प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के तहत डिंडोरी को फसल विविधीकरण और सतत खेती के लिए राष्ट्रीय सम्मान मिला। जानें कोदो-कुटकी और महिला किसानों की भूमिका।
प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना (PM-DDKY) के तहत मध्य प्रदेश के डिंडोरी जिले ने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई है। जिले को फसल विविधीकरण और टिकाऊ कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्यों तथा नवाचारों के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। नई दिल्ली स्थित पूसा भवन में आयोजित कार्यक्रम में केंद्रीय कृषि मंत्री ने जिले को यह सम्मान प्रदान किया।
इस समारोह में डिंडोरी की कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी अंजू पवन भदौरिया और अमरपुर विकासखंड के अलोनी गांव की महिला किसान एवं कृषि सखी कमला यादव भी उपस्थित रहीं। उनकी सहभागिता ने कृषि विकास में महिला किसानों की भूमिका और गांवों में किए जा रहे नवाचारों के महत्व को सामने रखा।
फसल विविधीकरण के प्रयासों को मिली राष्ट्रीय पहचान
डिंडोरी जिले को मिला यह सम्मान कृषि क्षेत्र में अपनाई जा रही उन पहलों की पहचान है, जिनका उद्देश्य किसानों को पारंपरिक खेती के साथ दूसरी फसलों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना है। फसल विविधीकरण के माध्यम से किसानों की एक ही फसल पर निर्भरता कम करने और खेती से जुड़े जोखिमों को घटाने का प्रयास किया जा रहा है।
इसके अंतर्गत दलहन, तिलहन, मोटे अनाज और बागवानी फसलों को बढ़ावा देने पर जोर दिया जा रहा है। स्थानीय जलवायु, मिट्टी की प्रकृति और उपलब्ध संसाधनों के अनुसार फसलों का चयन करने से किसानों को खेती की बेहतर योजना बनाने में मदद मिल सकती है।
इस तरह की पहल का लक्ष्य कृषि उत्पादन को अधिक टिकाऊ बनाना और किसानों की आय के अवसरों को मजबूत करना है।
सतत खेती से मिट्टी और जल संसाधनों के संरक्षण पर जोर
फसल विविधीकरण के साथ-साथ डिंडोरी में टिकाऊ कृषि पद्धतियों को प्रोत्साहित करने पर भी ध्यान दिया जा रहा है। इसका उद्देश्य खेती के दौरान प्राकृतिक संसाधनों का जिम्मेदारी से उपयोग करना और मिट्टी की गुणवत्ता को बनाए रखना है।
सतत कृषि के अंतर्गत फसल चक्र अपनाने, जल संरक्षण, मृदा स्वास्थ्य सुधार, जैविक एवं प्राकृतिक खेती और पर्यावरण के अनुकूल कृषि तकनीकों को महत्व दिया जाता है।
इन तरीकों को अपनाने से किसानों को लंबे समय तक खेती योग्य भूमि की उत्पादकता बनाए रखने में मदद मिल सकती है। साथ ही, स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार कृषि पद्धतियों में बदलाव करके खेती की लागत और मौसम संबंधी जोखिमों को कम करने की संभावनाएं भी बढ़ती हैं।
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कोदो-कुटकी जैसी पारंपरिक फसलों को मिल रहा बढ़ावा
आदिवासी बहुल डिंडोरी जिले की कृषि व्यवस्था में स्थानीय परिस्थितियों के अनुकूल फसलों का विशेष महत्व है। यहां कोदो और कुटकी जैसे मोटे अनाज के साथ दलहन तथा अन्य उपयुक्त फसलों को बढ़ावा देने के प्रयास किए जा रहे हैं।
स्थानीय कृषि ज्ञान और पारंपरिक फसल प्रणालियों को आधुनिक कृषि पद्धतियों के साथ जोड़ना जिले के किसानों के लिए उपयोगी साबित हो सकता है। इससे फसल उत्पादन में विविधता लाने और किसी एक फसल पर निर्भरता कम करने में सहायता मिलती है।
कोदो-कुटकी जैसे मोटे अनाज को प्रोत्साहन देना स्थानीय कृषि परंपराओं को संरक्षित करने के साथ-साथ टिकाऊ खेती की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है।
कृषि विकास में महिला किसानों और कृषि सखियों की अहम भूमिका
डिंडोरी को मिले राष्ट्रीय सम्मान में महिला किसान कमला यादव की मौजूदगी ने कृषि क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी को भी रेखांकित किया। ग्रामीण क्षेत्रों में महिला किसान खेती, फसल प्रबंधन और कृषि संबंधी गतिविधियों में महत्वपूर्ण योगदान देती हैं।
कृषि सखियां किसानों तक उपयोगी कृषि जानकारी पहुंचाने, नई पद्धतियों के प्रति जागरूकता बढ़ाने और गांवों में कृषि संबंधी पहलों को आगे बढ़ाने में मदद कर सकती हैं।
महिलाओं की सक्रिय भागीदारी से कृषि नवाचारों को जमीनी स्तर तक पहुंचाने और स्थानीय किसानों को नई तकनीकों तथा टिकाऊ कृषि पद्धतियों से जोड़ने के अवसर बढ़ते हैं।
किसानों की आय बढ़ाने और कृषि लागत घटाने की पहल
फसल विविधीकरण और सतत कृषि का एक प्रमुख उद्देश्य किसानों को खेती के बेहतर विकल्प उपलब्ध कराना है। यदि किसान स्थानीय मिट्टी, जलवायु और पानी की उपलब्धता के अनुसार अलग-अलग फसलों को अपनाते हैं, तो एक ही फसल पर निर्भरता से उत्पन्न जोखिम कम करने में मदद मिल सकती है।
दलहन, तिलहन, मोटे अनाज और बागवानी फसलों को प्रोत्साहन देने से कृषि उत्पादन में विविधता लाई जा सकती है। वहीं, जल संरक्षण, फसल चक्र और मृदा स्वास्थ्य पर ध्यान देने से प्राकृतिक संसाधनों का बेहतर प्रबंधन संभव हो सकता है।
इन प्रयासों की सफलता के लिए किसानों को उपयुक्त प्रशिक्षण, कृषि संबंधी तकनीकी मार्गदर्शन और बाजार तक बेहतर पहुंच उपलब्ध कराना भी महत्वपूर्ण है।
प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के तहत डिंडोरी की बड़ी उपलब्धि
प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना का उद्देश्य कृषि विकास को गति देना और कृषि क्षेत्र में सुधार की संभावनाओं को मजबूत करना है। डिंडोरी जिले को मिला यह सम्मान स्थानीय स्तर पर किए जा रहे कृषि नवाचारों, किसानों की भागीदारी और जिला प्रशासन तथा कृषि विभाग के समन्वित प्रयासों को मिली पहचान के रूप में देखा जा रहा है।
यह उपलब्धि जिले के किसानों को टिकाऊ खेती, फसल विविधीकरण और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण से जुड़ी पहलों को आगे बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित कर सकती है।

