प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हुल दिवस पर संथाल विद्रोह के वीरों को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने सिदो-कान्हू, चांद-भैरव और फूलो-झानो के साहस और बलिदान को याद किया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को हुल दिवस के अवसर पर संथाल विद्रोह के वीर आदिवासी योद्धाओं को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि यह दिवस देश के आदिवासी समाज की असाधारण वीरता, संघर्ष और मातृभूमि के प्रति समर्पण का प्रतीक है।
प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर संदेश साझा करते हुए कहा कि हुल दिवस आदिवासी समाज की उस अद्भुत भावना को दर्शाता है, जो अपने देश और सम्मान के लिए अपने प्राणों की आहुति देने से भी पीछे नहीं हटती।
हूल दिवस मातृभूमि के लिए मर-मिटने वाले हमारे आदिवासी समाज के अद्भुत जज्बे का सशक्त प्रतीक है। भारतीय इतिहास के इस गौरवशाली अवसर पर सिदो-कान्हू, चांद-भैरव और फूलो-झानो जैसे उन सभी वीर-वीरांगनाओं को मेरी आदरपूर्ण श्रद्धांजलि, जिन्होंने विदेशी शासन के अन्याय का डटकर मुकाबला किया।…
— Narendra Modi (@narendramodi) June 30, 2026
उन्होंने 1855 के ऐतिहासिक संथाल विद्रोह का उल्लेख करते हुए कहा कि सिदो-कान्हू, चांद-भैरव और फूलो-झानो जैसे महान योद्धाओं ने विदेशी शासन के अन्याय और अत्याचार के खिलाफ साहसपूर्वक संघर्ष किया। उनकी बहादुरी आज भी देशवासियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
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1855 का संथाल विद्रोह: स्वतंत्रता संग्राम का महत्वपूर्ण अध्याय
गौरतलब है कि 30 जून को हुल दिवस के रूप में मनाया जाता है, जो 1855 में हुए संथाल विद्रोह की स्मृति में समर्पित है। यह विद्रोह ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन के खिलाफ सबसे बड़े जनजातीय आंदोलनों में से एक माना जाता है।
छोटा नागपुर क्षेत्र में हुआ यह विद्रोह 1857 के सिपाही विद्रोह से भी पहले ब्रिटिश शासन के खिलाफ एक मजबूत प्रतिरोध के रूप में देखा जाता है। हालांकि बाद में ब्रिटिश सेना द्वारा इसे दबा दिया गया, लेकिन इस संघर्ष में हजारों संथाल आदिवासियों ने अपने प्राणों की आहुति दी।
आदिवासी गौरव और बलिदान को याद करने का दिन
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आदिवासी समुदाय के वीरों का संघर्ष और बलिदान देश की एकता, सम्मान और गौरव को मजबूत करता है। उन्होंने कहा कि उनकी कहानी आने वाली पीढ़ियों को देशभक्ति और साहस की प्रेरणा देती रहेगी।

