AAP पंजाब नेताओं ने अरविंद केजरीवाल के कोर्ट में पेश न होने के फैसले का समर्थन करते हुए इसे न्याय, पारदर्शिता और आत्मसम्मान की लड़ाई बताया।
आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक Arvind Kejriwal के अदालत में पेश न होने के फैसले को लेकर पंजाब की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। पार्टी की पंजाब इकाई की सीनियर लीडरशिप ने इस फैसले का खुलकर समर्थन किया है और इसे न्याय, आत्म-सम्मान तथा सैद्धांतिक मूल्यों की रक्षा के लिए उठाया गया एक अहम कदम बताया है।
Bhagwant Mann ने इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि केजरीवाल ने यह साबित किया है कि न्याय और आत्मसम्मान के लिए व्यक्ति को हर तरह की कुर्बानी देने के लिए तैयार रहना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि जब न्यायपालिका की निष्पक्षता पर सवाल उठते हैं तो जनता का भरोसा कमजोर होता है, ऐसे में पार्टी पूरी मजबूती से केजरीवाल के साथ खड़ी है।
पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष Aman Arora ने इस मामले पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जब न्यायिक प्रक्रिया पर राजनीतिक प्रभाव का संदेह होता है, तो निष्पक्षता और सच्चाई दोनों प्रभावित होती हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ मामलों में राजनीतिक छाया नजर आती है, जिससे निष्पक्षता पर सवाल उठना स्वाभाविक है। वहीं वित्त मंत्री Harpal Singh Cheema ने इसे एक ऐतिहासिक कदम बताते हुए कहा कि आजादी के बाद शायद पहली बार किसी नेता ने सिस्टम से जुड़ी चिंताओं को उजागर करने के लिए इस तरह का रास्ता चुना है। उन्होंने इसे एक सैद्धांतिक और साहसिक निर्णय करार दिया।
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इसी क्रम में शिक्षा मंत्री Harjot Singh Bains ने कहा कि न्याय केवल होना ही नहीं चाहिए, बल्कि वह होता हुआ दिखाई भी देना चाहिए। उन्होंने केजरीवाल के इस रुख को अंतरात्मा की आवाज बताया और कहा कि जब सिस्टम की निष्पक्षता पर सवाल उठते हैं तो इस तरह का कदम उठाना जरूरी हो जाता है।
बिजली मंत्री Sanjeev Arora ने भी कहा कि न्याय प्रणाली की विश्वसनीयता उसकी पारदर्शिता पर निर्भर करती है और जब जनता के मन में संदेह पैदा हो, तो ऐसे सैद्धांतिक स्टैंड जरूरी हो जाते हैं।
इसके अलावा कैबिनेट मंत्री डॉ. बलबीर सिंह, लाल चंद कटारूचक, हरदीप सिंह मुंडियां और हरभजन सिंह ईटीओ सहित कई अन्य नेताओं ने भी एकजुटता दिखाते हुए केजरीवाल के समर्थन में अपनी आवाज बुलंद की। पार्टी नेताओं का कहना है कि यह फैसला न्यायपालिका के खिलाफ नहीं है, बल्कि उसकी गरिमा और उच्च मानकों को बनाए रखने की अपील है। उन्होंने इसे गांधीवादी सत्याग्रह की भावना से प्रेरित एक शांतिपूर्ण लेकिन प्रभावशाली विरोध बताया।
पंजाब AAP नेतृत्व ने स्पष्ट किया कि पार्टी हमेशा पारदर्शिता, निष्पक्षता और कानून के शासन के पक्ष में खड़ी रही है और आगे भी रहेगी। उन्होंने कहा कि यह मामला केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि देश की न्याय प्रणाली में जनता के विश्वास से जुड़ा हुआ है। ऐसे में केजरीवाल का यह कदम एक बड़े विमर्श की शुरुआत कर सकता है, जिसमें न्यायपालिका की पारदर्शिता और निष्पक्षता को लेकर व्यापक चर्चा संभव है।

