डॉ. अरविंद शर्मा ने रोहिणी के जापानी पार्क में 121 फुट भगवान परशुराम प्रतिमा की मांग को लेकर रेखा गुप्ता से चर्चा की।
रोहिणी में आयोजित भव्य भगवान परशुराम जन्मोत्सव के दौरान डॉ. अरविंद शर्मा ने एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक प्रस्ताव को आगे बढ़ाते हुए जापानी पार्क में भगवान परशुराम की 121 फुट ऊंची प्रतिमा स्थापित करने की मांग का समर्थन किया। उन्होंने इस संबंध में रेखा गुप्ता से विस्तृत चर्चा करते हुए इस परियोजना को मंजूरी देने का अनुरोध किया।
रोहिणी में आयोजित इस कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह, सांसद मनोज तिवारी और विधायक अनिल शर्मा सहित कई गणमान्य व्यक्ति शामिल हुए। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और समाज के प्रतिनिधियों ने भाग लेकर भगवान परशुराम के आदर्शों को याद किया और उनकी शिक्षाओं को अपनाने का संकल्प लिया।
सभा को संबोधित करते हुए डॉ. अरविंद शर्मा ने कहा कि भगवान परशुराम ने सदैव शोषित और जरूरतमंदों के हितों की रक्षा की और समाज को उच्च आदर्शों का मार्ग दिखाया। उन्होंने कहा कि उनके जीवन से प्रेरणा लेकर समाज को एकजुट करना और सनातन संस्कृति को मजबूत बनाना आज की आवश्यकता है।
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उन्होंने बताया कि दिल्ली विधानसभा चुनाव के दौरान ब्राह्मण समाज ने इस मांग को प्रमुखता से उठाया था और भाजपा को भरपूर समर्थन दिया था। अब समय आ गया है कि इस मांग पर गंभीरता से विचार किया जाए और इसे साकार रूप दिया जाए। उन्होंने कहा कि इस तरह की भव्य प्रतिमा न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक होगी बल्कि सांस्कृतिक पहचान और पर्यटन को भी बढ़ावा देगी।
डॉ. शर्मा ने यह भी बताया कि गोवा में भगवान परशुराम राष्ट्रीय परिषद द्वारा आयोजित कार्यक्रमों के माध्यम से परशुराम से जुड़े मिथकों और भ्रांतियों को दूर करने का प्रयास किया गया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि देशभर में ऐसे आयोजन होने चाहिए, ताकि लोगों को सही जानकारी मिल सके और सांस्कृतिक जागरूकता बढ़े।
उन्होंने कार्यक्रम के आयोजकों विनोद वत्स, चांद करण शर्मा और अशोक शर्मा की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के आयोजन समाज को जोड़ने और सांस्कृतिक मूल्यों को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह परियोजना साकार होती है, तो यह न केवल धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण होगी, बल्कि दिल्ली के पर्यटन मानचित्र पर भी एक नया आकर्षण जोड़ सकती है। इस प्रस्ताव को लेकर अब राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर चर्चा तेज होने की संभावना है।

