हरियाणा सरकार ने तबादला नीति में संशोधन करते हुए पाँच वर्ष से अधिक कार्यकाल की छूट केवल एक वर्ष के भीतर सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारियों तक सीमित कर दी।
हरियाणा सरकार ने सरकारी कर्मचारियों के तबादलों को लेकर महत्वपूर्ण संशोधन करते हुए नई व्यवस्था लागू करने का फैसला लिया है। राज्य सरकार द्वारा जारी नए निर्देशों के अनुसार अब किसी भी स्टेशन पर पाँच वर्ष से अधिक समय तक कार्य करने की छूट केवल उन्हीं कर्मचारियों को मिलेगी, जो एक वर्ष के भीतर सेवानिवृत्त होने वाले हैं। सरकार के इस फैसले को प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता और कार्यप्रणाली में संतुलन बनाए रखने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी द्वारा जारी आदेशों में कहा गया है कि मुख्य सचिव कार्यालय द्वारा 19 नवंबर 1998 को जारी पुराने निर्देशों में संशोधन किया गया है। नए नियमों के अनुसार लंबे समय से एक ही स्थान पर कार्यरत कर्मचारियों के तबादलों को लेकर अधिक स्पष्ट और व्यवस्थित नीति लागू की जाएगी।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि जिन कर्मचारियों को पाँच वर्ष से अधिक अवधि तक एक ही स्टेशन पर बने रहने की अनुमति दी जाएगी, वे केवल वही कर्मचारी होंगे जो आगामी एक वर्ष के भीतर सेवानिवृत्त होने वाले हैं। हालांकि जनहित को ध्यान में रखते हुए ऐसे कर्मचारियों का एक स्टेशन से दूसरे स्टेशन पर 20 किलोमीटर की परिधि के भीतर तबादला किया जा सकेगा।
सरकार द्वारा जारी निर्देशों में यह भी उल्लेख किया गया है कि इस प्रकार के तबादलों में कर्मचारी के निवास स्थान में परिवर्तन शामिल नहीं माना जाएगा। इसके साथ ही हरियाणा सिविल सेवा नियम 2016 के तहत ऐसे तबादलों को यात्रा भत्ता, दैनिक भत्ता और कार्यभार ग्रहण करने के लिए मिलने वाले समय की श्रेणी में तबादला नहीं माना जाएगा।
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प्रशासनिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस निर्णय से लंबे समय से एक ही स्थान पर कार्यरत कर्मचारियों की संख्या नियंत्रित होगी और प्रशासनिक कार्यों में अधिक पारदर्शिता आएगी। इसके साथ ही विभागों में कार्य वितरण और जवाबदेही भी बेहतर होगी।
मुख्य सचिव द्वारा जारी निर्देश सभी प्रशासनिक सचिवों, विभागाध्यक्षों, बोर्डों, निगमों, प्राधिकरणों के प्रबंध निदेशकों, मुख्य प्रशासकों और सभी जिलों के उपायुक्तों को भेज दिए गए हैं। सरकार ने निर्देश दिया है कि नई नीति का पालन सुनिश्चित किया जाए और तबादला प्रक्रिया को नियमों के अनुसार लागू किया जाए।
सरकारी कर्मचारियों के बीच इस निर्णय को लेकर विभिन्न प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ कर्मचारी इसे प्रशासनिक सुधार की दिशा में सकारात्मक कदम मान रहे हैं, जबकि कुछ कर्मचारियों का कहना है कि लंबे समय से एक स्थान पर कार्य करने वाले कर्मचारियों को अचानक बदलाव का सामना करना पड़ सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि राज्य सरकार का यह कदम प्रशासनिक दक्षता को मजबूत करने और कार्यस्थलों पर संतुलन बनाए रखने के उद्देश्य से उठाया गया है। इससे विभागीय कार्यों में निष्पक्षता और पारदर्शिता को बढ़ावा मिलने की संभावना है।
राज्य सरकार पहले भी प्रशासनिक सुधारों को लेकर कई महत्वपूर्ण कदम उठा चुकी है और नई तबादला नीति को उसी क्रम में एक और बड़ा निर्णय माना जा रहा है। आने वाले समय में इसका प्रभाव विभिन्न विभागों की कार्यप्रणाली और कर्मचारियों की तैनाती व्यवस्था पर स्पष्ट रूप से दिखाई दे सकता है।

