शाजापुर में कृष्णमृग स्थानांतरण अभियान का दूसरा चरण शुरू। पहले दिन 97 कृष्णमृग पकड़े गए। अभियान से किसानों की फसलों को नुकसान कम करने की उम्मीद है।
मध्य प्रदेश के शाजापुर-शुजालपुर क्षेत्र में किसानों की फसलों को नुकसान से बचाने और मानव-वन्यजीव संघर्ष कम करने के लिए कृष्णमृगों के स्थानांतरण अभियान का दूसरा चरण शुरू हो गया है। अभियान के पहले दिन हन्नूखेड़ी में 97 कृष्णमृगों को सुरक्षित पकड़ा गया। इसके बाद उन्हें अनुकूल वन क्षेत्र में स्थानांतरित करने के लिए कूनो राष्ट्रीय उद्यान रवाना किया गया।
इस चरण में कुल 2,000 कृष्णमृगों को स्थानांतरित करने का लक्ष्य रखा गया है। वन विभाग की इस पहल से उन किसानों और ग्रामीणों को राहत मिलने की उम्मीद है, जो लंबे समय से वन्यजीवों के कारण फसलों को होने वाले नुकसान का सामना कर रहे हैं।
किसानों की फसलों को बचाने के लिए उठाया गया कदम
शाजापुर और शुजालपुर क्षेत्र में कृष्णमृगों की मौजूदगी के कारण खेती-किसानी प्रभावित होने की शिकायतें सामने आती रही हैं। खेतों में वन्यजीवों की आवाजाही से फसलों को नुकसान पहुंचता है, जिससे किसानों की उपज और आमदनी पर असर पड़ सकता है।
इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए कृष्णमृगों को उनके अनुकूल वन क्षेत्रों में स्थानांतरित करने की कार्रवाई की जा रही है। इस पहल का उद्देश्य किसानों की फसलों की सुरक्षा करना, ग्रामीणों की परेशानियां कम करना और वन्यजीवों के संरक्षण को बढ़ावा देना है।
अधिकारियों को उम्मीद है कि व्यवस्थित स्थानांतरण से मानव और वन्यजीवों के बीच टकराव की घटनाओं में कमी आएगी। इससे कृषि गतिविधियों को भी बेहतर ढंग से संचालित करने में मदद मिल सकती है।
दूसरे चरण में 2,000 कृष्णमृगों को स्थानांतरित करने का लक्ष्य
अभियान के दूसरे चरण में कुल 2,000 कृष्णमृगों को सुरक्षित तरीके से स्थानांतरित करने की योजना बनाई गई है। पहले दिन हन्नूखेड़ी में 97 कृष्णमृगों को पकड़ा गया और उन्हें कूनो राष्ट्रीय उद्यान ले जाने की व्यवस्था की गई।
इस अभियान में वन्यजीवों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जा रही है। कृष्णमृगों को पकड़ने, उनकी देखभाल करने और परिवहन के दौरान निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन किया जा रहा है, ताकि उन्हें अनावश्यक परेशानी से बचाया जा सके।
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दक्षिण अफ्रीका की विशेषज्ञ संस्था भी दे रही तकनीकी सहयोग
कृष्णमृगों के स्थानांतरण अभियान में दक्षिण अफ्रीका की विशेषज्ञ संस्था ‘कंजर्वेशन सॉल्यूशंस’ तकनीकी सहायता प्रदान कर रही है। इसके साथ ही मध्य प्रदेश के मालवा क्षेत्र और अन्य जिलों से आए वन्यजीव चिकित्सक, वन अधिकारी तथा प्रशिक्षित मैदानी कर्मचारी भी अभियान में शामिल हैं।
विशेषज्ञों और वन विभाग की संयुक्त टीम कृष्णमृगों को सुरक्षित तरीके से पकड़ने, उनकी स्थिति पर नजर रखने और स्थानांतरण के दौरान जरूरी सावधानियां बरतने का काम कर रही है।
इस तरह की समन्वित कार्रवाई का उद्देश्य वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ स्थानांतरण प्रक्रिया को व्यवस्थित बनाना है।
पहले चरण में 913 वन्यजीवों का हुआ था स्थानांतरण
कृष्णमृग स्थानांतरण अभियान का पहला चरण पिछले वर्ष चलाया गया था। इस दौरान कुल 913 वन्यजीवों को स्थानांतरित किया गया था। इनमें 846 कृष्णमृग और 67 नीलगाय शामिल थीं।
पहले चरण के अनुभवों के आधार पर अब दूसरे चरण को बेहतर समन्वय और तकनीकी सहयोग के साथ आगे बढ़ाया जा रहा है। इस बार भी वन विभाग का जोर वन्यजीवों की सुरक्षा और स्थानीय किसानों को राहत पहुंचाने पर है।
किसानों और ग्रामीणों से सहयोग की अपील
इस अभियान में जिला प्रशासन, स्थानीय जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों की भागीदारी भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। वन विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे वन्यजीव संरक्षण और फसलों की सुरक्षा से जुड़े इस प्रयास में सहयोग करें।
कृष्णमृगों का स्थानांतरण वन्यजीव संरक्षण और ग्रामीण आजीविका के बीच संतुलन स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। यदि अभियान निर्धारित लक्ष्य के अनुसार आगे बढ़ता है, तो शाजापुर-शुजालपुर क्षेत्र में फसल नुकसान और मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने में मदद मिल सकती है।

