Navratri Mundan: चैत्र नवरात्रि के त्योहार मे बाल काटना अशुभ माना जाता है, लेकिन फिर भी मुंडन का महत्व क्यों है?
Navratri Mundan: नौ दिनों में देवी आदिशक्ति की पूजा करने से अच्छे परिणाम मिलते हैं। पवित्रता और स्वच्छता मां दुर्गा की पूजा में बेहद महत्वपूर्ण हैं. माता का आशीर्वाद पाने के लिए नवरात्रि में नौ दिन तक दाढ़ी, बाल और नाखून नहीं काटने की सलाह दी जाती है। नवरात्रि पर बाल काटना वर्जित है, लेकिन छोटे बच्चों का मुंडन क्यों शुभ माना जाता है? नवरात्र में मुंडन करने के क्या लाभ हैं?
मुंडन क्यों किया जाता है?
मुंडन को चूड़ाकर्म भी कहा जाता है। शास्त्रों के अनुसार मुंडन संस्कार कराने से बच्चे का मानसिक विकास होता है क्योंकि गर्मियों में शिशु पर आने वाले बाल अपवित्र माने जाते हैं, और मुंडन संस्कार करने से शिशु के बाल पवित्र होते हैं।
नवरात्रि में मुंडन संस्कार महत्व
चैत्र नवरात्रि 30 मार्च 2025 को होगी। नवरात्रि पर्व एक नई शुरुआत है। बच्चे को मुंडन कराने से एक नए जीवन की शुरुआत होती है। ऐसे में नवरात्रि में छोटे बच्चों को मुंडन कराने से मां आदिशक्ति की कृपा उन पर बनी रहती है। वह भी सौभाग्यशाली है, ग्रहदोष उस पर प्रभाव नहीं डालते, ऐसा मानना है। सिद्धियां प्राप्त करने का मार्ग सुलभ होता है।
नवरात्रि पर मुंडन करने की परंपरा बहुत पुरानी है। मुंडन को बच्चे को किसी भी नकारात्मक ऊर्जा या प्रभाव से दूर करने का एक उपाय मानते हैं।
नवरात्रि में मुंडन करने का सही तरीका
मुंडन संस्कार में घर के आंगन में तुलसी के पास या किसी धार्मिक स्थान, जैसे माता के मंदिर में कर सकते हैं।
मां बच्चे को अपनी गोद में लेकर पश्चिम दिशा में हवन की अग्नि की तरफ मुंह रखती है।
अब बच्चे के बाल निकालकर गंगाजल से सिर धोकर हल्दी का लेप लगाया जाता है। फिर उसे नया कपड़ा पहनाया जाता है।
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