हरियाणा में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा, 2 लाख किसान जुड़े, 3 लाख एकड़ भूमि शामिल, 12 हजार प्रशिक्षित, 2025-26 में 20,727 एकड़ में खेती।
हरियाणा सरकार राज्य में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देकर किसानों को आत्मनिर्भर और आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में लगातार काम कर रही है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व में चल रही यह पहल अब तेजी से धरातल पर असर दिखा रही है।
2022 में शुरू हुई योजना से बढ़ा किसानों का जुड़ाव
वर्ष 2022 में शुरू की गई प्राकृतिक खेती योजना के तहत राज्य सरकार ने एक विशेष ऑनलाइन पोर्टल तैयार किया, जिसके माध्यम से किसानों का पंजीकरण किया जा रहा है। अब तक लगभग 2 लाख किसानों ने इस पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन कराया है, जिसके तहत करीब 3 लाख एकड़ कृषि भूमि प्राकृतिक खेती के दायरे में लाई गई है।
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हजारों किसानों का क्षेत्र सत्यापन पूरा
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, अब तक 23,930 किसानों का लगभग 44 हजार एकड़ क्षेत्र का सत्यापन सफलतापूर्वक पूरा किया जा चुका है। यह प्रक्रिया योजना की पारदर्शिता और प्रभावी क्रियान्वयन को दर्शाती है।
2025-26 में 20,727 एकड़ में प्राकृतिक खेती
वर्ष 2025-26 के दौरान हरियाणा में 20,727 एकड़ क्षेत्र में प्राकृतिक खेती की गई है। यह आंकड़ा राज्य में पर्यावरण अनुकूल और टिकाऊ कृषि की ओर बढ़ते कदमों को दर्शाता है।
हरियाणा सरकार किसानों को सशक्त और समृद्ध बनाने के लिए प्राकृतिक खेती को निरंतर बढ़ावा दे रही है। वर्ष 2022 में शुरू की गई प्राकृतिक खेती योजना के तहत राज्य में एक विशेष पोर्टल भी शुरू किया गया, जिस पर लगभग 2 लाख किसानों ने 3 लाख एकड़ क्षेत्र का पंजीकरण कराया है। इनमें से 23,930…
— DPR Haryana (@DiprHaryana) June 22, 2026
प्रशिक्षण केंद्रों से किसानों को मिल रहा मार्गदर्शन
किसानों को प्राकृतिक खेती के प्रति जागरूक और प्रशिक्षित करने के लिए कुरुक्षेत्र, जींद, सिरसा और करनाल में विशेष प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किए गए हैं। इन केंद्रों के माध्यम से अब तक 12 हजार से अधिक किसानों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है, जिससे वे रासायनिक खेती की बजाय प्राकृतिक तरीकों को अपनाने के लिए प्रेरित हो रहे हैं।
पर्यावरण और किसानों दोनों के लिए लाभकारी पहल
सरकार की यह योजना न केवल खेती की लागत कम करने में मदद कर रही है, बल्कि मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने, जल संरक्षण और पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में भी अहम भूमिका निभा रही है। इससे किसानों की आय बढ़ने के साथ-साथ सतत कृषि को भी बढ़ावा मिल रहा है।

