छतरपुर में आयोजित कार्यक्रम में राजस्थान दिवस और गणगौर उत्सव के अवसर पर राजस्थान की समृद्ध संस्कृति, लोक परंपराओं और विरासत को याद किया गया।
राजस्थान दिवस और पारंपरिक गणगौर उत्सव के अवसर पर दिल्ली के छतरपुर में एक सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें राजस्थान की समृद्ध संस्कृति, लोक परंपराओं और ऐतिहासिक विरासत को याद किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लेकर इस उत्सव को हर्षोल्लास के साथ मनाया।
राजस्थान की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि राजस्थान अपनी वीरता, शौर्य, लोकसंगीत, हस्तकला और रंग-बिरंगे उत्सवों के लिए देश ही नहीं, बल्कि दुनिया भर में प्रसिद्ध है। यहां की संस्कृति में इतिहास की गरिमा, लोकजीवन की ऊर्जा और परंपराओं की आत्मा एक साथ दिखाई देती है।
उन्होंने कहा कि राजस्थान की लोक परंपराएं और सांस्कृतिक विरासत भारतीय संस्कृति के उज्ज्वल अध्याय का प्रतिनिधित्व करती हैं।
गणगौर उत्सव का विशेष महत्व
गणगौर राजस्थान का एक प्रमुख लोक उत्सव है, जो विशेष रूप से माता गौरी और भगवान शिव की आराधना से जुड़ा हुआ है। यह त्योहार समाज में खुशहाली, सौभाग्य और पारिवारिक समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।
वक्ताओं ने कहा कि ऐसे उत्सव हमारी सांस्कृतिक परंपराओं को पीढ़ी दर पीढ़ी जीवंत बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
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दिल्ली में भी दिखती है राजस्थान की सांस्कृतिक छाप
कार्यक्रम के दौरान यह भी कहा गया कि दिल्ली पूरे देश की विविध संस्कृतियों का संगम है और इसमें राजस्थान की समृद्ध संस्कृति का भी विशेष योगदान है।
राजस्थान से जुड़े लोग अपने परिश्रम, उद्यम और सांस्कृतिक गौरव के माध्यम से दिल्ली के सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन को समृद्ध बना रहे हैं।
गणमान्य व्यक्तियों की रही उपस्थिति
छतरपुर में आयोजित इस कार्यक्रम में कई जनप्रतिनिधि और गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। कार्यक्रम में सांसद रामवीर सिंह बिधूड़ी, सांसद योगेंद्र चंदोलिया और विधायक करतार सिंह तंवर सहित कई प्रमुख अतिथियों ने भाग लिया।
राजस्थान दिवस और गणगौर की शुभकामनाएं
कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थित लोगों को राजस्थान दिवस और गणगौर उत्सव की शुभकामनाएं दी गईं और देश की सांस्कृतिक विविधता को बनाए रखने के लिए ऐसे आयोजनों की आवश्यकता पर जोर दिया गया।

