आतिशी ने दिल्ली में ₹2500 भत्ते में देरी और AAP सांसदों के भाजपा में विलय को असंवैधानिक बताते हुए सरकार को घेरा।
दिल्ली की राजनीति में एक बार फिर बयानबाज़ी तेज हो गई है। आम आदमी पार्टी (AAP) की वरिष्ठ नेता और दिल्ली विधानसभा में विपक्ष की नेता Atishi Marlena ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने महिलाओं को दिए जाने वाले ₹2500 मासिक भत्ते में देरी और AAP के राज्यसभा सांसदों के कथित तौर पर भाजपा में विलय को लेकर गंभीर संवैधानिक सवाल खड़े किए।
आतिशी ने कहा कि भाजपा ने दिल्ली विधानसभा चुनाव से पहले महिलाओं से वादा किया था कि 8 मार्च से उनके बैंक खातों में ₹2500 की राशि ट्रांसफर की जाएगी, लेकिन न तो 2025 में और न ही 2026 में यह वादा पूरा हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि यह केवल वोट हासिल करने का राजनीतिक हथकंडा था और अब सरकार इस मुद्दे पर चुप्पी साधे हुए है। उनके अनुसार, महिलाओं से मोबाइल नंबर बैंक खातों से जोड़ने को कहा गया था और उन्हें एसएमएस के जरिए भुगतान की सूचना देने का भरोसा दिया गया था, लेकिन आज तक कोई राशि नहीं पहुंची है।
सार्वजनिक सेवाओं को लेकर भी आतिशी ने सरकार को घेरा। उन्होंने दावा किया कि पहले जहां महिलाएं आसानी से बसों में सफर कर पाती थीं, अब उन्हें “पिंक कार्ड” के लिए लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ रहा है। इसके अलावा स्वास्थ्य सेवाओं में भी गिरावट का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि मुफ्त दवाइयों और जांच की सुविधा पहले जितनी सुलभ नहीं रही।
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सबसे बड़ा विवाद AAP के राज्यसभा सांसदों के भाजपा में विलय को लेकर सामने आया है। आतिशी ने इस कदम को पूरी तरह “असंवैधानिक” करार देते हुए कहा कि संविधान के अनुसार किसी भी दल का विलय तभी मान्य होता है जब मूल राजनीतिक पार्टी का विलय हो और उसे कम से कम दो-तिहाई विधायी दल का समर्थन प्राप्त हो। उन्होंने आरोप लगाया कि इस मामले में इन संवैधानिक प्रावधानों का पालन नहीं किया गया है।
आतिशी ने स्पष्ट किया कि Aam Aadmi Party इस मुद्दे पर कानूनी और संवैधानिक लड़ाई लड़ने के लिए तैयार है और पार्टी लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए हर संभव कदम उठाएगी। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ एक राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि संविधान और लोकतंत्र की मर्यादा से जुड़ा सवाल है।
दिल्ली की सियासत में इस बयान के बाद नया विवाद खड़ा हो गया है और आने वाले दिनों में यह मुद्दा और गरमाने की संभावना है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि महिलाओं के भत्ते और सांसदों के विलय जैसे मुद्दे आगामी चुनावी माहौल में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

