मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने समाधान शिविरों की समीक्षा कर अधिकारियों को लंबित शिकायतों के त्वरित निपटारे और व्यक्तिगत उपस्थिति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
हरियाणा सरकार द्वारा नागरिकों की शिकायतों के त्वरित समाधान के लिए चलाए जा रहे समाधान शिविरों की प्रगति की मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने औचक समीक्षा की। वीरवार को आयोजित इस उच्चस्तरीय बैठक में मुख्यमंत्री ने ऑनलाइन माध्यम से सभी जिलों के अधिकारियों और नागरिकों से सीधा संवाद स्थापित किया और शिकायतों के निस्तारण की स्थिति का विस्तृत आकलन किया।
मुख्यमंत्री ने बैठक के दौरान विभिन्न जिलों के नागरिकों की समस्याएं सीधे सुनीं और संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि लंबित मामलों का प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र समाधान सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि सरकार की प्राथमिकता है कि हर नागरिक को समयबद्ध, पारदर्शी और प्रभावी सेवा मिले, और इस दिशा में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
प्रदेश के सभी जिलों में प्रत्येक सोमवार और गुरुवार को उपायुक्त और उपमंडल अधिकारी कार्यालयों में समाधान शिविर आयोजित किए जाते हैं। इन शिविरों में नागरिक अपनी शिकायतें दर्ज कराते हैं, जिनमें से कई मामलों का समाधान मौके पर ही कर दिया जाता है, जबकि शेष शिकायतों का निपटारा 7 से 15 दिनों के भीतर किया जाता है। 10 जून 2024 से शुरू हुए इस अभियान के तहत अब तक लगभग डेढ़ लाख शिकायतें प्राप्त हो चुकी हैं, जिनमें से करीब 78 प्रतिशत का सफलतापूर्वक समाधान किया जा चुका है।
मुख्यमंत्री ने वर्ष 2024, 2025 और 2026 के लंबित मामलों की भी समीक्षा करते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी लंबित शिकायतों का जल्द से जल्द निस्तारण किया जाए। उन्होंने कहा कि समाधान शिविरों की साप्ताहिक समीक्षा प्रत्येक शुक्रवार को की जानी चाहिए और इसकी अध्यक्षता स्वयं उपायुक्त द्वारा की जाए।
also read : हरियाणा में 1028 करोड़ की परियोजनाओं को मंजूरी, हाई पावर्ड परचेज कमेटी के फैसलों से विकास को रफ्तार
बैठक के दौरान कुछ जिलों में अधिकारियों की अनुपस्थिति पर मुख्यमंत्री ने कड़ा रुख अपनाया। विशेष रूप से महेंद्रगढ़ और बादशाहपुर में संबंधित अधिकारियों की गैरहाजिरी पर उन्होंने नाराजगी जताई और सभी उपायुक्तों एवं एसडीएम को निर्देश दिए कि वे समाधान शिविरों में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहकर नागरिकों की समस्याएं सुनें।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया कि वे केवल औपचारिकता पूरी करने के बजाय शिकायतों के समाधान की व्यक्तिगत निगरानी करें और सुनिश्चित करें कि नागरिकों को समय पर राहत मिले। उन्होंने कहा कि यह पहल सुशासन और जनसेवा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिसे पूरी गंभीरता से लागू किया जाना चाहिए।
बैठक में मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव अरुण गुप्ता, महिला एवं बाल विकास विभाग की निदेशक प्रियंका सोनी, ओएसडी बी.बी. भारती और विवेक कालिया सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
कुल मिलाकर, समाधान शिविरों की यह सख्त समीक्षा हरियाणा सरकार की जवाबदेह और पारदर्शी प्रशासनिक व्यवस्था की प्रतिबद्धता को दर्शाती है, जिससे नागरिकों की समस्याओं का तेजी से समाधान सुनिश्चित किया जा सके।

