हरियाणा में मानसून से पहले जलभराव रोकने को लेकर मंत्री विपुल गोयल ने गुरुग्राम, फरीदाबाद व मानेसर में तैयारियों की समीक्षा कर सख्त निर्देश दिए।
हरियाणा में आगामी मानसून सीजन को लेकर सरकार ने इस बार पहले से ही व्यापक तैयारियां शुरू कर दी हैं। शहरी स्थानीय निकाय मंत्री विपुल गोयल ने गुरुग्राम में आयोजित एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि इस बार मानसून के दौरान किसी भी शहर में जलभराव की स्थिति नहीं होनी चाहिए और आम जनता को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।
गुरुग्राम स्थित लोक निर्माण विभाग विश्राम गृह में हुई इस बैठक में गुरुग्राम, फरीदाबाद और मानेसर के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों ने भाग लिया। बैठक में तीनों शहरों में मानसून से पहले की तैयारियों की विस्तार से समीक्षा की गई, जिसमें ड्रेनेज सिस्टम, सीवरेज नेटवर्क, रेन वाटर हार्वेस्टिंग और जलभराव संभावित क्षेत्रों पर विशेष फोकस किया गया।
मंत्री विपुल गोयल ने कहा कि सभी नगर निगम यह सुनिश्चित करें कि सीवरेज और ड्रेनेज सिस्टम की सफाई और मरम्मत कार्य समय से पहले पूरे हो जाएं। उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि पर्याप्त संख्या में पंप, सक्शन मशीनें और अन्य संसाधन पहले से तैयार रखें, ताकि बारिश के दौरान किसी भी आपात स्थिति से तुरंत निपटा जा सके। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मानसून के दौरान किसी भी प्रकार की दुर्घटना या जनहानि को हर हाल में रोका जाना चाहिए।
गुरुग्राम में जलभराव की समस्या को देखते हुए प्रशासन ने 159 संभावित हॉटस्पॉट चिन्हित किए हैं। इनमें 4 अत्यधिक गंभीर, 39 गंभीर, 56 मध्यम और 60 मामूली श्रेणी के क्षेत्र शामिल हैं। नगर निगम द्वारा 607 किलोमीटर लंबी ड्रेनों में से लगभग 408 किलोमीटर की सफाई पूरी की जा चुकी है और शेष कार्य 31 मई तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके साथ ही मानसून के दौरान जल निकासी के लिए 109 पंप और 63 सक्शन टैंकर तैनात किए जा रहे हैं। रेन वाटर हार्वेस्टिंग संरचनाओं को भी दुरुस्त किया जा रहा है, जिससे जलभराव की समस्या कम होने के साथ भूजल स्तर में सुधार की उम्मीद है।
मानेसर में भी मानसून से पहले 54 किलोमीटर से अधिक लंबाई के 23 बड़े ड्रेनों की सफाई का कार्य तेजी से चल रहा है। साथ ही रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम को मजबूत करने और नए सिस्टम विकसित करने पर भी जोर दिया जा रहा है।
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फरीदाबाद में 157 ड्रेनों की सफाई का कार्य किया जा रहा है, जिसकी कुल लंबाई लगभग 196 किलोमीटर है। यहां 40 से अधिक संवेदनशील जलभराव बिंदुओं की पहचान कर विशेष निगरानी रखी जा रही है और 15 जून तक सभी कार्य पूरे करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
मंत्री ने सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करने के निर्देश दिए और कहा कि समयबद्ध तरीके से सभी तैयारियां पूरी करना बेहद जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि संवेदनशील क्षेत्रों पर विशेष निगरानी रखी जाए और जरूरत पड़ने पर तुरंत कार्रवाई की जाए।
इसके अलावा, बैठक में स्ट्रे कैटल फ्री अभियान को प्रभावी ढंग से लागू करने और शहरों को मलबा मुक्त बनाने के निर्देश भी दिए गए।
कुल मिलाकर, हरियाणा सरकार इस बार मानसून से पहले पूरी तरह अलर्ट मोड में नजर आ रही है और जलभराव जैसी समस्याओं से निपटने के लिए व्यापक और ठोस रणनीति पर काम कर रही है, ताकि नागरिकों को बारिश के मौसम में किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।

