हरियाणा राइट टू सर्विस कमीशन ने फरीदाबाद के सेक्टर-76/77 मामले में विकास कार्य पूरे किए बिना प्लॉट की ई-नीलामी करने पर HSVP को गंभीर चूक बताया और आवंटी को 5,000 रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया।
हरियाणा राइट टू सर्विस कमीशन ने फरीदाबाद के एक मामले में कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा है कि विकास कार्य पूरे किए बिना प्लॉट की ई-नीलामी करना गंभीर प्रशासनिक चूक है। आयोग ने स्पष्ट किया कि किसी भी क्षेत्र में प्लॉट को ई-नीलामी के लिए प्रस्तुत करने से पहले वहां बुनियादी विकास कार्य पूरे होने चाहिए ताकि आवंटी समय पर निर्माण कार्य शुरू कर सकें। यह मामला फरीदाबाद के सेक्टर-76/77 में ई-नीलामी के माध्यम से खरीदे गए एक प्लॉट से जुड़ा है। शिकायतकर्ता केशव शर्मा ने आयोग के समक्ष शिकायत दर्ज कराते हुए कहा कि विकास कार्य अधूरे होने के बावजूद उन्हें प्लॉट का कब्जा लेने का प्रस्ताव भेज दिया गया।
आयोग के प्रवक्ता के अनुसार जांच में यह स्पष्ट हुआ कि हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (HSVP) ने विकास कार्य पूरे किए बिना ही प्लॉट की ई-नीलामी कर दी और बाद में कब्जा देने का प्रस्ताव भी जारी कर दिया, जो निर्धारित प्रक्रिया के अनुरूप नहीं था। आयोग ने अपने आदेश में यह भी कहा कि आवंटन पत्र की शर्तों के अनुसार यदि आवेदन मिलने के 30 दिनों के भीतर प्लॉट का कब्जा नहीं दिया जाता, तो एचएसवीपी को आवंटी को ब्याज देना होता है। हालांकि फरीदाबाद में कई मामलों में यह ब्याज नहीं दिया जा रहा था। आयोग के हस्तक्षेप के बाद ही ऐसे मामलों में ब्याज देना शुरू किया गया।
सुनवाई के दौरान आयोग ने यह भी कहा कि इस मामले में तत्कालीन एस्टेट ऑफिसर और एचएसवीपी की ई-नीलामी सेल की भूमिका की जांच आवश्यक है, क्योंकि विकास कार्यों की स्थिति स्पष्ट किए बिना ही प्लॉट को नीलामी के लिए स्वीकृति दी गई थी। आयोग ने यह भी उल्लेख किया कि 12 अगस्त 2022 को एचएसवीपी के तत्कालीन मुख्य प्रशासक ने संबंधित अधिकारियों को दो माह में विकास कार्य पूरा करने के निर्देश दिए थे, लेकिन इसके बावजूद समस्या लंबे समय तक बनी रही, जो गंभीर लापरवाही को दर्शाता है।
अपने आदेश में आयोग ने हरियाणा राइट टू सर्विस एक्ट, 2014 के तहत अधिकारों का उपयोग करते हुए शिकायतकर्ता केशव शर्मा को 5,000 रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है। यह राशि एचएसवीपी को 15 दिनों के भीतर अदा करनी होगी और इसकी अनुपालन रिपोर्ट 24 मार्च 2026 तक आयोग को सौंपनी होगी।
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आयोग ने कहा कि प्रारंभिक रूप से यह राशि एचएसवीपी अपने कोष से दे सकता है, लेकिन बाद में जिम्मेदार अधिकारियों से इसकी वसूली की जा सकती है। इसके साथ ही आयोग ने चेतावनी दी है कि यदि भविष्य में कब्जा देने में देरी, एक्सटेंशन शुल्क की वापसी या विलंबित कब्जे पर ब्याज भुगतान से जुड़े मामलों में लापरवाही पाई जाती है तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ हरियाणा राइट टू सर्विस एक्ट के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
आयोग ने एचएसवीपी को यह भी सलाह दी कि ई-नीलामी के माध्यम से प्लॉट खरीदने वाले आवंटियों के लिए ब्याज नीति की समीक्षा की जाए। वर्तमान में ऐसे आवंटियों को केवल 5.5 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज मिलता है, जबकि ड्रॉ ऑफ लॉट्स के माध्यम से प्लॉट पाने वाले आवंटियों को तीन वर्ष बाद 9 प्रतिशत ब्याज दिया जाता है।
आयोग ने कहा कि एचएसवीपी को विकास कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र पूरा करना चाहिए। पिछले कुछ वर्षों में ई-नीलामी के माध्यम से एचएसवीपी को हजारों करोड़ रुपये की आय प्राप्त हुई है, इसलिए विकास कार्यों में देरी से आवंटियों में असंतोष और अनावश्यक कानूनी विवाद पैदा होते हैं। आयोग ने उम्मीद जताई कि एचएसवीपी जल्द ही विकास कार्य पूरा कर आवंटियों को राहत देगा और भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा उत्पन्न नहीं होने देगा।
