हरियाणा सरकार ने टीबी उन्मूलन अभियान को तेज करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित तीन टूल लागू किए, जिससे स्क्रीनिंग, निगरानी और हाई-रिस्क क्षेत्रों की पहचान आसान हुई।
हरियाणा सरकार ने टीबी उन्मूलन अभियान को तेज करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीक का सहारा लिया है। राज्य के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा ने बताया कि प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत हरियाणा में एआई आधारित तीन महत्वपूर्ण टूल लागू किए गए हैं।
इन तकनीकी टूल्स की मदद से टीबी की पहचान, मरीजों की निगरानी और जोखिम वाले क्षेत्रों की पहचान को अधिक प्रभावी बनाया जा रहा है।
तीन-स्तरीय एआई रणनीति लागू
डॉ. सुमिता मिश्रा ने बताया कि हरियाणा में टीबी उन्मूलन के लिए तीन-स्तरीय एआई रणनीति लागू की गई है। इसके तहत स्क्रीनिंग, मरीजों की निगरानी और भौगोलिक प्राथमिकता निर्धारण को मजबूत किया जा रहा है।
राज्य में जिन तीन एआई टूल्स का उपयोग किया जा रहा है, उनमें शामिल हैं:
-
Cough Against TB (CATB)
-
Vulnerability Mapping for Tuberculosis (VM-TB)
-
Prediction of Adverse TB Outcomes (PATO)
इन टूल्स को राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम के तहत केंद्रीय टीबी प्रभाग के सहयोग से विकसित किया गया है।
also read : पंचकूला में 38वें वसंत उत्सव का भव्य आगाज़, तीन दिन तक चलेंगे सांस्कृतिक कार्यक्रम और प्रतियोगिताएं
खांसी की आवाज से होगी टीबी की पहचान
CATB मोबाइल एप्लीकेशन खांसी की आवाज और लक्षणों का विश्लेषण करके संभावित टीबी मामलों की पहचान करता है। यह एप इंटरनेट के बिना भी काम कर सकता है और स्वास्थ्य केंद्रों के साथ-साथ सामुदायिक स्तर पर भी उपयोगी है।
अब तक:
-
711 व्यक्तियों को इस कार्यक्रम में शामिल किया गया
-
2,654 फ्रंटलाइन स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित किया गया
-
609 हेल्थ एंड वेलनेस सेंटरों में 140 संभावित टीबी मरीजों की पहचान की गई
हाई-रिस्क मरीजों की पहचान में मदद
PATO टूल राष्ट्रीय निक्षय पोर्टल से मरीजों के डेटा का विश्लेषण करता है। इससे इलाज शुरू होते ही उन मरीजों की पहचान की जाती है जिनमें इलाज बीच में छोड़ने या मृत्यु का जोखिम अधिक होता है।
अप्रैल 2023 से अब तक इस टूल के माध्यम से हरियाणा में 18,591 हाई-रिस्क मरीजों की पहचान की जा चुकी है।
जोखिम वाले गांवों की पहचान
VM-TB टूल एक उन्नत एआई आधारित जियोस्पेशियल एनालिटिक्स सिस्टम है जो 20 से अधिक स्वास्थ्य और भौगोलिक संकेतकों का विश्लेषण करके जोखिम वाले क्षेत्रों की पहचान करता है।
इस टूल की मदद से हरियाणा में 2,111 हाई-रिस्क गांवों की पहचान की गई है। इससे स्वास्थ्य विभाग को लक्षित स्क्रीनिंग और जागरूकता अभियान चलाने में मदद मिल रही है।
‘टीबी मुक्त हरियाणा’ की दिशा में कदम
डॉ. सुमिता मिश्रा ने कहा कि आधुनिक तकनीक और डेटा एनालिटिक्स को स्वास्थ्य सेवाओं में शामिल करने से निर्णय प्रक्रिया तेज और प्रभावी हुई है।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य है कि टीबी की समय पर पहचान, बेहतर इलाज और निगरानी सुनिश्चित कर हरियाणा को टीबी मुक्त बनाया जाए। AI आधारित तकनीक इस लक्ष्य को हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

