मुख्यमंत्री भगवंत मान ने धान बुआई के लिए 8 घंटे बिजली, 21,000 क्यूसेक पानी और 14,000 किमी पाइपलाइन नेटवर्क से किसानों को बड़ी राहत दी।
पंजाब में धान सीजन से पहले किसानों के लिए बड़ी राहत की घोषणा करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने सिंचाई और बिजली सप्लाई को लेकर व्यापक योजना पेश की है। सरकार ने फैसला किया है कि 1 मई से पूरे राज्य में नहरों के जरिए सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराया जाएगा, जिसके तहत 21,000 क्यूसेक पानी छोड़ा जाएगा। इसके साथ ही धान की बुआई को व्यवस्थित और सुचारू बनाने के लिए राज्य को चार ज़ोनों में बांटकर किसानों को प्रतिदिन 8 घंटे निर्बाध बिजली सप्लाई दी जाएगी।
मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार ने सिंचाई बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए लगभग 6,700 करोड़ रुपये का निवेश किया है। इसके तहत पूरे पंजाब में 14,000 किलोमीटर लंबा पाइपलाइन नेटवर्क बिछाया गया है और 7,000 नए राजबाहों व कस्सियों का निर्माण किया गया है। इन संरचनाओं की जांच के लिए बुधवार को 21,000 क्यूसेक पानी छोड़ा गया, जो दो भाखड़ा नहरों की क्षमता के बराबर बताया जा रहा है।
सरकार का यह कदम केवल धान की खेती तक सीमित नहीं है, बल्कि मालवा क्षेत्र में कपास, बागवानी और चारे वाली मक्की जैसी अन्य फसलों के लिए भी पानी की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि इससे खासकर फाजिल्का और अबोहर जैसे टेल क्षेत्रों में किसानों को बड़ा लाभ मिलेगा, जहां पहले पानी की कमी एक बड़ी चुनौती रही है। अब इन क्षेत्रों में किसानों को ट्यूबवेल पर निर्भरता कम करनी पड़ेगी और नहरी पानी के जरिए सिंचाई संभव होगी।
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इस पहल को राज्य की जल प्रबंधन रणनीति में बड़ा बदलाव बताते हुए कहा कि पानी की हर बूंद को बचाने और भूजल के अत्यधिक दोहन को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए गए हैं। उन्होंने जानकारी दी कि पिछले एक वर्ष में लगभग 21 लाख घन मीटर पानी को विभिन्न रिचार्ज योजनाओं के जरिए जमीन के नीचे पहुंचाया गया है, जिससे कई क्षेत्रों में भूजल स्तर में 2 से 4 मीटर तक वृद्धि दर्ज की गई है।
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धान की बुआई को चरणबद्ध तरीके से लागू करने के लिए सरकार ने विस्तृत शेड्यूल भी जारी किया है। 15 मई से सभी जिलों में धान की सीधी बुआई शुरू होगी, जबकि 1 जून से पहले चरण में गुरदासपुर, पठानकोट, अमृतसर, तरन तारन, रोपड़, एसएएस नगर, फतेहगढ़ साहिब और होशियारपुर में बुआई शुरू होगी। इसके बाद 5 जून से फरीदकोट, बठिंडा, फिरोजपुर, मुक्तसर साहिब और फाजिल्का तथा 9 जून से लुधियाना, मलेरकोटला, मानसा, मोगा, पटियाला, संगरूर, बरनाला, कपूरथला, जालंधर और शहीद भगत सिंह नगर में बुआई का कार्य शुरू किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार का उद्देश्य केवल उत्पादन बढ़ाना नहीं, बल्कि टिकाऊ कृषि प्रणाली को बढ़ावा देना है। उन्होंने कहा कि नहरी पानी की उपलब्धता बढ़ाकर ट्यूबवेलों पर दबाव कम किया जा रहा है, जिससे बिजली की बचत भी होगी और पर्यावरण संतुलन भी बेहतर होगा।
इसके अलावा उन्होंने कहा कि किसानों को धान बेचने में नमी की समस्या से बचाने के लिए इस बार 1 जून से ही धान की खरीद शुरू करने का फैसला लिया गया है। सरकार का यह प्रयास न केवल किसानों की आय को सुरक्षित करेगा बल्कि उन्हें बेहतर बाजार सुविधा भी प्रदान करेगा।
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने दोहराया कि पंजाब सरकार राज्य के जल संसाधनों की रक्षा और किसानों की समृद्धि के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि राज्य के पानी का एक-एक कतरा पंजाब के हित में उपयोग किया जाएगा और इसे किसी अन्य राज्य या देश को अतिरिक्त रूप से नहीं दिया जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि सिंचाई और बिजली सप्लाई को लेकर उठाए गए ये कदम पंजाब की कृषि व्यवस्था को अधिक टिकाऊ और आधुनिक बनाएंगे। इससे किसानों की लागत घटेगी, उत्पादन बढ़ेगा और आने वाली पीढ़ियों के लिए जल संसाधनों का संरक्षण भी सुनिश्चित होगा।

