनभोगियों का लंबित महंगाई भत्ता (डीए) बकाया 15 दिनों के भीतर जारी करने और आदेश के पालन तक सरकारी विज्ञापनों पर रोक लगाने का निर्देश दिया गया है।
राज्य के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने मंगलवार को कहा कि सरकार न्यायालय के सभी कानूनी और संवैधानिक निर्देशों का सम्मान करती है, लेकिन फैसले से जुड़े कई महत्वपूर्ण कानूनी पहलुओं का गहन परीक्षण किया जा रहा है। उन्होंने संकेत दिया कि अंतिम निर्णय कानूनी सलाह मिलने के बाद ही लिया जाएगा।
सरकार ने कही कानूनी पहलुओं की समीक्षा की बात
हरपाल सिंह चीमा के अनुसार, सुनवाई के दौरान कई ऐसे कानूनी बिंदु थे जिन पर पर्याप्त चर्चा नहीं हो सकी। उनका कहना है कि कुछ महत्वपूर्ण न्यायिक फैसलों का उल्लेख नहीं किया गया और कई संवैधानिक पहलुओं की व्याख्या भी विस्तार से नहीं हो सकी।
उन्होंने कहा कि सरकार की कानूनी टीम पूरे मामले का अध्ययन कर रही है ताकि आगे की रणनीति तय की जा सके। हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि राज्य सरकार हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देगी या नहीं।
हाईकोर्ट ने क्या दिया है आदेश?
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि कर्मचारियों और पेंशनभोगियों का लंबित महंगाई भत्ता (डीए) बकाया 15 दिनों के भीतर जारी किया जाए। यदि तय समय में भुगतान नहीं किया गया तो सरकार को बकाया राशि पर 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा।
इसके साथ ही अदालत ने आदेश दिया कि जब तक डीए बकाया का भुगतान नहीं किया जाता, तब तक सरकार विज्ञापनों पर सार्वजनिक धन खर्च नहीं करेगी।
पिछली सरकारों को बताया जिम्मेदार
वित्त मंत्री ने कहा कि डीए बकाया का मुद्दा वर्तमान सरकार के कार्यकाल में नहीं, बल्कि पूर्ववर्ती सरकारों के समय से लंबित है। उनके अनुसार, वेतन आयोग की रिपोर्ट वर्ष 2016 में प्रस्तुत की गई थी, लेकिन उसे समय पर लागू नहीं किया गया।
उन्होंने आरोप लगाया कि अकाली दल-भाजपा सरकार और उसके बाद कांग्रेस सरकार ने भी इस मामले का समाधान नहीं किया, जिसके कारण कर्मचारियों का बकाया लगातार बढ़ता गया।
14,191 करोड़ रुपये की बनी देनदारी
सरकार के अनुसार, 1 जनवरी 2016 से जुलाई 2021 तक के डीए बकाया का भुगतान नहीं होने के कारण राज्य पर लगभग 14,191 करोड़ रुपये की वित्तीय देनदारी बन गई।
चीमा ने बताया कि मौजूदा सरकार अब तक करीब 6,000 करोड़ रुपये का भुगतान कर चुकी है और शेष राशि भी चरणबद्ध तरीके से जारी की जा रही है।
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सरकार ने बताई भुगतान की चरणबद्ध योजना
वित्त मंत्री ने जानकारी दी कि सरकार पहले ही हाईकोर्ट के समक्ष डीए बकाया भुगतान की चरणबद्ध योजना प्रस्तुत कर चुकी है।
इस योजना के तहत:
- वर्ष 2024-25 में 85 वर्ष से अधिक आयु के पेंशनभोगियों को भुगतान किया गया।
- वर्ष 2025-26 में 75 वर्ष से अधिक आयु के पेंशनभोगियों का बकाया जारी किया गया।
- वर्ष 2026-27 में अप्रैल 2026 से कर्मचारियों और अन्य पेंशनभोगियों को डीए बकाया का भुगतान शुरू कर दिया गया है।
पंजाब में कर्मचारियों के वेतन पर सरकार का दावा
हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि पंजाब देश के उन राज्यों में शामिल है जहां सरकारी कर्मचारियों को अपेक्षाकृत बेहतर वेतन दिया जाता है। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि राज्य सरकार के एक क्लर्क का मासिक वेतन लगभग 54,812 रुपये है, जबकि केंद्र सरकार में समान पद पर लगभग 36,960 रुपये वेतन मिलता है।
उन्होंने कहा कि इसी प्रकार कांस्टेबल सहित कई अन्य श्रेणियों में भी पंजाब सरकार का वेतनमान अधिक है। साथ ही, वर्ष 2020 से नई नियुक्तियों के लिए केंद्र के वेतन आयोग के अनुरूप वेतन संरचना लागू की गई है।
कर्मचारियों की नजर सरकार के अगले कदम पर
हाईकोर्ट के आदेश के बाद पंजाब में कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के बीच डीए बकाया को लेकर उम्मीदें बढ़ गई हैं। कर्मचारी संगठन जल्द से जल्द आदेश के पालन की मांग कर रहे हैं, जबकि राज्य सरकार कानूनी विकल्पों और वित्तीय प्रभावों का आकलन कर रही है।
अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार अदालत के निर्देशों का तत्काल पालन करती है या आगे कानूनी प्रक्रिया अपनाने का फैसला लेती है।

