फैटी लिवर के मरीज अंडे का पीला हिस्सा खा सकते हैं या नहीं? जानिए एक्सपर्ट की सलाह और सही डाइट टिप्स।
आज के समय में फैटी लिवर एक आम लेकिन गंभीर स्वास्थ्य समस्या बन चुकी है, जिसे नजरअंदाज करना आगे चलकर खतरनाक साबित हो सकता है। इस बीमारी में डाइट का खास महत्व होता है और कई खाद्य पदार्थों को लेकर लोगों के मन में कन्फ्यूजन बना रहता है। इन्हीं में से एक सवाल है—क्या फैटी लिवर के मरीजों को अंडे का पीला हिस्सा (एग योल्क) खाना चाहिए या नहीं?
पोषण विशेषज्ञों के अनुसार, अंडा एक संतुलित आहार का महत्वपूर्ण हिस्सा है। एक सामान्य अंडे में 6-7 ग्राम प्रोटीन, लगभग 5 ग्राम हेल्दी फैट और 65-70 कैलोरी होती है। इसके अलावा इसमें विटामिन A, D, B12, आयरन, फास्फोरस, सेलेनियम और जिंक जैसे जरूरी पोषक तत्व भी मौजूद होते हैं। यह शरीर की मांसपेशियों को मजबूत बनाने, इम्यूनिटी बढ़ाने और दिमाग के विकास में मदद करता है।
हालांकि, जब बात फैटी लिवर की आती है तो थोड़ी सावधानी जरूरी हो जाती है। दिल्ली के Shri Balaji Action Medical Institute के गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विशेषज्ञ डॉ. जी. एस. लांबा के अनुसार, फैटी लिवर के मरीज अंडा खा सकते हैं, लेकिन उसके पीले हिस्से को लेकर संतुलन रखना जरूरी है।
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अंडे का सफेद हिस्सा (एग व्हाइट) हाई प्रोटीन और लो फैट होता है, इसलिए यह लिवर के लिए सुरक्षित और फायदेमंद माना जाता है। वहीं, अंडे के पीले हिस्से में फैट और कोलेस्ट्रॉल की मात्रा ज्यादा होती है। ऐसे में अगर किसी व्यक्ति को फैटी लिवर के साथ हाई कोलेस्ट्रॉल या मोटापे की समस्या भी है, तो उसे एग योल्क सीमित मात्रा में या डॉक्टर की सलाह से ही लेना चाहिए।
विशेषज्ञ यह भी बताते हैं कि हर किसी के लिए अंडे का पीला हिस्सा पूरी तरह बंद करना जरूरी नहीं है, क्योंकि इसमें कई महत्वपूर्ण विटामिन्स जैसे A, D, E और B12 पाए जाते हैं, जो शरीर के लिए लाभकारी होते हैं। इसलिए संतुलित मात्रा में इसका सेवन किया जा सकता है।
आमतौर पर हफ्ते में 2-3 बार पूरा अंडा खाना अधिकांश लोगों के लिए सुरक्षित माना जाता है, लेकिन हर व्यक्ति की शारीरिक स्थिति अलग होती है, इसलिए अपनी डाइट तय करते समय डॉक्टर या न्यूट्रिशनिस्ट की सलाह लेना बेहतर रहता है।
कुल मिलाकर, फैटी लिवर में अंडा पूरी तरह से प्रतिबंधित नहीं है, बल्कि इसे सही मात्रा और संतुलन के साथ खाने की जरूरत होती है। सही खानपान, नियमित व्यायाम और हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाकर इस बीमारी को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।

