मिडल ईस्ट तनाव के बीच भारत के टेक सेक्टर पर कोई तात्कालिक असर नहीं, सरकार इंडस्ट्री के साथ लगातार संपर्क में—अश्विनी वैष्णव।
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत के टेक सेक्टर को लेकर राहत भरी खबर सामने आई है। केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने स्पष्ट किया है कि मौजूदा हालात का भारतीय टेक उद्योग पर अभी तक कोई तात्कालिक नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ा है।
इंडस्ट्री से लगातार संवाद
मंत्री ने बताया कि सरकार विभिन्न हाई-टेक इंडस्ट्री एसोसिएशनों के साथ लगातार संपर्क में है और स्थिति की बारीकी से निगरानी कर रही है।
उन्होंने कहा, “हमने सभी इंडस्ट्री बॉडीज से फीडबैक लिया है और फिलहाल किसी ने भी अपने ऑपरेशन्स पर असर की जानकारी नहीं दी है।”
सप्लाई चेन पर बनी हुई नजर
हालांकि वैश्विक स्तर पर सप्लाई चेन को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं, लेकिन भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी सेक्टर अभी तक इस संकट से सुरक्षित नजर आ रहा है।
सेमीकंडक्टर, मोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स और हार्डवेयर जैसे क्षेत्रों में भी सामान्य संचालन जारी है।
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हीलियम गैस की कमी बनी चिंता
टेक इंडस्ट्री के लिए सबसे बड़ी चिंता हीलियम गैस की संभावित कमी को लेकर है।
- हीलियम का उपयोग सेमीकंडक्टर निर्माण में
- MRI जैसी हाई-टेक मशीनों में कूलेंट के रूप में होता है
पश्चिम एशिया इस गैस का प्रमुख स्रोत है, ऐसे में वहां का तनाव वैश्विक कीमतों और सप्लाई को प्रभावित कर सकता है।
फिलहाल भारत में नहीं दिखा असर
अश्विनी वैष्णव ने कहा कि:
- भारतीय चिप निर्माता और सप्लायर्स ने अभी तक किसी कमी की पुष्टि नहीं की है
- स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है
- इंडस्ट्री के साथ संवाद जारी रहेगा
संकट के लंबा न चलने की उम्मीद
इंडस्ट्री से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि यह संकट लंबे समय तक नहीं चलेगा, जिससे भारत के टेक सेक्टर पर असर सीमित रह सकता है।
निष्कर्ष
मिडल ईस्ट में जारी तनाव के बावजूद भारत का टेक सेक्टर फिलहाल स्थिर बना हुआ है। सरकार और इंडस्ट्री के बीच तालमेल इस चुनौतीपूर्ण समय में एक मजबूत सुरक्षा कवच के रूप में काम कर रहा है।

