चंडीगढ़ में 7 से 11 मार्च 2026 तक पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के तत्वावधान में ‘इंडिया इंटरनेशनल डिस्प्यूट्स वीक 2026’ आयोजित होगा, जिसमें देश-विदेश के न्यायिक और कानूनी विशेषज्ञ भाग लेंगे।
भारत में अंतरराष्ट्रीय विवाद समाधान प्रणाली को मजबूत बनाने के उद्देश्य से 7 से 11 मार्च 2026 तक चंडीगढ़ में “इंडिया इंटरनेशनल डिस्प्यूट्स वीक 2026” का आयोजन किया जाएगा। इस कार्यक्रम का आयोजन पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के तत्वावधान में किया जा रहा है, जिसमें देश और विदेश के न्यायिक एवं कानूनी क्षेत्र के प्रतिष्ठित विशेषज्ञ भाग लेंगे।
सरकारी प्रवक्ता के अनुसार इस सम्मेलन में भारत के मुख्य न्यायाधीश सहित सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश, विभिन्न उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीश और न्यायाधीश भी शामिल होंगे। कार्यक्रम का उद्देश्य भारत में अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता और विवाद समाधान तंत्र को मजबूत करना तथा इस क्षेत्र में वैश्विक सहयोग को बढ़ावा देना है।
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7 मार्च को होगा उद्घाटन समारोह
कार्यक्रम का उद्घाटन 7 मार्च 2026 को शाम 5 बजे चंडीगढ़ के हयात रीजेंसी होटल में आयोजित किया जाएगा। इस समारोह में न्यायपालिका और कानूनी क्षेत्र से जुड़े कई वरिष्ठ अधिकारी और विशेषज्ञ उपस्थित रहेंगे।
वॉकाथॉन और वृक्षारोपण कार्यक्रम
8 मार्च को सुबह 7 बजे सुखना लेक से ओपन हैंड मॉन्यूमेंट तक वॉकाथॉन आयोजित की जाएगी, जिसे भारत के मुख्य न्यायाधीश हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे। इसके बाद हाई कोर्ट परिसर में वृक्षारोपण कार्यक्रम भी आयोजित किया जाएगा।
उसी दिन सेक्टर-35 स्थित जेडब्ल्यू मैरियट होटल में सुबह 10 बजे विभिन्न कानूनी विषयों पर पैनल चर्चाएं आयोजित की जाएंगी।
कई स्थानों पर होंगी पैनल चर्चाएं
9 मार्च को भी विभिन्न विषयों पर पैनल चर्चाएं आयोजित होंगी। इनमें एक सत्र पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट परिसर में शाम 4:15 बजे और दूसरा सत्र ओपन हैंड मॉन्यूमेंट के पास शाम 6 बजे आयोजित किया जाएगा।
इसके अलावा 10 मार्च को सुबह 9:30 बजे सेक्टर-31 स्थित सीआईआई भवन में भी एक विशेष पैनल चर्चा आयोजित होगी।
11 मार्च को समापन समारोह
कार्यक्रम का समापन 11 मार्च 2026 को सेक्टर-43 स्थित चंडीगढ़ ज्यूडिशियल एकेडमी में आयोजित समापन समारोह के साथ होगा। समापन से पहले भी विशेषज्ञों द्वारा पैनल चर्चाएं आयोजित की जाएंगी।
इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के माध्यम से भारत में कानूनी सहयोग, मध्यस्थता प्रणाली और वैश्विक न्यायिक संवाद को नई दिशा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

