उत्तराखंड राज्य कृषि उत्पादन मंडी परिषद की बैठक में हर विकासखंड में आदर्श कृषि एवं बागवानी गांव विकसित करने, किसानों की आय बढ़ाने, जैविक खेती और डिजिटल विपणन को बढ़ावा देने के निर्देश दिए गए।
उत्तराखंड सरकार ने कृषि और बागवानी क्षेत्र को आधुनिक और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। राज्य कृषि उत्पादन मंडी परिषद की बैठक में अधिकारियों के साथ कृषि और उद्यान विभाग की विस्तृत समीक्षा करते हुए राज्य के प्रत्येक विकासखंड से एक-एक गांव को आदर्श कृषि एवं बागवानी गांव के रूप में विकसित करने के निर्देश दिए गए। सरकार का मानना है कि इस पहल से किसानों की आय बढ़ाने, खेती की लागत कम करने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में बड़ी मदद मिलेगी।
बैठक में अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए कि राज्य के अलग-अलग क्षेत्रों की भौगोलिक परिस्थितियों, जलवायु और मिट्टी की गुणवत्ता को ध्यान में रखते हुए वहां के लिए उपयुक्त फसलों, फलों और सब्जियों की पहचान की जाए। इसके बाद वैज्ञानिक और योजनाबद्ध तरीके से खेती को बढ़ावा देने के लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार की जाए। सरकार ने इसके लिए तीन वर्ष की विशेष कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए हैं, जिसमें उत्पादन बढ़ाने के साथ किसानों की आमदनी को स्थायी रूप से मजबूत करने पर जोर रहेगा।
किसानों की आय बढ़ाने पर रहेगा मुख्य फोकस
सरकार का कहना है कि उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य में खेती और बागवानी को आधुनिक तकनीक से जोड़ना समय की बड़ी जरूरत है। इसी को ध्यान में रखते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि किसानों को नई तकनीक, बेहतर बीज और आधुनिक कृषि उपकरण उपलब्ध कराए जाएं। इसके साथ ही खेती में लागत कम करने और उत्पादन बढ़ाने के उपायों को प्राथमिकता दी जाए।
बैठक में यह भी कहा गया कि छोटे और सीमांत किसानों के लिए विशेष योजनाएं तैयार की जाएं ताकि वे भी आधुनिक खेती से जुड़ सकें। अधिकारियों को किसानों की समस्याओं को जमीनी स्तर पर समझने और उनके समाधान के लिए नियमित निगरानी करने के निर्देश दिए गए।
जैविक खेती और तिलहन उत्पादन को मिलेगा बढ़ावा
राज्य सरकार ने जैविक खेती को बढ़ावा देने पर भी विशेष जोर दिया है। बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि प्रदेश में बड़े स्तर पर जैविक खेती को प्रोत्साहित किया जाए और किसानों को इसके लिए प्रशिक्षण दिया जाए। सरकार का मानना है कि जैविक खेती से किसानों को बेहतर मूल्य मिलेगा और उत्तराखंड के उत्पादों की पहचान राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत होगी।
इसके अलावा तिलहन फसलों के उत्पादन को बढ़ाने के लिए भी योजनाबद्ध कार्य करने के निर्देश दिए गए। अधिकारियों से कहा गया कि ऐसे क्षेत्रों की पहचान की जाए जहां सरसों, तिल और अन्य तिलहन फसलों का उत्पादन बढ़ाया जा सकता है। इससे किसानों की आमदनी में वृद्धि होने के साथ खाद्य तेलों के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को भी मजबूती मिलेगी।
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किसानों को दिए जाएंगे प्रशिक्षण और आधुनिक संसाधन
बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि किसानों के लिए बड़े पैमाने पर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएं। इन कार्यक्रमों के माध्यम से किसानों को आधुनिक खेती, फसल प्रबंधन, जल संरक्षण और नई कृषि तकनीकों की जानकारी दी जाएगी।
सरकार ने यह भी कहा कि किसानों को उच्च गुणवत्ता वाले बीज और पौधे उपलब्ध कराए जाएं ताकि उत्पादन की गुणवत्ता बेहतर हो सके। इसके साथ ही बागवानी क्षेत्र में नई संभावनाओं को तलाशने और किसानों को फल उत्पादन की ओर प्रेरित करने पर भी जोर दिया गया।
सौर ऊर्जा और बायोगैस को मिलेगा बढ़ावा
खेती को पर्यावरण अनुकूल और कम खर्चीला बनाने के लिए सरकार ने सौर ऊर्जा आधारित पंप और बायोगैस संयंत्रों को बढ़ावा देने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों से कहा गया कि किसानों को सौर ऊर्जा से चलने वाले सिंचाई पंप उपलब्ध कराने की दिशा में तेजी से काम किया जाए ताकि बिजली और डीजल पर निर्भरता कम हो सके।
इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में बायोगैस संयंत्रों को बढ़ावा देकर जैविक खाद तैयार करने और स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग को प्रोत्साहित करने की योजना भी बनाई जा रही है। इससे किसानों के खर्च में कमी आएगी और पर्यावरण संरक्षण को भी मजबूती मिलेगी।
डिजिटल माध्यम से मजबूत होगा कृषि विपणन
बैठक में कृषि उत्पादों के विपणन को मजबूत बनाने के लिए डिजिटल व्यवस्था को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया गया। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि किसानों को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़कर उनकी उपज को बेहतर बाजार उपलब्ध कराया जाए। सरकार का मानना है कि डिजिटल विपणन व्यवस्था से किसानों को उनकी फसलों का उचित मूल्य मिल सकेगा और बिचौलियों पर निर्भरता कम होगी।
इसके अलावा मंडियों की व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी और आधुनिक बनाने के लिए भी कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए गए। अधिकारियों से कहा गया कि किसानों तक सरकारी योजनाओं की जानकारी समय पर पहुंचे और उन्हें सभी सुविधाएं सरल तरीके से उपलब्ध कराई जाएं।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगी नई मजबूती
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकार की यह योजना सफल होती है तो उत्तराखंड के ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। आदर्श कृषि और बागवानी गांव विकसित होने से रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और युवाओं का खेती की ओर रुझान भी बढ़ेगा।
सरकार का उद्देश्य केवल उत्पादन बढ़ाना नहीं बल्कि खेती को लाभकारी और टिकाऊ बनाना है। यही वजह है कि आधुनिक तकनीक, जैविक खेती, डिजिटल विपणन और ऊर्जा संरक्षण जैसे विषयों को इस योजना का प्रमुख हिस्सा बनाया गया है। आने वाले समय में यह पहल उत्तराखंड की कृषि व्यवस्था को नई पहचान दे सकती है।

