यमकेश्वर के वनप्रस्थ आश्रम में श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का शुभारंभ, संतों के सान्निध्य में सनातन संस्कृति का प्रचार।
उत्तराखंड के पवित्र क्षेत्र Yamkeshwar स्थित वनप्रस्थ आश्रम में Shrimad Bhagwat Katha Gyan Yajna का भव्य शुभारंभ हुआ। इस आध्यात्मिक आयोजन में श्रद्धालुओं और संत-महात्माओं की उपस्थिति में विधिवत पूजा-अर्चना के साथ व्यास पीठ का पूजन किया गया और सनातन धर्म के मूल्यों का प्रसार किया गया।
इस अवसर पर श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि श्रीमद्भागवत पुराण सनातन धर्म का एक महत्वपूर्ण ग्रंथ है, जो भक्ति, श्रद्धा और सदाचार का मार्ग दिखाता है। यह ग्रंथ मानव जीवन को धर्म, आस्था और अच्छे आचरण की ओर प्रेरित करता है तथा व्यक्ति को ईश्वर से जोड़ने का माध्यम बनता है।
कार्यक्रम में पूज्य Swami Govind Dev Giri Maharaj का आशीर्वाद प्राप्त हुआ, जिनके सान्निध्य में आयोजन की गरिमा और भी बढ़ गई। इसके साथ ही Swami Chidanand Saraswati और स्थानीय जनप्रतिनिधि Renu Bisht सहित कई गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति रही।
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वक्ताओं ने कहा कि देश में सनातन संस्कृति के पुनरुत्थान के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। Narendra Modi के नेतृत्व में धार्मिक स्थलों के पुनर्निर्माण, सौंदर्यीकरण और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के लिए अनेक प्रभावी योजनाएं चलाई जा रही हैं, जिससे भारत की आध्यात्मिक पहचान को वैश्विक स्तर पर नई पहचान मिल रही है।
इस आयोजन का उद्देश्य केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज में नैतिक मूल्यों, एकता और सांस्कृतिक चेतना को मजबूत करना भी है। कथा के माध्यम से लोगों को जीवन के सही मार्ग पर चलने और आध्यात्मिक उन्नति की प्रेरणा दी जा रही है।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और सभी ने कथा श्रवण कर आध्यात्मिक आनंद की अनुभूति की। आयोजकों ने बताया कि यह कथा ज्ञान यज्ञ आगामी दिनों तक जारी रहेगा, जिसमें विभिन्न धार्मिक प्रवचन और भजन-कीर्तन का आयोजन किया जाएगा।
कुल मिलाकर, Shrimad Bhagwat Katha Gyan Yajna का यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था को सशक्त कर रहा है, बल्कि समाज में सनातन संस्कृति के मूल्यों को भी नई ऊर्जा प्रदान कर रहा है।

