प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना में टीकमगढ़ को राष्ट्रीय सम्मान मिला। जानें गेहूं उत्पादन, जल संरक्षण, प्राकृतिक खेती और मत्स्य पालन में जिले की उपलब्धियां।
प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के तहत कृषि विकास और ग्रामीण आजीविका के क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन करने पर मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ जिले को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया गया है। जिले में कृषि उत्पादन बढ़ाने, फसल कटाई के बाद भंडारण सुविधाओं को मजबूत करने, जल संरक्षण और प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करने के प्रयासों को इस उपलब्धि का प्रमुख आधार माना गया है। नई दिल्ली के एनएएससी कॉम्प्लेक्स में आयोजित राष्ट्रीय समारोह में टीकमगढ़ के कलेक्टर विवेक श्रोत्रिय को जिले की उपलब्धियों के लिए सम्मान प्रदान किया गया।
योजना के एक वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम में देशभर में निर्धारित प्रदर्शन मानकों के आधार पर बेहतर काम करने वाले जिलों की उपलब्धियों को सराहा गया। मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ सहित उमरिया, सीधी, शहडोल और डिंडौरी जिलों को राष्ट्रीय पुरस्कार के लिए चुना गया।
कृषि विकास के लिए किए गए प्रयासों को मिली पहचान
प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना का मुख्य उद्देश्य कृषि उत्पादकता में सुधार करना, किसानों की आमदनी बढ़ाना, प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण करना और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार एवं आजीविका के अवसरों को मजबूत बनाना है।
टीकमगढ़ जिले में इन लक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए कृषि और ग्रामीण विकास से संबंधित गतिविधियों की नियमित समीक्षा की गई। सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन और निर्धारित प्रदर्शन संकेतकों के आधार पर हुई प्रगति ने जिले को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में योगदान दिया।
विशेष रूप से फसल कटाई के बाद भंडारण क्षमता बढ़ाने, कृषि उत्पादन में वृद्धि, जल संरक्षण, प्राकृतिक एवं जैविक खेती, मत्स्य पालन और सहकारिता के डिजिटलीकरण जैसे क्षेत्रों में किए गए कार्यों को महत्वपूर्ण माना गया।
राष्ट्रीय समारोह में जिले के पांच प्रतिनिधियों ने लिया हिस्सा
नई दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में टीकमगढ़ जिले से पांच प्रतिनिधियों को शामिल होने के लिए आमंत्रित किया गया था। इनमें कलेक्टर विवेक श्रोत्रिय, योजना की नोडल अधिकारी एवं डिप्टी कलेक्टर अंजली शर्मा, कृषि वैज्ञानिक डॉ. बी.एस. किरार, उपसंचालक कृषि मनोज कश्यप और प्रगतिशील किसान बालचंद्र अहिरवार शामिल थे।
इन प्रतिनिधियों की भागीदारी से जिले में कृषि विकास, वैज्ञानिक खेती और किसानों के हित में किए जा रहे प्रयासों को राष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत करने का अवसर मिला।
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गेहूं उत्पादन में बढ़ोतरी, रकबे में भी हुआ विस्तार
टीकमगढ़ जिले में कृषि उत्पादन बढ़ाने की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2023-24 में जिले का गेहूं उत्पादन 6.12 लाख मीट्रिक टन था, जो वर्ष 2025-26 में बढ़कर 6.92 लाख मीट्रिक टन हो गया।
इस अवधि में गेहूं की खेती का क्षेत्रफल भी बढ़ा। वर्ष 2023-24 में गेहूं का रकबा लगभग 2.08 लाख हेक्टेयर था, जो वर्ष 2025-26 में बढ़कर 2.22 लाख हेक्टेयर से अधिक हो गया।
खरीफ सीजन में जिले के किसानों ने 2,30,810 हेक्टेयर क्षेत्र में बुवाई की। यह निर्धारित लक्ष्य 2,30,800 हेक्टेयर से थोड़ा अधिक रहा। वहीं, उड़द की खेती के रकबे में 16.68 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
ये आंकड़े जिले में कृषि गतिविधियों के विस्तार और विभिन्न फसलों की खेती को बढ़ावा देने के प्रयासों को दर्शाते हैं।
जल संरक्षण के लिए 134 जल संग्रहण संरचनाओं का निर्माण
कृषि विकास के साथ जल संसाधनों का संरक्षण भी टीकमगढ़ जिले की प्रमुख उपलब्धियों में शामिल रहा। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, निर्धारित लक्ष्य के तहत 134 नए जल संग्रहण ढांचों का निर्माण पूरा किया गया।
इसके अतिरिक्त, वाटरशेड घटक के अंतर्गत 7,392 हेक्टेयर क्षेत्र में जल एवं मृदा संरक्षण से जुड़े कार्य किए गए। ऐसे प्रयासों से वर्षा जल का बेहतर उपयोग करने और कृषि के लिए उपलब्ध जल संसाधनों को सुरक्षित रखने में मदद मिल सकती है।
जिले में प्राकृतिक खेती को भी प्रोत्साहन दिया जा रहा है। वर्तमान आंकड़ों के मुताबिक, 5,225 किसान लगभग 2,090 हेक्टेयर क्षेत्र में प्राकृतिक खेती कर रहे हैं। वहीं, 1,983 किसान जैविक खेती से जुड़े हुए हैं।
प्राकृतिक और जैविक खेती को बढ़ावा देने का उद्देश्य टिकाऊ कृषि पद्धतियों को प्रोत्साहित करना और खेती में उपलब्ध संसाधनों के बेहतर प्रबंधन को बढ़ावा देना है।
मत्स्य पालन और सहकारिता के क्षेत्र में भी बेहतर प्रदर्शन
प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के तहत टीकमगढ़ ने मत्स्य पालन के क्षेत्र में भी निर्धारित लक्ष्य से अधिक प्रगति दर्ज की है। जिले में 461 इकाइयों के लक्ष्य के मुकाबले 529 इकाइयां दर्ज की गईं।
सहकारी संस्थाओं को आधुनिक बनाने की दिशा में जिले की सभी 64 प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों (PACS) का कंप्यूटरीकरण पूरा कर लिया गया है। इससे सहकारी सेवाओं के संचालन और किसानों तक सुविधाएं पहुंचाने की व्यवस्था को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।
इसके साथ ही, महिला किसान उत्पादक कंपनियों (FPOs) के माध्यम से 1,200 से अधिक महिलाओं को जोड़ने के प्रयास किए गए हैं। इस पहल का उद्देश्य महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ाना, आजीविका के अवसर विकसित करना और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने में सहयोग देना है।
किसानों और ग्रामीण परिवारों के लिए नए अवसर
टीकमगढ़ को मिला राष्ट्रीय सम्मान जिले में कृषि उत्पादन, जल संरक्षण, प्राकृतिक खेती और ग्रामीण विकास से संबंधित कार्यों की उपलब्धियों को रेखांकित करता है।
गेहूं उत्पादन में वृद्धि, जल संग्रहण संरचनाओं का निर्माण, मत्स्य पालन का विस्तार और सहकारी समितियों का डिजिटलीकरण जैसे प्रयास ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में उपयोगी हो सकते हैं।
प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के तहत विभिन्न क्षेत्रों में किए जा रहे समन्वित प्रयासों से किसानों को बेहतर कृषि सुविधाएं उपलब्ध कराने, प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण करने और ग्रामीण परिवारों के लिए आजीविका के नए अवसर विकसित करने की दिशा में काम किया जा रहा है।
टीकमगढ़ की उपलब्धि अन्य जिलों के लिए भी उपयोगी उदाहरण बन सकती है, जहां कृषि उत्पादन बढ़ाने के साथ टिकाऊ खेती और ग्रामीण विकास को प्राथमिकता दी जा रही है।

