पंजाब पुलिस का ‘युवा सांझ कार्यक्रम’ बना नई उम्मीद, हजारों युवाओं को गैंगस्टर और हिंसा के रास्ते से लौटाया
पंजाब में बढ़ते गैंगस्टर नेटवर्क, नशाखोरी और सोशल मीडिया के जरिए फैल रहे हिंसक प्रभावों के खिलाफ अब पंजाब पुलिस ने एक नई सामाजिक पहल को मजबूत हथियार बना लिया है। ‘गैंगस्टरों ते वार’ अभियान के साथ-साथ चलाया जा रहा पंजाब पुलिस का ‘युवा सांझ कार्यक्रम’ राज्य के भटके हुए युवाओं को अपराध और हिंसा की दुनिया से बाहर निकालने में अहम भूमिका निभा रहा है। इस पहल के तहत पंजाब पुलिस ने अब तक 2,358 ऐसे युवाओं की पहचान की है, जो सोशल मीडिया के माध्यम से गैंगस्टर संस्कृति, आतंकवाद या हिंसक विचारधाराओं से प्रभावित हो सकते थे।
चंडीगढ़ में जारी जानकारी के अनुसार, कम्युनिटी पुलिसिंग को नई दिशा देते हुए पंजाब पुलिस ने इस कार्यक्रम को राज्यभर में तेज़ी से लागू किया है। कम्युनिटी अफेयर्स डिवीजन (सीएडी) की स्पेशल डीजीपी Gurpreet Kaur Deo की अगुवाई में जनवरी 2026 से कई विशेष बैठकें आयोजित की गईं, जिनमें पुलिस अधिकारियों, सामुदायिक प्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों को इस पहल के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर प्रशिक्षित और जागरूक किया गया।
यह कार्यक्रम मुख्य रूप से उन युवाओं पर केंद्रित है, जो सोशल मीडिया पर गैंगस्टर जीवनशैली, हथियारों के प्रदर्शन, हिंसक वीडियो या कट्टरपंथी सामग्री से प्रभावित हो सकते हैं। पुलिस की साइबर और खुफिया टीमों द्वारा ऑनलाइन गतिविधियों का विश्लेषण कर ऐसे संवेदनशील युवाओं की पहचान की जाती है। अब तक पहचाने गए 2,358 युवाओं में से 1,519 की प्रोफाइल राज्य स्तरीय ‘युवा सांझ सॉफ्टवेयर’ पर तैयार की जा चुकी हैं।
पंजाब के डीजीपी Gaurav Yadav ने कहा कि पंजाब पुलिस एक संतुलित रणनीति पर काम कर रही है। उन्होंने बताया कि एक ओर ‘गैंगस्टरों ते वार’ के तहत अपराधियों और गैंगस्टरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है, वहीं दूसरी ओर ‘युवा सांझ’ के जरिए युवाओं तक पहुंचकर उन्हें सही दिशा में लाने की कोशिश की जा रही है।
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उन्होंने कहा कि इस पहल में मनोवैज्ञानिक प्रोफाइलिंग, काउंसलिंग, परिवार की भागीदारी और सामुदायिक समर्थन को प्रमुख आधार बनाया गया है। जिन युवाओं को अधिक देखभाल और मार्गदर्शन की जरूरत होती है, उन्हें उप-मंडल स्तर के सामुदायिक सहायता केंद्रों से जोड़ा जाता है ताकि उनकी लगातार निगरानी और सहायता सुनिश्चित की जा सके।
पुलिस आंकड़ों के अनुसार, अब तक 1,490 युवाओं को जागरूक किया जा चुका है, जबकि 1,109 युवाओं ने काउंसलिंग सत्रों में भाग लिया। जिला खुफिया इकाइयों द्वारा 1,836 युवाओं की काउंसलिंग की गई, जबकि जिला पुलिस टीमों ने 522 अन्य संवेदनशील युवाओं की पहचान कर उन्हें इस कार्यक्रम से जोड़ा।
जमीनी स्तर पर जिला ‘युवा सांझ’ समितियों का गठन किया गया है, जिनका नेतृत्व संबंधित जिले के पुलिस अधिकारियों द्वारा किया जा रहा है। इन समितियों में सिविल सोसायटी के सदस्य, सेवानिवृत्त अधिकारी, मनोवैज्ञानिक, एनजीओ प्रतिनिधि और समाजसेवी शामिल हैं। इन सभी के सहयोग से युवाओं के पुनर्वास और मानसिक मार्गदर्शन पर काम किया जा रहा है।
स्पेशल डीजीपी गुरप्रीत कौर देओ ने कहा कि इस कार्यक्रम का मकसद केवल अपराध रोकना नहीं बल्कि युवाओं को समय रहते सही रास्ते पर लाना है। उन्होंने कहा कि कई बार युवा सोशल मीडिया के भ्रम और दिखावे में आकर गलत दिशा में कदम बढ़ा देते हैं, लेकिन समय पर हस्तक्षेप कर उनकी जिंदगी बदली जा सकती है।
उन्होंने कहा कि पंजाब पुलिस जरूरत के अनुसार सख्ती और संवेदनशीलता दोनों के साथ काम कर रही है ताकि किसी भी युवा को अपराध की दुनिया में जाने से पहले रोका जा सके। आने वाले महीनों में इस अभियान के तहत 11 और संवाद सत्र आयोजित किए जाएंगे ताकि अधिक से अधिक युवाओं तक पहुंच बनाई जा सके।
पुनर्वास प्रक्रिया के तहत जिला प्रशासन, पंजाब स्किल डेवलपमेंट मिशन और अन्य सहयोगी संस्थाओं की मदद से युवाओं को कौशल विकास प्रशिक्षण, रोजगार के अवसर और आवश्यक वित्तीय सहायता भी उपलब्ध कराई जा रही है। इसका उद्देश्य युवाओं को आत्मनिर्भर बनाना और उन्हें सकारात्मक जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करना है।
फाजिल्का के एसएसपी Gurmeet Singh ने इस पहल को देश में अपनी तरह की अनोखी पहल बताया। उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम ने न केवल अपराध दर कम करने में मदद की है बल्कि हजारों युवाओं को असामाजिक तत्वों और गैंगस्टर नेटवर्क से दूर रखने में भी अहम भूमिका निभाई है।
उन्होंने कहा कि उनके जिले में बड़ी संख्या में ऐसे युवाओं का समूह तैयार हुआ है, जो कानून का सम्मान करते हैं और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए आगे आ रहे हैं। पंजाब पुलिस का यह प्रयास अब केवल कानून व्यवस्था तक सीमित नहीं रह गया, बल्कि यह युवाओं के भविष्य को सुरक्षित बनाने की एक सामाजिक मुहिम बन चुका है।

