अरविंद केजरीवाल ने पेपर लीक रोकने और टेलीग्राम पर लगाए गए प्रतिबंध को लेकर केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए। मामले में डिजिटल प्लेटफॉर्म रेगुलेशन और परीक्षा सुरक्षा पर बहस तेज हुई।
आम आदमी पार्टी के संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने केंद्र सरकार द्वारा परीक्षा पेपर लीक रोकने और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लगाए गए प्रतिबंधों को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने सरकार की कार्रवाई को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है।
केजरीवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए कहा कि सरकार की मौजूदा नीतियां पेपर लीक रोकने में प्रभावी नहीं हैं और ये कदम केवल प्रतीकात्मक हैं।
मोदी सरकार की पेपर लीक रोकने की नीयत ही नहीं है। इसलिए इस तरह के बेतुके कदम उठाये जा रहे हैं। सेना के जहाज़ों से पेपर ट्रांसपोर्ट करना, टेलीग्राम बंद करना। क्या इन कदमों से पेपर लीक बंद होंगे? बिल्कुल नहीं।
पेपर लीक का धंधा अरबों का धंधा है। पैसा टॉप तक जाता है। पेपर लीक बंद कर… https://t.co/skWpWOBocY
— Arvind Kejriwal (@ArvindKejriwal) June 17, 2026
सरकार की कार्रवाई पर सवाल
केजरीवाल ने आरोप लगाया कि पेपर लीक रोकने के नाम पर उठाए जा रहे कदम वास्तविक समस्या का समाधान नहीं हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह के निर्णयों से आम उपयोगकर्ताओं और छात्रों पर असर पड़ता है, जबकि असली दोषी व्यवस्था से बाहर रहते हैं।
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टेलीग्राम पर अस्थायी प्रतिबंध का मुद्दा
राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) द्वारा टेलीग्राम प्लेटफॉर्म पर लगाए गए अस्थायी प्रतिबंध को लेकर भी विवाद सामने आया है। यह प्रतिबंध NEET-UG जैसी परीक्षाओं के दौरान पेपर लीक गतिविधियों को रोकने के उद्देश्य से लागू किया गया था।
सरकारी निर्देश के अनुसार, यह रोक सीमित अवधि के लिए लागू की गई है और इसका उद्देश्य परीक्षा सुरक्षा को मजबूत करना बताया गया है।
डिजिटल प्लेटफॉर्म और परीक्षा सुरक्षा पर बहस
इस पूरे मामले के बाद डिजिटल प्लेटफॉर्म की भूमिका और परीक्षा सुरक्षा को लेकर बहस तेज हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि तकनीक के दुरुपयोग को रोकने के लिए मजबूत और संतुलित नीति की आवश्यकता है।

