उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री कृषक उपहार योजना में बदलाव हुआ है। अब किसानों को चारा मशीन, ट्रैक्टर, पंपिंग सेट और सोलर पावर पैक जैसे उपहार मिलेंगे।
उत्तर प्रदेश सरकार ने किसानों को अधिक उपयोगी सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री कृषक उपहार योजना के तहत दिए जाने वाले पुरस्कारों में बदलाव किया है। राज्य कृषि उत्पादन मंडी परिषद की नई व्यवस्था के अनुसार, अब किसानों को केवल घरेलू उपयोग की वस्तुओं के बजाय खेती और पशुपालन में काम आने वाले उपकरण भी दिए जाएंगे। संशोधित उपहार सूची में चारा काटने की मशीन, छोटे ट्रैक्टर, सोलर पावर पैक और अन्य कृषि उपकरण शामिल किए गए हैं। इसके अलावा, किसानों के लिए प्लास्टिक कैरेट वितरण और कृषि विश्वविद्यालयों के विद्यार्थियों की छात्रवृत्ति में बढ़ोतरी जैसे कदम भी शामिल हैं।
मुख्यमंत्री कृषक उपहार योजना में क्या बदला?
योजना के तहत किसानों को लकी ड्रॉ के माध्यम से मिलने वाले पुरस्कारों की सूची में संशोधन किया गया है। इसका उद्देश्य किसानों की खेती संबंधी जरूरतों को पूरा करना और पशुपालन से जुड़े कामों को आसान बनाना है।
पहले उपहार सूची में शामिल 43 इंच की एलईडी टीवी के स्थान पर अब लगभग 30 हजार रुपये मूल्य की 3 हॉर्स पावर की चारा काटने वाली मशीन देने का प्रावधान किया गया है। यह मशीन पशुपालकों के लिए उपयोगी साबित हो सकती है, क्योंकि इससे पशुओं के लिए चारा तैयार करने में लगने वाला समय और मेहनत कम हो सकती है।
नई व्यवस्था के अनुसार, प्रत्येक संभाग में तीन किसानों को चारा मशीन दिए जाने का उल्लेख है।
पंपिंग सेट और पावर स्प्रेयर भी मिलेंगे
संशोधित पुरस्कार सूची में सिंचाई और फसल सुरक्षा से संबंधित कुछ उपकरणों को पहले की तरह शामिल रखा गया है।
- पंपिंग सेट: लगभग 55 हजार रुपये मूल्य का 8 हॉर्स पावर का पंपिंग सेट। प्रत्येक संभाग में दो किसानों को देने का प्रावधान बताया गया है।
- पावर स्प्रेयर: लगभग 5 हजार रुपये मूल्य का पावर स्प्रेयर भी उपहार सूची में शामिल रहेगा।
इन उपकरणों का उद्देश्य किसानों को सिंचाई और फसलों पर छिड़काव जैसे कृषि कार्यों में सहायता उपलब्ध कराना है।
बंपर ड्रॉ में ट्रैक्टर और सोलर पावर पैक शामिल
मुख्यमंत्री कृषक उपहार योजना के बंपर ड्रॉ के पुरस्कारों में भी बदलाव किए गए हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, पुरस्कारों की संशोधित सूची में निम्नलिखित वस्तुएं शामिल हैं:
- प्रथम पुरस्कार: 35 हॉर्स पावर का ट्रैक्टर।
- द्वितीय पुरस्कार: 20 हॉर्स पावर से कम क्षमता वाला छोटा ट्रैक्टर।
- तृतीय पुरस्कार: 100 सीसी की मोटरसाइकिल।
- चतुर्थ पुरस्कार: सोलर पावर पैक संयंत्र।
इन पुरस्कारों के जरिए किसानों को कृषि कार्यों, खेतों तक आवागमन और ऊर्जा संबंधी जरूरतों में मदद मिलने की उम्मीद है। हालांकि, पुरस्कारों की उपलब्धता, पात्रता और वितरण की शर्तों के लिए मंडी परिषद की आधिकारिक अधिसूचना देखना जरूरी है।
also read: डॉ. भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजना में डेयरी फार्म पर ₹10 लाख तक की…
किसानों को मुफ्त मिलेंगे 4,400 प्लास्टिक कैरेट
फलों और सब्जियों की सुरक्षित ढुलाई तथा भंडारण को ध्यान में रखते हुए मंडी परिषद द्वारा किसानों को कुल 4,400 प्लास्टिक कैरेट वितरित करने की योजना बताई गई है। इन कैरेट का उपयोग उपज को रखने और परिवहन के दौरान होने वाले नुकसान को कम करने में किया जा सकता है।
मंडी की श्रेणियों के अनुसार कैरेट वितरण का प्रस्ताव इस प्रकार है:
- ‘क’ श्रेणी की मंडियां: 2,000 कैरेट
- ‘ख’ श्रेणी की मंडियां: 1,000 कैरेट
- ‘ग’ श्रेणी की मंडियां: 800 कैरेट
- ‘घ’ श्रेणी की मंडियां: 600 कैरेट
इसके अतिरिक्त, उपज को ढंकने के लिए व्यापारियों को प्लास्टिक शीट उपलब्ध कराने का भी प्रावधान बताया गया है।
कृषि विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों की छात्रवृत्ति बढ़ी
कृषि शिक्षा को प्रोत्साहित करने के लिए कृषि विश्वविद्यालयों से स्नातक की पढ़ाई कर रहे विद्यार्थियों की छात्रवृत्ति में भी वृद्धि की गई है। उपलब्ध विवरण के अनुसार, छात्रवृत्ति की राशि 3,000 रुपये से बढ़ाकर 5,000 रुपये कर दी गई है।
इसके अलावा, मंडी परिसर में दुर्घटना या आग लगने जैसी घटनाओं से प्रभावित लोगों को आर्थिक सहायता देने का प्रावधान भी शामिल किया गया है। इससे मंडियों में काम करने वाले किसानों, व्यापारियों और अन्य संबंधित लोगों को सहायता मिल सकती है।
किसानों को व्यावहारिक लाभ पहुंचाना है उद्देश्य
मंडी परिषद के निदेशक जितेंद्र प्रताप सिंह के अनुसार, इन संशोधनों का मुख्य उद्देश्य किसानों, व्यापारियों और विद्यार्थियों को उनकी वास्तविक जरूरतों के अनुरूप लाभ उपलब्ध कराना है।
कृषि उपकरणों को पुरस्कार सूची में शामिल करने से खेती और पशुपालन से जुड़े कामों में उपयोगी संसाधन उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया है। वहीं, प्लास्टिक कैरेट वितरण और छात्रवृत्ति में बढ़ोतरी से कृषि उपज के प्रबंधन और शिक्षा को बढ़ावा देने का प्रयास किया गया है।

