अप्रैल 2026 में प्रदोष व्रत 15 और 28 अप्रैल को है, जानें पूजा का शुभ समय, विधि और भगवान शिव आराधना का महत्व।
हिंदू धर्म में भगवान शिव की आराधना के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाने वाला प्रदोष व्रत अप्रैल 2026 में दो बार पड़ रहा है। वैदिक पंचांग के अनुसार यह व्रत हर माह की कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को रखा जाता है और इसे करने से भक्तों को सुख-शांति, समृद्धि और कष्टों से मुक्ति प्राप्त होती है।
अप्रैल 2026 में प्रदोष व्रत की तिथियां
इस महीने दो प्रमुख प्रदोष व्रत रखे जाएंगे:
कृष्ण पक्ष प्रदोष व्रत
- तिथि: 15 अप्रैल 2026
- त्रयोदशी प्रारंभ: रात 12:12 बजे
- त्रयोदशी समाप्त: रात 10:31 बजे
- पूजा शुभ मुहूर्त: शाम 06:47 बजे से 09:00 बजे तक
शुक्ल पक्ष प्रदोष व्रत
- तिथि: 28 अप्रैल 2026
- त्रयोदशी प्रारंभ: शाम 06:51 बजे
- त्रयोदशी समाप्त: 29 अप्रैल रात 07:51 बजे
- पूजा शुभ मुहूर्त: शाम 06:54 बजे से 09:04 बजे तक
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प्रदोष व्रत का धार्मिक महत्व
प्रदोष व्रत को भगवान शिव और माता पार्वती की कृपा प्राप्त करने का विशेष दिन माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन विधिपूर्वक पूजा करने से:
- जीवन में सुख-समृद्धि आती है
- मानसिक तनाव दूर होता है
- परिवार में शांति बनी रहती है
- आध्यात्मिक उन्नति होती है
पूजा विधि और नियम
प्रदोष व्रत के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करना चाहिए और व्रत का संकल्प लेना चाहिए।
- भगवान शिव का पंचामृत से अभिषेक करें
- भांग, धतूरा, चंदन और सफेद पुष्प अर्पित करें
- शिव मंत्रों का जाप और व्रत कथा का पाठ करें
- माता पार्वती की पूजा भी साथ में करें
- शाम के समय शिव आरती अवश्य करें
व्रत के दौरान ब्रह्मचर्य का पालन करना, क्रोध और विवाद से दूर रहना आवश्यक माना जाता है।
दान और पुण्य का महत्व
प्रदोष व्रत के दिन गरीबों को अन्न, वस्त्र और धन का दान करना अत्यंत शुभ माना जाता है। इससे पुण्य की प्राप्ति होती है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
निष्कर्ष
अप्रैल 2026 का प्रदोष व्रत भक्तों के लिए भगवान शिव की कृपा पाने का एक महत्वपूर्ण अवसर है। सही विधि और श्रद्धा के साथ किया गया यह व्रत जीवन में सुख, शांति और सफलता लेकर आता है।

