Puja Path Niyam: पंचामृत और चरणामृत पूजा में प्रयोग किए जाते हैं। लेकिन बहुत से लोग दोनों में अंतर और इसके लाभ के बारे में नहीं जानते। वहीं कुछ लोग इसे बनाने की प्रक्रिया भी नहीं जानते
Puja Path Niyam: देवी-देवताओं की पूजा-वंदना करते समय, दीप पंचामृत या चरणामृत अर्पित कर प्रसाद के साथ उसे भी देना चाहिए. प्रसाद को प्राप्त करने में कुछ देरी हो सकती है, लेकिन पंचामृत या चरणामृत को प्राप्त करने में कोई समस्या नहीं होती। क्योंकि दोनों बहुत अलग और महत्वपूर्ण हैं। पंचामृत और चरणामृत के फायदे सफलता के लिए महत्वपूर्ण हैं।
देवी-देवताओं का मंदिर घर के बाहर कहीं भी हो या घर में पूजा का स्थान, धूप-दीप, भगवती आदि सब जगह होना चाहिए। इसलिए चरणामृत या पंचामृत भी बनाया जाता है। सबमें कुछ विशेषताएं हैं, लेकिन पंचामृत और चरणामृत को तैयार करने और सम्मान-श्रद्धापूर्व अर्पण के बाद उसे ग्रहण करने का कितना महत्व है? इसे बनाने का क्या तरीका है? यह जानकर आपको आश्चर्य होगा! चरणामृत का मतलब है! अमृत भगवान के चरणों का है, जबकि पंचामृत पांच अमृत, या पांच पवित्र चीजों से बना है। दोनों को ही पीने से व्यक्ति के मन में सकारात्मक भाव पैदा होते हैं, साथ ही उनकी सेहत भी बेहतर होती है। शास्त्रों में चरणामृत का उल्लेख है
अकाल मृत्युहरणं, सर्व व्याधि विनाशनम्। विष्णो पादोदकं पीत्वा पुनर्जन्म न विद्यते ।।
यानी-भगवान विष्णु के चरणों का अमृत जल सभी पापों को दूर करेगा। यह एक दवा है। जो चरणामृत का सेवन करता है उसका पुनर्जन्म नहीं होता है।
चरणामृत कैसे बनाया जाता है: तांबे के बर्तन में चरणामृत रूपी जल डालने से उसके औषधीय गुण मिलते हैं। चरणामृत में तिल, तुलसी और अन्य औषधीय तत्व शामिल हैं। तांबे के लोटे में तुलसी का जल हमेशा घर या मंदिर में रखा जाता है।
चरणामृत लेने के निम्नलिखित नियम हैं: चरणामृत ग्रहण करने के बाद बहुत से लोग सिर पर हाथ फेरते हैं, लेकिन शास्त्र कहता है कि ऐसा नहीं करना चाहिए। इससे बुरा प्रभाव बढ़ता है। हमेशा दाएं हाथ से चरणामृत लेना चाहिए और भक्तिपूर्वक शांत मन से ग्रहण करना चाहिए। चरणामृत इससे अधिक फायदेमंद होता है।
चरणामृत के फायदे: आयुर्वेद में चरणामृत को स्वास्थ्य के लिए अच्छा माना जाता है। आयुर्वेद कहता है कि तांबे ने कई बीमारियों को दूर करने की क्षमता है। यह भी पौरूष शक्ति को बढ़ाता है। तुलसी के रस से कई बीमारी दूर होती हैं। यह जल मन को शांत करता है। यह चरणामृत बुद्धि, स्मरण शक्ति और स्वास्थ्य लाभ के लिए भी प्रभावी है।
पंचामृत क्या है?
- “पंचामृत” शब्द का अर्थ है “पांच अमृत”। पंचामृत दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से बनाया जाता है। इससे भगवान को प्रसन्न किया जाता है। पांच प्रकार के मिश्रण से बना पंचामृत कई रोगों को दूर करता है और मन को शांति देता है। इसमें धार्मिक पक्ष भी है। उन्होंने बताया कि पंचामृत आत्मोन्नति के पांच प्रतीक हैं।
- दूध शुभ्रता का प्रतीक है, इसलिए हमें दूध की तरह शुद्ध होना चाहिए।
- दही-चढ़ाने का मतलब है कि हम सच्चे होकर सद्गुण अपनाते हैं और दूसरों को अपने जैसा बनाते हैं।
- घी स्नेह का प्रतीक है। सभी से हमारा प्रेमपूर्ण संबंध है।
- शहद शक्ति देता है। जीवन में निर्बल व्यक्ति कुछ भी नहीं कर सकता; सिर्फ मन और शरीर से शक्तिशाली व्यक्ति ही सफल हो सकता है।
- शक्कर-चढ़ाने का मतलब है जीवन में मिठास भरना। सभी को मीठा बोलना अच्छा लगता है, और इससे मधुर व्यवहार होता है। ऊपर बताए गए गुणों से हमारे जीवन में सफलता मिलती है।
पंचामृत का उपयोग: पंचामृत का सेवन करने से शरीर पुष्ट होता है और रोगों से बच जाता है।
पंचामृत को उसी मात्रा में पीना चाहिए, जिसमें वह बनाया जाता है। उससे अधिक नहीं।
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