हरियाणा विधानसभा में कांग्रेस के बहिष्कार पर CM नायब सैनी ने कड़ा हमला बोलते हुए इसे लोकतंत्र और सदन की गरिमा का अपमान बताया।
हरियाणा की राजनीति में उस समय बड़ा विवाद खड़ा हो गया जब विशेष सत्र के दौरान विपक्षी दल कांग्रेस के सदन में शामिल न होने पर सत्तापक्ष और विपक्ष आमने-सामने आ गए। Nayab Singh Saini ने इस घटनाक्रम पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इसे राज्य के इतिहास का “काला दिन” करार दिया और आरोप लगाया कि विपक्ष ने सदन की गरिमा का अपमान करते हुए बाहर “डुप्लीकेट सेशन” चलाया।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की लड़ाई विधानसभा के भीतर लड़ी जानी चाहिए, लेकिन कांग्रेस ने इसे “वाहन मंडल” तक सीमित कर दिया, जो जनता के विश्वास के साथ विश्वासघात है। मुख्यमंत्री ने अपने शायराना अंदाज में तंज कसते हुए कहा कि जनता ने जिन प्रतिनिधियों को बहस के लिए सदन में भेजा था, वे पार्किंग में खड़े होकर परछाइयों से लड़ रहे हैं, जो लोकतांत्रिक मूल्यों का सीधा अपमान है।
मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि यह न केवल विधानसभा का अपमान है, बल्कि हरियाणा की महिलाओं, संविधान और लोकतंत्र के प्रति भी असम्मानजनक है। उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि बिना किसी नियम, प्रक्रिया और अध्यक्ष के सम्मान के गाड़ियों में बैठकर समानांतर सत्र चलाया गया, जिसे जनता कभी माफ नहीं करेगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार द्वारा लाया गया प्रस्ताव पूरी तरह गैर-राजनीतिक है और इसका उद्देश्य केवल महिलाओं के सम्मान, अधिकारों और सशक्तिकरण को बढ़ावा देना है।
इस दौरान मुख्यमंत्री ने विपक्ष के उस कदम की भी आलोचना की जिसमें विधानसभा परिसर की पार्किंग में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर समानांतर गतिविधियां चलाई गईं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के कुछ नेताओं ने स्वयं स्वीकार किया है कि उनकी सोच में बदलाव की जरूरत है, जो इस पूरे घटनाक्रम की गंभीरता को दर्शाता है। साथ ही उन्होंने सदन में इस “कृत्य” के विरोध में निंदा प्रस्ताव लाने की बात भी कही।
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महिला सशक्तिकरण के मुद्दे पर बोलते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि सरकार जनगणना और परिसीमन का इंतजार करती, तो महिलाओं को समय पर 33 प्रतिशत आरक्षण का लाभ नहीं मिल पाता। उन्होंने बताया कि इसी उद्देश्य से केंद्र सरकार द्वारा नारी शक्ति वंदन अधिनियम से जुड़े संशोधन लाए गए हैं, ताकि वर्ष 2029 के आम चुनाव तक महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित की जा सके। उन्होंने जानकारी दी कि राज्य में चलाई जा रही योजनाओं के तहत महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं, जिनमें दीनदयाल लाडो लक्ष्मी योजना के तहत लाभार्थियों को नियमित किस्तें दी जा रही हैं।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि यह विशेष सत्र नारी शक्ति को समर्पित है और इसका मकसद महिलाओं के अधिकारों को मजबूत करना है। उन्होंने विपक्षी दलों पर आरोप लगाया कि उन्होंने इस महत्वपूर्ण विधेयक को पारित नहीं होने दिया और परिसीमन के नाम पर भ्रम फैलाया। इस संदर्भ में उन्होंने Amit Shah के बयान का हवाला देते हुए कहा कि किसी भी राज्य के प्रतिनिधित्व में कमी नहीं होगी और विपक्ष का यह दावा पूरी तरह निराधार है।
अंत में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने सभी राजनीतिक दलों से अपील की कि वे राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर महिलाओं के सशक्तिकरण के इस प्रयास का समर्थन करें। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव केवल आलोचना के लिए नहीं, बल्कि एक मजबूत संदेश देने के लिए है कि जो भी महिलाओं के अधिकारों के साथ खिलवाड़ करेगा, उसे जनता के न्याय का सामना करना पड़ेगा। यह पूरा घटनाक्रम हरियाणा की राजनीति में नई बहस को जन्म दे रहा है, जहां लोकतांत्रिक मर्यादाओं और राजनीतिक जिम्मेदारियों पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

