ईरान में 1000 घंटे से ज्यादा इंटरनेट बंदी जारी, कनेक्टिविटी 1% तक सिमटी, दुनिया की सबसे बड़ी नेटवर्क शटडाउन में शामिल।
मध्य-पूर्व के देश Iran में इंटरनेट संकट अब एक गंभीर वैश्विक मुद्दा बन चुका है। देश में जारी नेटवर्क शटडाउन ने 1000 घंटे का आंकड़ा पार कर लिया है, जिससे यह आधुनिक डिजिटल इतिहास की सबसे लंबी इंटरनेट बंदियों में से एक बन गया है।
इंटरनेट मॉनिटरिंग संस्था NetBlocks के मुताबिक, मार्च की शुरुआत से ही ईरान में इंटरनेट कनेक्टिविटी लगभग पूरी तरह ठप हो चुकी है। हालात इतने खराब हैं कि देश में इंटरनेट एक्सेस घटकर केवल 1 प्रतिशत तक सीमित रह गया है। इसका मतलब है कि आम नागरिकों के लिए ऑनलाइन सेवाएं लगभग पूरी तरह बंद हो चुकी हैं।
नेटब्लॉक्स द्वारा जारी किए गए डेटा और ग्राफ्स से साफ पता चलता है कि फरवरी के अंत से शुरू हुई यह बंदी लगातार जारी है और इसमें अब तक कोई खास सुधार नहीं हुआ है। 28 फरवरी के आसपास शुरू हुआ यह शटडाउन अप्रैल के दूसरे सप्ताह तक जारी रहा, जिससे यह 40 दिनों से भी ज्यादा लंबा हो चुका है।
इस लंबे इंटरनेट ब्लैकआउट ने देश के भीतर संचार व्यवस्था को बुरी तरह प्रभावित किया है। लोग न तो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स का उपयोग कर पा रहे हैं और न ही बाहरी दुनिया से संपर्क स्थापित कर पा रहे हैं। कई क्षेत्रों में केवल सीमित घरेलू नेटवर्क ही काम कर रहे हैं, जो अंतरराष्ट्रीय इंटरनेट से कटे हुए हैं।
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विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति न केवल आम जनता के लिए परेशानी का कारण बनी है, बल्कि इससे व्यापार, शिक्षा और हेल्थ सेवाओं पर भी गंभीर असर पड़ा है। ऑनलाइन बैंकिंग, ई-कॉमर्स और डिजिटल कम्युनिकेशन जैसी सेवाएं लगभग ठप हो चुकी हैं, जिससे आर्थिक गतिविधियों पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ा है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, इस इंटरनेट बंदी की शुरुआत क्षेत्रीय तनाव और संघर्ष के बाद हुई थी। अंतरराष्ट्रीय मीडिया में आई खबरों के मुताबिक, United States और Israel के साथ बढ़ते तनाव और हमलों के बाद ईरान में सुरक्षा कारणों से इंटरनेट पर सख्त प्रतिबंध लगाए गए। हालांकि, इस बारे में आधिकारिक स्तर पर विस्तृत जानकारी सीमित ही सामने आई है।
इस तरह की लंबी इंटरनेट बंदी को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ती जा रही है। डिजिटल अधिकार संगठनों का कहना है कि इस प्रकार के शटडाउन से लोगों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सूचना तक पहुंच पर सीधा असर पड़ता है।
ईरान में जारी यह इंटरनेट ब्लैकआउट अब एक बड़ा उदाहरण बन चुका है कि कैसे डिजिटल युग में नेटवर्क बंदी पूरे देश को ठहराव की स्थिति में ला सकती है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि सरकार इस संकट को कैसे संभालती है और कब तक देश में सामान्य इंटरनेट सेवाएं बहाल हो पाती हैं।

