रोहतक में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने विपक्ष पर महिला आरक्षण बिल रोकने का आरोप लगाते हुए ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ को ऐतिहासिक बताया।
हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ को लेकर विपक्षी दलों पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि संसद में हालिया घटनाक्रम के दौरान विपक्ष ने महिलाओं के अधिकारों के रास्ते में बाधाएं खड़ी कीं। रोहतक में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों ने वर्षों तक महिला आरक्षण के नाम पर केवल राजनीति की, लेकिन जब इसे लागू करने का अवसर आया तो उन्होंने इसका विरोध कर अपनी मानसिकता उजागर कर दी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि 16 और 17 अप्रैल को संसद में जो घटनाएं हुईं, वे लोकतंत्र के मूल सिद्धांतों के खिलाफ थीं और इससे देश की आधी आबादी के अधिकारों को ठेस पहुंची है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, टीएमसी और डीएमके जैसे दलों ने ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ के रास्ते में रोड़े अटकाकर महिलाओं के राजनीतिक सशक्तिकरण को रोकने का प्रयास किया। उनके अनुसार यह केवल एक विधेयक का विरोध नहीं था, बल्कि करोड़ों महिलाओं के सपनों और उनके संवैधानिक अधिकारों के खिलाफ कदम था।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि केंद्र सरकार महिलाओं को राजनीतिक भागीदारी में बराबरी दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि सरकार ने संविधान संशोधन, परिसीमन और केंद्र शासित प्रदेश कानून से जुड़े महत्वपूर्ण विधेयक पेश किए थे, जिनका उद्देश्य महिला आरक्षण को जल्द लागू करना था, ताकि 2029 के आम चुनावों में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण का लाभ मिल सके।
मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वह जानबूझकर भ्रम फैलाकर इस मुद्दे को भटकाने का प्रयास कर रहा है। उन्होंने कहा कि परिसीमन को लेकर फैलाए जा रहे डर पूरी तरह निराधार हैं और सरकार का मॉडल सभी राज्यों के लिए समान रूप से सीटों में वृद्धि सुनिश्चित करता है। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि प्रस्तावित व्यवस्था में किसी भी राज्य का प्रतिनिधित्व कम नहीं होगा, बल्कि सभी को समान लाभ मिलेगा।
उन्होंने कांग्रेस की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि पार्टी ने दशकों तक महिला आरक्षण को केवल फाइलों और समितियों तक सीमित रखा, जबकि वर्तमान सरकार ने इसे जमीन पर उतारने का प्रयास किया है। उन्होंने यह भी कहा कि महिलाओं को अधिकार देना कोई दया नहीं, बल्कि उनका संवैधानिक हक है, जिसे अब और टाला नहीं जा सकता।
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मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर परिवारवाद और सत्ता की राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा कि महिलाओं के सशक्त होने से उन दलों की राजनीति पर असर पड़ेगा, जो वर्षों से सीमित नेतृत्व के सहारे चल रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि आज देश की महिलाएं हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं—चाहे पंचायत हो, उद्योग हो या प्रशासन—ऐसे में संसद में उनकी भागीदारी बढ़ाना समय की मांग है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सांसद कमलजीत सहरावत और अन्य नेताओं ने भी केंद्र सरकार के प्रयासों का समर्थन करते हुए कहा कि ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। उन्होंने कहा कि सरकार ने इस कानून को और प्रभावी बनाने के लिए आवश्यक संशोधन प्रस्तुत किए, ताकि इसे शीघ्र लागू किया जा सके।
मुख्यमंत्री ने अंत में विपक्ष को चेतावनी देते हुए कहा कि देश की महिलाएं अब जागरूक हैं और वे अपने अधिकारों के साथ किसी भी प्रकार का समझौता नहीं करेंगी। आने वाले समय में महिलाएं अपने वोट की ताकत से ऐसे दलों को जवाब देंगी, जो उनके अधिकारों के खिलाफ खड़े होते हैं। उन्होंने दोहराया कि सरकार महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और भविष्य में भी इस दिशा में हर संभव कदम उठाए जाएंगे।

