भाजपा के 47वें स्थापना दिवस पर प्रदेश कार्यालय में भव्य कार्यक्रम, नेताओं और कार्यकर्ताओं ने संगठन के सिद्धांतों और समर्पण को किया याद।
देश की प्रमुख राजनीतिक पार्टी भारतीय जनता पार्टी के 47वें स्थापना दिवस के अवसर पर प्रदेश कार्यालय में एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इस अवसर पर संगठन की गौरवशाली यात्रा, सिद्धांतों और राष्ट्रसेवा के प्रति प्रतिबद्धता को याद किया गया।
कार्यक्रम में अरुण सिंह, वीरेन्द्र सचदेवा, विष्णु मित्तल, कमलजीत सहरावत और बृजेश राय सहित कई वरिष्ठ पदाधिकारी मौजूद रहे। सभी नेताओं ने संगठन की विचारधारा और कार्यसंस्कृति पर प्रकाश डालते हुए कार्यकर्ताओं के योगदान को सराहा।
कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने कहा कि भाजपा की यात्रा केवल एक राजनीतिक सफर नहीं, बल्कि राष्ट्र सेवा और सिद्धांतों के प्रति अटूट निष्ठा का प्रतीक है। पार्टी की कार्यसंस्कृति में ‘राष्ट्र प्रथम, फिर संगठन और अंत में स्वयं’ का मूलमंत्र ही उसकी सबसे बड़ी ताकत है, जिसने उसे जनता के बीच विश्वास का केंद्र बनाया है।
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नेताओं ने यह भी कहा कि भाजपा ने हमेशा अपनी मूल विचारधारा और सिद्धांतों से समझौता नहीं किया, और यही कारण है कि आज यह दुनिया के सबसे बड़े राजनीतिक संगठन के रूप में स्थापित हो चुकी है। ‘चरैवेति-चरैवेति’ के मंत्र को अपनाते हुए लाखों कार्यकर्ताओं ने निरंतर मेहनत कर संगठन को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है।
इस अवसर पर कार्यकर्ताओं के समर्पण और त्याग को विशेष रूप से याद किया गया। नेताओं ने कहा कि पार्टी की सफलता का आधार उसके जमीनी स्तर पर काम करने वाले कार्यकर्ता हैं, जिनकी मेहनत और निष्ठा से संगठन लगातार मजबूत होता जा रहा है।
कार्यक्रम में मौजूद कार्यकर्ताओं ने भी उत्साह के साथ स्थापना दिवस मनाया और पार्टी के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। इस मौके पर सभी को स्थापना दिवस की शुभकामनाएं दी गईं और भविष्य में भी राष्ट्रहित और जनसेवा के कार्यों को प्राथमिकता देने का संकल्प लिया गया।
भाजपा के 47वें स्थापना दिवस का यह आयोजन न केवल पार्टी के इतिहास को याद करने का अवसर था, बल्कि आने वाले समय में संगठन को और मजबूत बनाने की दिशा में एक प्रेरणादायक कदम भी साबित हुआ।

