Kalava Bandhne ke Niyam: रक्षा सूत्र पहनने वालों, आइए जानें कितनी बार इसे लपेटना चाहिए, कौन सा रक्षा सूत्र पहनना उचित नहीं है, और इसे बांधने के नियम।
Kalava Bandhne ke Niyam: हिंदू धर्म में किसी भी मांगलिक कार्य से पहले कलाई पर कलावा (रक्षा सूत्र या मौली) बांधने की परंपरा है। यज्ञ के दौरान इसे बांधने की परंपरा सदियों से चली आ रही है और यह वैदिक संस्कृति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। पौराणिक कहानियों में भी इसका उल्लेख है कि भगवान वामन ने असुरों के दानवीर राजा बलि की अमरता के लिए उनकी कलाई पर कलावा बांधा था। सनातन धर्म में किसी भी मांगलिक कार्य में कलाई पर कलावा बांधा जाता है। रक्षा सूत्र या मौली भी इसका नाम है। रक्षा सूत्रों को बांधना वैदिक परंपरा है। यदि आप भी रक्षा सूत्र पहनने की सोच रहे हैं, तो पढ़ें कि इसे कितनी बार लपेटना चाहिए, कौन सा रक्षा सूत्र नहीं पहनना चाहिए और इसे बांधने के नियमों के बारे में जानें।
कलावा को कब बांधना चाहिए?
रक्षा सूत्र कलावा: हम किसी भी वार को रक्षा सूत्र बांध सकते हैं, लेकिन वार को बांधे जाने का शुभ मुहूर्त जरूर देखना चाहिए। हाथ बंधे हुए 21 दिन से अधिक हो जाए, या पुराना हो जाए, जब रक्षा सूत्र को उतारने के लिए मंगलवार और शनिवार का दिन सबसे अच्छा माना जाता है
कलावा बनाने के लाभ
- शास्त्रों और पौराणिक कथाओं में कलावा को रक्षा के रूप में देखा गया है। रक्षाबंधन पर अपनी बहनों से रक्षा सूत्र बंधवाते हैं तो हमें उनकी रक्षा करने के लिए अपने कर्तव्य का पालन करने का बोध होता है।
- धार्मिक दृष्टिकोण से, यह त्रिदेव ब्रह्मा विष्णु महेश का सूचक भी है. विधिवत रूप से इसे बांधने से सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बना रहता है और त्रिदेवों की कृपा बनी रहती है।
- कलावा बांधने से स्वास्थ्य लाभ भी मिलता है क्योंकि इससे ब्लड प्रेशर (बीपी), डायबिटीज, दिल की बीमारी और अन्य शारीरिक समस्याएं दूर होती हैं।
- कलावा को विधिवत रूप से बांधने से मंगल ग्रह और गुरु ग्रह भी मिलते हैं।
रक्षा सूत्रों को कितने दिन पहनना चाहिए?
रक्षासूत्र पहनने के बाद लोग अक्सर कई महीनों तक बांधें रहते हैं। लेकिन ये करना उचित नहीं है। शास्त्र कहता है कि कलावा को अधिक दिनों तक हाथ में नहीं रखना चाहिए क्योंकि रंग उतरने लगता है और एक समय बाद खत्म हो जाता है। 21 दिन बाद इसे उतारकर शुभ मुहूर्त में नया कलावा बांधना चाहिए।
ऐसा कलावा न बांधें
- शास्त्र कहते हैं कि जिस कलावा का रंग उतर गया है, उसे बांधना नहीं चाहिए।
- 21 दिनों के बाद किसी शुभ मुहुर्त में इसे फिर से बंधवाया जा सकता है।
- हाथ से उतारा हुआ रक्षा सूत्र को बहती नदी में डाल देना चाहिए।
- यदि ऐसा नहीं हो सकता, तो किसी पेड़ की जड़ में एक छोटा सा गड्ढा खोदना चाहिए।
कलावा बांधने का सही सिद्धांत
- पुरुषों और अविवाहित कन्याओं दोनों के दाएं हाथ में रक्षा सूत्र बांधना चाहिए।
- शादीशुदा महिलाओं ने बाएं हाथ में रक्षा कवच बंधवाए।
- कलावा बंधवाते समय उस हाथ की मुट्ठी को बाहर रखें; मुट्ठी में दक्षिणा होनी चाहिए और कलावा बांधने वाले व्यक्ति को दक्षिणा दी जानी चाहिए।
- कलावा बंधवाते समय हमेशा सिर पर दूसरा हाथ रखना चाहिए। कलावा को तीन बार ही लपेटना चाहिए; आप चाहें तो इसे पांच, सात या नौ बार भी लपेट सकते हैं।
- विशेष उत्सवों और यज्ञ-हवन के दौरान नया कलावा हमेशा बांधना चाहिए।
For more news: Religion

