जानें सावन शिवरात्रि 2026 की सही तिथि, भगवान शिव को जल चढ़ाने का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, चार प्रहर पूजा समय और इस पावन पर्व का धार्मिक महत्व।
सावन शिवरात्रि 2026: सावन महीने में आने वाली शिवरात्रि का हिंदू धर्म में विशेष महत्व माना जाता है। श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाई जाने वाली सावन शिवरात्रि पर भगवान शिव की विशेष पूजा-अर्चना, जलाभिषेक और रुद्राभिषेक करने की परंपरा है। मान्यता है कि इस दिन भोलेनाथ की आराधना करने से भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।
सावन का पवित्र महीना 30 जुलाई 2026 से शुरू हो चुका है। इसके साथ ही श्रद्धालु अब सावन शिवरात्रि की तिथि और जल चढ़ाने के शुभ समय को लेकर जानकारी जुटा रहे हैं। आइए जानते हैं साल 2026 में सावन शिवरात्रि कब मनाई जाएगी और पूजा के लिए कौन-से समय शुभ रहेंगे।
सावन शिवरात्रि 2026 की तिथि
साल 2026 में सावन शिवरात्रि का पर्व 11 अगस्त 2026 को मनाया जाएगा। इस दिन भगवान शिव की पूजा, अभिषेक और व्रत का विशेष महत्व रहेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शिवरात्रि के दिन श्रद्धा और विधि-विधान से पूजा करने से भगवान शिव शीघ्र प्रसन्न होते हैं।
सावन शिवरात्रि 2026 पूजा का शुभ मुहूर्त
सावन शिवरात्रि पर भगवान शिव की पूजा के लिए शुभ समय:
पूजा मुहूर्त: 11 अगस्त 2026 की रात 12:05 बजे से 12:48 बजे तक
इस अवधि में भगवान शिव की पूजा और ध्यान करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
सावन शिवरात्रि पर जलाभिषेक का शुभ समय
शिवरात्रि के दिन शिवलिंग पर जल चढ़ाने का विशेष महत्व होता है। साल 2026 में सावन शिवरात्रि पर जलाभिषेक का शुभ समय:
जल चढ़ाने का समय: सुबह 4:54 बजे से देर रात 1:52 बजे तक
इस दौरान भक्त शिवलिंग पर जल, दूध, गंगाजल और अन्य पूजन सामग्री अर्पित कर भगवान भोलेनाथ का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
also read: सावन 2026: आज से शुरू हुआ शिव भक्ति का पावन महीना, जानें सावन में…
सावन शिवरात्रि पर क्या करें?
- सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- भगवान शिव के नाम का स्मरण करते हुए व्रत का संकल्प लें।
- विधि-विधान से शिव पूजा करें और आरती करें।
- संभव हो तो इस दिन रुद्राभिषेक जरूर करें।
- शिवरात्रि की रात चारों प्रहर भगवान शिव की पूजा करना शुभ माना जाता है।
- पूजा के दौरान शिव मंत्रों का जाप करें और भगवान शिव को भोग अर्पित करें।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जो भक्त सावन शिवरात्रि पर पूरी श्रद्धा के साथ चार प्रहर की पूजा करते हैं, उन्हें भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
सावन शिवरात्रि पर क्या नहीं करना चाहिए?
सावन शिवरात्रि के दिन कुछ कार्यों से बचने की सलाह दी जाती है:
- तामसिक भोजन जैसे प्याज और लहसुन का सेवन न करें।
- मांस और मदिरा से दूर रहें।
- शिवलिंग पर केतकी के फूल, सिंदूर, रोली और कुमकुम अर्पित न करें।
- भगवान शिव की पूजा में तुलसी के पत्तों का प्रयोग न करें।
- किसी के साथ विवाद या अपशब्दों का प्रयोग न करें।
- किसी का अपमान करने से बचें।
सावन शिवरात्रि 2026 चार प्रहर पूजा का समय
पहला प्रहर: 11 अगस्त 2026, शाम 7:04 बजे से रात 9:45 बजे तक
दूसरा प्रहर: 11 अगस्त 2026, रात 9:45 बजे से 12 अगस्त रात 12:45 बजे तक
तीसरा प्रहर: 12 अगस्त 2026, रात 12:26 बजे से सुबह 3:07 बजे तक
चौथा प्रहर: 12 अगस्त 2026, सुबह 3:07 बजे से 5:49 बजे तक
सावन शिवरात्रि भगवान शिव की भक्ति और साधना का विशेष पर्व माना जाता है। इस दिन श्रद्धा, संयम और नियमों के साथ भोलेनाथ की पूजा करने से आध्यात्मिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा की प्राप्ति होती है।

