Shab-E-Barat 2025: इस्लाम धर्म का पालन करने वालों के लिए शब-ए-बारात की रात बहुत विशिष्ट होती है। मगफिरत की रात भी इसका नाम है। आइए जानते हैं मुसलमान इस रात क्या करते हैं।
Shab-E-Barat 2025: मुस्लिम समाज में शब-ए-बरात एक बहुत महत्वपूर्ण पर्व है। विभिन्न देशों में इसे अलग-अलग नामों से भी जाना जाता है। जैसे शबे बारात, रबी में लैलातुल बारात, इंडोनेशिया और मलेशिया में निस्फ स्याबान आदि। Shaban महीने, जो इस्लामी कैलेंडर का आठवां महीना है, के चौथे और पांचवें दरमियानी रात को शब-ए-बरात मनाया जाता है।
शब-ए-बरात शाबान महीने की चौथी रात से शुरू होकर चौथी भोर को समाप्त होता है। 2025 में शब-ए-बारात 13 फरवरी 2025 को होगा। आइए जानते हैं कि इस पर्व का इस्लाम में क्या महत्व है और इस रात मुस्लिम समुदाय क्या करता है।
मगफिरत की रात
मगफिरत, यानी माफी की रात, शब-ए-बारात की रात को भी कहा जाता है। क्योंकि लोग इस दिन पूरी रात जागकर अल्लाह की इबादत करते हैं, नमाज और कुरान पढ़ते हैं और अपने गुनाहों की माफी मांगते हैं। इस्लामियों का कहना है कि शब-ए-बारात की रात की इबादत से अल्लाह अपने बंदों के सारे गुनाहों को माफ कर देता है और उनकी दुआओं को स्वीकार करता है। यही कारण है कि इसे मगफिरत की रात या बख्शीश की रात कहा जाता है।
इस्लाम में ऐसे पांच रातों का उल्लेख है जब अल्लाह अपने बंदों की हर दुआ सुनते हैं और उनके गुनाहों को माफ करते हैं। शुक्रवार की रात, ईद-उल-फितर से पहले की रात, ईद-उल-अधा से पहले की रात और रज्जब की पहली रात सब शब-ए-बारात हैं। इस्लाम में इन पांच रातों को माफी मांगने और नमाज-कुरान पढ़कर समय बिताने की रातें कहते हैं।
मुसलमान शब-ए-बारात की रात क्या करते हैं?
- मुसलमान शब-ए-बारात के दिन मगरिब की नमाज के बाद अपने पूर्वजों के कब्र में जाकर मगरिब की दुआ मांगते हैं। पुराने घर को साफ करते हैं, फूल चढ़ाते हैं और अगरबत्ती जलाते हैं।
- रात भर शब-ए-बारात पर लोग घरों या फिर मस्जिद में अल्लाह की इबादत करते हैं और अपने बुरे कामों की माफी मांगते हैं। इसके लिए नमाज और कुरान पढ़ते हैं।
- शब-ए-बारात पर कुछ लोग रोजा भी रखते हैं। इसमें दो दिन की रोजा होती है।
- शब-ए-बारात के पहले दिन और अगले दिन लेकिन यह फर्ज नहीं है, बल्कि नफिल रोजा है।
- शब-ए-बारात गुनाहों से माफी माँगने की रात है। इस दिन लोग अल्लाह की इबादत करने के साथ ही बुरा काम नहीं करने का वादा करते हैं। साथ ही, वे खैरात निकालते हैं और घरों में मीठे पकवान बनाते हैं।
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