दिल्ली की अनमोल योजना में अब नवजातों की 63 बीमारियों की जांच होगी। 61,951 बच्चों की स्क्रीनिंग में 1,064 में बीमारी मिली। जानें योजना के लाभ।
दिल्ली सरकार ने नवजात शिशुओं को गंभीर बीमारियों से बचाने के लिए अनमोल योजना का विस्तार किया है। अब इस योजना के तहत जन्म लेने वाले बच्चों की 56 के बजाय 63 बीमारियों के लिए स्क्रीनिंग की जाएगी। सरकार के मुताबिक, अब तक 61,951 नवजातों की जांच की जा चुकी है, जिनमें 1,064 बच्चों में बीमारी का पता चला है। समय रहते बीमारी की पहचान होने से इन बच्चों को उचित इलाज उपलब्ध कराने में मदद मिल रही है।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने योजना का दायरा बढ़ाने के साथ ही सालाना स्क्रीनिंग का लक्ष्य भी बढ़ाने की घोषणा की है। पहले हर साल डेढ़ लाख नवजातों की जांच का लक्ष्य निर्धारित था, जिसे अब बढ़ाकर ढाई लाख कर दिया गया है।
क्या है दिल्ली सरकार की अनमोल योजना?
अनमोल का पूरा नाम Advanced Newborn Monitoring and Optimal LifeCare है। यह दिल्ली सरकार की एक स्वास्थ्य पहल है, जिसका उद्देश्य नवजात शिशुओं में गंभीर आनुवंशिक, मेटाबॉलिक और जन्मजात बीमारियों का शुरुआती चरण में पता लगाना है।
इस योजना के तहत जन्म के 24 से 72 घंटे के भीतर नवजात शिशुओं की स्क्रीनिंग की जाती है। इसके लिए बच्चे की एड़ी से खून का एक छोटा सैंपल लिया जाता है। इसी नमूने के जरिए कई बीमारियों की जांच की जाती है, ताकि बीमारी के लक्षण स्पष्ट होने से पहले ही जरूरी कदम उठाए जा सकें।
योजना के लिए सरकार ने 25 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया है। इसका मुख्य उद्देश्य बच्चों को समय पर चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराना और गंभीर बीमारियों से होने वाली जटिलताओं को कम करना है।
56 से बढ़ाकर 63 की गई बीमारियों की स्क्रीनिंग
दिल्ली सरकार ने नवजातों की स्वास्थ्य जांच का दायरा बढ़ाने का फैसला किया है। पहले अनमोल योजना में 56 बीमारियों की स्क्रीनिंग की जाती थी, लेकिन अब इसमें सात और बीमारियों को शामिल करते हुए कुल संख्या 63 कर दी गई है।
इस विस्तार से नवजातों में विभिन्न आनुवंशिक और जन्मजात विकारों की पहचान करने की संभावना बढ़ेगी। शुरुआती जांच के जरिए बीमारी का पता चलने पर डॉक्टर समय रहते उपचार की योजना बना सकते हैं।
सरकार ने स्क्रीनिंग का वार्षिक लक्ष्य भी डेढ़ लाख से बढ़ाकर ढाई लाख नवजात कर दिया है। इससे अधिक बच्चों को इस स्वास्थ्य सुविधा के दायरे में लाने में मदद मिलेगी।
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61,951 नवजातों की जांच, 1,064 में मिली बीमारी
योजना के तहत अब तक किए गए स्क्रीनिंग कार्य में हजारों नवजातों की स्वास्थ्य जांच की गई है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार:
- कुल स्क्रीनिंग: 61,951 नवजात
- बीमारी की पहचान: 1,064 बच्चे
- स्क्रीनिंग में शामिल बीमारियां: 63
- सालाना जांच का नया लक्ष्य: 2.5 लाख नवजात
- योजना का बजट: ₹25 करोड़
जांच में बीमारी की पहचान होने के बाद संबंधित बच्चों को आगे के परीक्षण और उपचार के लिए चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। जानकारी के अनुसार, इन बच्चों के इलाज की व्यवस्था लोकनायक जयप्रकाश नारायण (LNJP) अस्पताल में की जा रही है।
LNJP अस्पताल की जेनेटिक लैब में होती है जांच
अनमोल योजना के तहत नवजातों के सैंपल सरकारी और निजी अस्पतालों से एकत्र किए जाते हैं। इसके बाद इन्हें LNJP अस्पताल की जेनेटिक लैब में जांच के लिए भेजा जाता है।
इस व्यवस्था का उद्देश्य यह है कि बच्चे के जन्म के बाद परिवार को स्क्रीनिंग के लिए अलग-अलग अस्पतालों के चक्कर न लगाने पड़ें। यदि जांच में किसी बीमारी की आशंका या पुष्टि होती है, तो परिवार को इसकी जानकारी देकर आगे की चिकित्सकीय प्रक्रिया शुरू की जाती है।
इस तरह अस्पतालों और जेनेटिक लैब के बीच समन्वय स्थापित करके बच्चों की जांच और उपचार को अधिक सुविधाजनक बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
किन बीमारियों की होती है जांच?
अनमोल योजना के अंतर्गत कई गंभीर आनुवंशिक, हार्मोनल, मेटाबॉलिक और जन्मजात बीमारियों की स्क्रीनिंग की जाती है। इनमें शामिल हैं:
- जन्मजात हाइपोथायरायडिज्म (Congenital Hypothyroidism)
- सिकल सेल एनीमिया (Sickle Cell Anaemia)
- थैलेसीमिया (Thalassemia)
- स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी (SMA)
- सिस्टिक फाइब्रोसिस (Cystic Fibrosis)
- हार्मोनल और एड्रिनल संबंधी विकार
- कुछ अन्य मेटाबॉलिक और आनुवंशिक बीमारियां
इन बीमारियों का समय पर पता लगना महत्वपूर्ण है, क्योंकि कुछ स्थितियों में शुरुआती उपचार से गंभीर जटिलताओं को कम किया जा सकता है। हालांकि, स्क्रीनिंग में किसी बीमारी की आशंका सामने आने पर उसकी पुष्टि के लिए अतिरिक्त जांच की जरूरत हो सकती है।
नवजातों के लिए शुरुआती जांच क्यों जरूरी है?
जन्म के समय कई गंभीर बीमारियों के स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते। ऐसे में केवल लक्षणों के आधार पर बीमारी की पहचान करना मुश्किल हो सकता है। नवजात स्क्रीनिंग के जरिए इन समस्याओं का शुरुआती संकेत मिल सकता है।
समय पर जांच होने से डॉक्टर आवश्यक उपचार शुरू करने, बच्चे की निगरानी करने और परिवार को उचित चिकित्सकीय सलाह देने में सक्षम होते हैं। इससे बीमारी के प्रभाव को कम करने और बच्चे के बेहतर स्वास्थ्य की संभावनाओं को बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

