फर्जी वीडियो मामले में भगवंत मान सरकार ने कहा कि फॉरेंसिक जांच में वीडियो में दिख रहा व्यक्ति मुख्यमंत्री नहीं पाया गया। जांच और कार्रवाई जारी रहेगी।
मुख्यमंत्री भगवंत मान से जुड़े कथित फर्जी वीडियो मामले को लेकर पंजाब सरकार ने बड़ा बयान जारी किया है। सरकार ने कहा कि दो स्वतंत्र और प्रतिष्ठित फॉरेंसिक लैब्स द्वारा की गई जांच में सामने आया है कि वीडियो में दिखाई देने वाला व्यक्ति मुख्यमंत्री भगवंत मान नहीं है।
पंजाब सरकार के अनुसार, फॉरेंसिक जांच में चेहरे की तुलना, लंबाई का विश्लेषण, शरीर की बनावट, हाव-भाव, त्वचा के रंग और साइड व बैक प्रोफाइल सहित कई तकनीकी पहलुओं का अध्ययन किया गया। जांच में इन सभी मानकों के आधार पर वीडियो में मौजूद व्यक्ति और मुख्यमंत्री भगवंत मान के बीच स्पष्ट अंतर पाया गया।
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फर्जी वीडियो के जरिए छवि खराब करने की कोशिश का आरोप
सरकार ने आरोप लगाया कि इस वीडियो का इस्तेमाल राजनीतिक उद्देश्य से मुख्यमंत्री भगवंत मान की छवि को नुकसान पहुंचाने और धार्मिक भावनाओं को आहत करने के लिए किया गया। पंजाब सरकार ने इसे राज्य में शांति और सामाजिक सद्भाव को प्रभावित करने वाली गंभीर साजिश बताया।
सरकार की ओर से कहा गया कि मामले की विस्तृत जांच की जाएगी और इस कथित साजिश में शामिल सभी लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
Conspiracy to malign Chief Minister @BhagwantMann exposed !
Two reputed, independent forensic labs have examined the video and reached the same conclusion: the individual seen in the footage is NOT CM Bhagwant Mann.
Facial comparison, height analysis, body structure, posture,… pic.twitter.com/69ktnU52pJ
— AAP Punjab (@AAPPunjab) June 18, 2026
जांच के बाद सच्चाई सामने आने का दावा
पंजाब सरकार ने कहा कि फॉरेंसिक रिपोर्ट के बाद सच्चाई सामने आ गई है और लोगों को गुमराह करने की कोशिश नाकाम हो गई है। सरकार ने कहा कि धार्मिक भावनाओं से जुड़े मामलों में राजनीति करने वालों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे।
बेअदबी रोकने के लिए सख्त कानून पर जोर
सरकार ने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार धार्मिक भावनाओं और आस्था का सम्मान करती है। सरकार ने दोहराया कि बेअदबी जैसी घटनाओं को रोकने के लिए सख्त कानून और प्रभावी कार्रवाई उसकी प्राथमिकता है।
पंजाब सरकार ने कहा कि जनता अब यह अंतर समझ रही है कि कौन आस्था और कानून व्यवस्था की रक्षा के लिए काम कर रहा है और कौन धार्मिक मुद्दों का राजनीतिक लाभ उठाने की कोशिश कर रहा है।

