पंजाब की मेरी दुकान, मेरे नाम योजना से पात्र किरायेदार दुकानदारों को मालिकाना हक मिलेगा। जानें पात्रता, आवेदन प्रक्रिया और कलेक्टर रेट पर छूट।
पंजाब सरकार ने लंबे समय से सरकारी दुकानों में किराये पर कारोबार कर रहे दुकानदारों को राहत देने के लिए ‘मेरी दुकान, मेरे नाम’ योजना शुरू की है। इस योजना के तहत नगर निगम, नगर परिषद और नगर पंचायत की दुकानों पर कानूनी रूप से किरायेदार के तौर पर कारोबार करने वाले पात्र दुकानदार मालिकाना हक पाने के लिए आवेदन कर सकेंगे। सरकार ने इसके लिए पात्रता, आय वर्ग के अनुसार भुगतान और दस्तावेजों से जुड़ी शर्तें निर्धारित की हैं।
कैबिनेट मंत्री हरजोत सिंह बैंस के अनुसार, इस पहल का उद्देश्य उन दुकानदारों की लंबे समय से चली आ रही मांग को पूरा करना है, जो शहरी क्षेत्रों में स्थानीय निकायों की दुकानों पर वर्षों से कारोबार कर रहे हैं।
क्या है ‘मेरी दुकान, मेरे नाम’ योजना?
पंजाब सरकार की इस योजना के माध्यम से स्थानीय निकायों की दुकानों पर वैध रूप से काबिज पात्र दुकानदारों को निर्धारित कीमत चुकाकर मालिकाना अधिकार प्राप्त करने का अवसर मिलेगा। इसमें नगर निगम, नगर परिषद और नगर पंचायत के अंतर्गत आने वाली दुकानें शामिल हैं।
योजना का लाभ लेने के लिए दुकानदारों को अपनी वैध किरायेदारी या कानूनी कब्जे से संबंधित प्रमाण प्रस्तुत करने होंगे। आवेदन मिलने के बाद संबंधित अधिकारियों द्वारा दस्तावेजों और पात्रता की जांच की जाएगी। इसके बाद निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार दुकान की कीमत तय की जाएगी।
कौन कर सकता है आवेदन? जानें पात्रता
‘मेरी दुकान, मेरे नाम’ योजना का लाभ सभी दुकानदारों को स्वतः नहीं मिलेगा। इसके लिए निर्धारित पात्रता शर्तों को पूरा करना आवश्यक है।
- आवेदक का संबंधित दुकान पर कानूनी रूप से काबिज होना या वैध किरायेदार होना जरूरी है।
- दुकान स्थानीय निकाय यानी नगर निगम, नगर परिषद या नगर पंचायत के अंतर्गत होनी चाहिए।
- उपलब्ध जानकारी के अनुसार, दुकान पर कम से कम 12 साल से वैध कब्जा या किरायेदारी होनी चाहिए।
- एक अप्रैल 2020 से पहले की निर्धारित पात्रता शर्तों को पूरा करना आवश्यक होगा।
- आवेदक को अपनी किरायेदारी और दुकान पर कारोबार करने से जुड़े दस्तावेज उपलब्ध कराने होंगे।
- पात्रता से जुड़ी अंतिम पुष्टि संबंधित स्थानीय निकाय के आधिकारिक नियमों के अनुसार की जाएगी।
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कहां और कैसे करें आवेदन?
योजना के लिए पात्र दुकानदार संबंधित एसडीएम कार्यालय, नगर परिषद कार्यालय या नगर निगम कार्यालय में आवेदन कर सकते हैं। आवेदन के साथ दुकान से संबंधित आवश्यक दस्तावेज जमा करने होंगे।
आवेदन प्रक्रिया के प्रमुख चरण इस प्रकार हैं:
- आवेदन जमा करें: संबंधित एसडीएम या स्थानीय निकाय कार्यालय में निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार आवेदन दें।
- दस्तावेजों का सत्यापन: एसडीएम स्तर की समिति आवेदक की पात्रता और प्रस्तुत दस्तावेजों की जांच करेगी।
- दुकान की कीमत निर्धारित होगी: संबंधित प्राइस फिक्सेशन कमेटियां दुकान की कीमत तय करने की प्रक्रिया पूरी करेंगी।
- स्थानीय निकाय की मंजूरी: अंतिम प्रस्ताव संबंधित नगर निगम, नगर परिषद या नगर पंचायत के सदन के समक्ष रखा जाएगा।
- आगे की औपचारिकताएं: निर्धारित कीमत और लागू नियमों के अनुसार आवश्यक प्रक्रिया पूरी होने पर मालिकाना हक से संबंधित कार्रवाई की जाएगी।
आय के हिसाब से देना होगा कलेक्टर रेट का कितना पैसा?
योजना में दुकानदारों के आय वर्ग के आधार पर कलेक्टर रेट का अलग-अलग प्रतिशत निर्धारित किया गया है। इससे पात्र दुकानदारों को अपनी आर्थिक स्थिति के अनुसार दुकान का मालिकाना हक प्राप्त करने का अवसर मिलेगा।
| वार्षिक आय वर्ग | कलेक्टर रेट का देय हिस्सा |
|---|---|
| ₹3 लाख तक (EWS) | 12.5% |
| ₹3 लाख से अधिक और ₹8 लाख तक (LIG) | 25% |
| ₹8 लाख से अधिक और ₹13 लाख तक (MIG) | 50% |
| ₹13 लाख से अधिक | 100% |
इसके अतिरिक्त, 50 वर्ग मीटर से कम क्षेत्रफल वाली दुकानों के लिए कलेक्टर रेट का 50 प्रतिशत भुगतान करने का प्रावधान बताया गया है। ऐसी दुकानों पर यह छूट किस तरह लागू होगी, इसकी पुष्टि संबंधित कार्यालय से करना उचित होगा।
मालिकाना हक के लिए कौन से दस्तावेज जरूरी होंगे?
आवेदक को दुकान पर अपने वैध कब्जे या किरायेदारी को साबित करने के लिए संबंधित दस्तावेज जमा करने पड़ सकते हैं। इनमें शामिल हैं:
- जीएसटी पंजीकरण प्रमाणपत्र, यदि लागू हो
- दुकान से संबंधित किराये की रसीदें या बिल
- फर्म का पंजीकरण प्रमाणपत्र
- कारोबार से जुड़े अन्य वैध दस्तावेज
- पहचान और पते से संबंधित प्रमाण
- संबंधित स्थानीय निकाय द्वारा मांगे गए अतिरिक्त दस्तावेज
आवेदन करने से पहले संबंधित एसडीएम या नगर निकाय कार्यालय से दस्तावेजों की आधिकारिक सूची प्राप्त कर लेना बेहतर होगा।
अवैध कब्जे वाली दुकानों को नहीं मिलेगा लाभ
पंजाब सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस योजना का लाभ केवल निर्धारित शर्तों के अनुसार कानूनी रूप से काबिज दुकानदारों को मिलेगा। पार्क, गलियों या अन्य सार्वजनिक भूमि पर अवैध कब्जा करके बनाई गई दुकानों को इस योजना में शामिल नहीं किया गया है।
साथ ही, योजना में किसी अलग सब्सिडी का प्रावधान नहीं बताया गया है। पात्र दुकानदारों को लागू दरों के अनुसार निर्धारित राशि का भुगतान करना होगा।
दुकानदारों को क्या होगा फायदा?
इस योजना से लंबे समय से स्थानीय निकायों की दुकानों पर कारोबार कर रहे पात्र दुकानदारों को मालिकाना हक हासिल करने का अवसर मिल सकता है। इससे उनकी दुकान से जुड़े अधिकार अधिक स्पष्ट होंगे और भविष्य में संपत्ति संबंधी अनिश्चितता कम करने में मदद मिल सकती है।
आय वर्ग के अनुसार भुगतान की व्यवस्था से कम आय वाले पात्र दुकानदारों को अपेक्षाकृत कम राशि देकर मालिकाना हक प्राप्त करने का अवसर मिलेगा। हालांकि, अंतिम लाभ पात्रता, दस्तावेजों के सत्यापन, दुकान की कीमत और संबंधित स्थानीय निकाय की मंजूरी पर निर्भर करेगा।

