AAP सांसद कंग ने सुखबीर बादल पर अकाल तख्त पर सवाल उठाने को लेकर तीखा हमला बोला, राजनीति में बढ़ा विवाद।
पंजाब की राजनीति में एक बार फिर बयानबाजी को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। आम आदमी पार्टी (AAP) के सांसद Malvinder Singh Kang ने शिरोमणि अकाली दल के नेता Sukhbir Singh Badal पर तीखा हमला बोलते हुए उनके हालिया बयानों को “दोहरा चरित्र” और “धार्मिक संस्थाओं का अपमान” करार दिया है।
कंग ने अपने बयान में कहा कि सिखों की सर्वोच्च धार्मिक संस्था Sri Akal Takht Sahib के फैसलों पर सवाल उठाना न केवल दुर्भाग्यपूर्ण है, बल्कि यह सिख परंपराओं और मर्यादाओं के प्रति अनादर को भी दर्शाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीतिक जमीन खिसकते देख सुखबीर बादल अब पवित्र संस्थाओं को निशाना बना रहे हैं, जो कि बेहद चिंताजनक प्रवृत्ति है।
सांसद कंग ने कहा कि जब पहले सुखबीर बादल को अकाल तख्त साहिब के समक्ष पेश होने के लिए कहा गया था, तब उन्होंने गुरु महाराज की हजूरी में अपनी गलतियों को स्वीकार किया था और यह पूरा घटनाक्रम सार्वजनिक रूप से सामने आया था। लेकिन इसके बाद एक राजनीतिक रैली में उन्होंने अपने बयान से पलटते हुए यह दावा किया कि उन्होंने कोई गलती नहीं की। कंग के अनुसार, यह उनके दोहरे रवैये और राजनीतिक स्वार्थ को उजागर करता है।
हाल ही में सुखबीर बादल द्वारा अपने खिलाफ ‘साजिश’ होने के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कंग ने कहा कि पांच सिंह साहिबानों द्वारा दिए गए फैसले को साजिश बताना सिख इतिहास और परंपराओं के खिलाफ है। उन्होंने इसे एक गंभीर और दुर्भाग्यपूर्ण टिप्पणी बताया, जो धार्मिक संस्थाओं की गरिमा को ठेस पहुंचाती है।
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कंग ने आगे कहा कि पंजाब और सिख समुदाय के खिलाफ किए गए कार्यों के लिए जनता पहले ही सुखबीर बादल को जवाब दे रही है। लेकिन अब जब उन्होंने धार्मिक संस्था की साख पर सवाल उठाया है, तो इसके लिए उन्हें और भी कड़ी प्रतिक्रिया का सामना करना पड़ सकता है।
इस पूरे घटनाक्रम ने पंजाब की राजनीति में एक नया विवाद खड़ा कर दिया है, जहां राजनीतिक और धार्मिक मुद्दे आपस में जुड़ते नजर आ रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के विवाद आने वाले समय में राज्य की राजनीति को और अधिक संवेदनशील बना सकते हैं।
वहीं, अकाली दल की ओर से इस मुद्दे पर क्या प्रतिक्रिया आती है, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। फिलहाल, बयानबाजी के इस दौर ने पंजाब के सियासी माहौल को गरमा दिया है और आने वाले दिनों में इस पर और तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल सकती हैं।
कुल मिलाकर, यह विवाद केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें धार्मिक भावनाएं भी जुड़ी हुई हैं, जिससे इसका प्रभाव व्यापक स्तर पर देखने को मिल सकता है।

