Hospital Stocks: जेफरीज ने अपने अध्ययन नोट में कहा कि हमें लगता है कि अडानी ग्रुप के स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में शामिल होने से कंपटीशन लैंडस्केप पर कोई बड़ा असर नहीं होगा। यही कारण है कि स्टॉक्स में आई कमजोरी को खरीदारी का मौका समझना चाहिए।
Hospital Stocks: शेयर मार्केट में गिरावट का दौर जारी है। यही कारण है कि निवेशकों को ऐसे स्टॉक्स की तलाश है जो उन्हें इस डाउन फॉल में लाभ दे सकें। अगर आप भी इसी तरह के शेयरों की खोज कर रहे हैं, तो ब्रोकरेज हाउस जेफरीज एक खुशखबरी लाया है।
वास्तव में, ब्रोकरेज हाउस जेफरीज ने हॉस्पिटल स्टॉक्स को लेकर एक रोचक रिपोर्ट प्रकाशित की है। उनका कहना है कि अगर इन स्टॉक्स में कोई कमी दिखाई देती है, तो खरीदारी का मौका समझना चाहिए।
इन स्टॉक्स को देखें
जेफरीज ने मैक्स हेल्थकेयर को इस क्षेत्र में अपना सर्वश्रेष्ठ पिक बताया है और इस स्टॉक को 1,380 रुपये के लक्ष्य मूल्य पर ‘बाय’ रेटिंग दी है। इसके अलावा, ग्लोबल हेल्थ स्टॉक्स, अपोलो हॉस्पिटल्स और फोर्टिस हेल्थकेयर पर भी भरोसा जताया गया है।
हॉस्पिटल स्टॉक्स क्यों गिर रहे हैं?
जेफरीज ने कहा कि हॉस्पिटल स्टॉक में हाल ही में हुई गिरावट की वजह नेगेटिव खबरें, प्राइस स्टैंडर्डाइजेशन और बेड अलॉकेशन थीं। निवेशकों को जल्द ही समझ आ गया कि यह चिंताएं बहुत बड़ी नहीं थीं, इसलिए यह गिरावट बहुत देर नहीं रही।
जेफरीज ने अध्ययन में कहा, “हमें लगता है कि अडानी ग्रुप के हेल्थकेयर सेक्टर में एंट्री से कंपटीशन लैंडस्केप पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ेगा।” क्योंकि इन कंपनियों का अर्निंग्स आउटलुक मजबूत है, इसलिए स्टॉक्स में आई कमजोरी को खरीदारी का मौका समझना चाहिए।”
अडानी ग्रुप की स्वास्थ्य सेवाओं में एंट्री
वास्तव में, अडानी ग्रुप 1,000 बेड वाले दो मल्टी-स्पेशियलिटी हॉस्पिटल्स और मेडिकल कॉलेज मुंबई और अहमदाबाद में शुरू करने की योजना बना रहा है। इस खबर के बाद मैक्स हेल्थकेयर के शेयर में कुछ गिरावट हुई, क्योंकि इसका बड़ा बिजनेस मुंबई में है। जेफरीज का मानना है कि मुंबई में नए बेड्स के लिए पर्याप्त जगह है, इसलिए अडानी ग्रुप की एंट्री से मैक्स हेल्थकेयर के EBITDA पर कोई महत्वपूर्ण प्रभाव नहीं होगा।
प्राइस स्टैंडर्डाइजेशन भी एक कारण बन गया
पिछले साल सुप्रीम कोर्ट में हेल्थकेयर सर्विसेज के प्राइस स्टैंडर्डाइजेशन को लेकर एक PIL दायर की गई थी, जिससे हॉस्पिटल स्टॉक्स में गिरावट आई। लेकिन निवेशकों को पता चला कि हेल्थकेयर सर्विसेज की कीमतों को स्टैंडर्डाइज करना लगभग असंभव था, इसलिए शेयर की कीमतें जल्द ही रिकवर हो गईं।
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