नई रिपोर्ट के अनुसार भारत में 75 करोड़ स्मार्टफोन यूजर्स में से 90% लोग लो बैटरी से चिंता महसूस करते हैं और यह अब डिजिटल लाइफस्टाइल का बड़ा मानसिक दबाव बन चुका है।
भारत में स्मार्टफोन अब सिर्फ एक गैजेट नहीं बल्कि रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है, लेकिन इसके साथ एक नई मानसिक परेशानी भी तेजी से बढ़ रही है। हाल ही में आई एक रिपोर्ट के अनुसार देश के करीब 75 करोड़ स्मार्टफोन यूजर्स में से लगभग 90 प्रतिशत लोग बैटरी कम होने पर चिंता और बेचैनी महसूस करते हैं।
रिपोर्ट में बताया गया है कि जैसे ही फोन की बैटरी 50 से 30 प्रतिशत के बीच पहुंचती है, यूजर्स में असहजता बढ़ने लगती है। वहीं जब बैटरी 20 प्रतिशत से नीचे चली जाती है, तो लगभग 72 प्रतिशत लोग घबराहट महसूस करने लगते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार यह स्थिति दिखाती है कि स्मार्टफोन अब लोगों की जिंदगी में इतनी गहराई तक जुड़ चुका है कि बैटरी खत्म होने का डर भी एक तरह की मानसिक चिंता बन गया है। करीब 65 प्रतिशत यूजर्स ने माना कि फोन की बैटरी खत्म होने पर उन्हें भावनात्मक असहजता होती है।
रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि भारत में लगभग 90 प्रतिशत लोग दिन में कम से कम दो बार अपना फोन चार्ज करते हैं। वहीं 40 प्रतिशत लोग चार्जिंग के दौरान भी फोन का लगातार इस्तेमाल करते हैं, जिससे बैटरी पर और दबाव बढ़ता है।
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औसतन भारतीय यूजर रोजाना लगभग 6 घंटे स्मार्टफोन पर बिताता है, जो दुनिया में सबसे अधिक समय में से एक है। यह आदत भी बैटरी ड्रेन और चिंता दोनों को बढ़ा रही है।
इसके अलावा, रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अब स्मार्टफोन खरीदते समय यूजर्स केवल स्टोरेज या कीमत नहीं देखते, बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस फीचर्स को भी काफी महत्व दे रहे हैं। लगभग 89 प्रतिशत लोग मानते हैं कि AI फीचर्स उनके खरीद निर्णय को प्रभावित करते हैं।
फाइनेंसिंग की बात करें तो लगभग 43 प्रतिशत लोग स्मार्टफोन खरीदने के लिए ईएमआई का सहारा लेते हैं, जबकि 79 प्रतिशत का मानना है कि ईएमआई के कारण महंगे फोन खरीदना आसान हो गया है।
कुल मिलाकर यह रिपोर्ट बताती है कि भारत में स्मार्टफोन सिर्फ तकनीक नहीं बल्कि जीवनशैली और मानसिक आदतों का हिस्सा बन चुका है, जहां बैटरी खत्म होने का डर भी एक आम चिंता बन गया है।

