पटियाला रैली में भगवंत मान ने सुखबीर बादल पर निशाना साधते हुए ‘मलंग’ बयान को लेकर तीखा पलटवार किया।
पंजाब की राजनीति में एक बार फिर बयानबाजी का दौर तेज हो गया है। पटियाला में आयोजित एक विशाल जनसभा के दौरान मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने शिरोमणि अकाली दल के प्रमुख सुखबीर सिंह बादल पर सीधा हमला बोला। उन्होंने खास तौर पर आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं को ‘मलंग’ कहे जाने पर कड़ी नाराजगी जताई और इसे अपमानजनक बताया।
जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हो सकते हैं, लेकिन कार्यकर्ताओं के सम्मान से किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि यदि किसी को उनसे राजनीतिक विरोध करना है तो वह सीधे करें, लेकिन जमीनी स्तर पर काम करने वाले वॉलंटियर्स और कार्यकर्ताओं के खिलाफ अपमानजनक भाषा का प्रयोग अस्वीकार्य है।
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने भावुक होते हुए कहा कि आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ता वही लोग हैं, जिन्होंने बदलाव की उम्मीद में दिन-रात मेहनत की है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर पंजाब की जनता को ‘मलंग’ बनाने के लिए जिम्मेदार कौन है। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली सरकारों के दौरान हुए कुशासन और भ्रष्टाचार ने आम लोगों को आर्थिक रूप से कमजोर किया, और अब उन्हीं लोगों का मजाक उड़ाया जा रहा है।
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उन्होंने आगे कहा कि समय बदल चुका है और अब सत्ता आम जनता के हाथों में है। जिन लोगों को पहले नजरअंदाज किया जाता था, वही आज निर्णय लेने की स्थिति में हैं। मुख्यमंत्री ने तंज कसते हुए कहा कि यही कारण है कि विपक्षी नेताओं में बेचैनी दिखाई दे रही है।
मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी सरकार सम्मान और विकास की राजनीति में विश्वास रखती है। उन्होंने कहा कि जो नेता जनता और कार्यकर्ताओं का सम्मान नहीं कर सकते, उन्हें राजनीति में बने रहने का कोई अधिकार नहीं है। उन्होंने चेतावनी दी कि पंजाब की जनता आने वाले समय में इस तरह की बयानबाजी का करारा जवाब देगी।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बयान के बाद राज्य में राजनीतिक माहौल और गर्म हो सकता है। सुखबीर सिंह बादल की ओर से अभी तक इस पर कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और तीखी बयानबाजी देखने को मिल सकती है।
कुल मिलाकर, पटियाला की यह रैली पंजाब की राजनीति में एक नया मोड़ लेकर आई है, जहां आरोप-प्रत्यारोप के बीच कार्यकर्ताओं के सम्मान का मुद्दा केंद्र में आ गया है।

