बुरहानपुर की शाहपुर नगर परिषद कचरे से जैविक खाद बना रही है। जानें खाद बनाने की प्रक्रिया, 50 किलो बैग की कीमत और कचरा प्रबंधन की पहल।
मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले की नगर परिषद शाहपुर ने कचरा प्रबंधन को उपयोगी संसाधन में बदलने की दिशा में पहल की है। यहां घरों, दुकानों, होटलों और सब्जी मंडी से निकलने वाले जैविक कचरे से खाद तैयार की जा रही है। इस व्यवस्था से शहर की स्वच्छता बनाए रखने के साथ कचरे का पुनः उपयोग भी सुनिश्चित किया जा रहा है। नगर परिषद द्वारा तैयार जैविक खाद किसानों और आम नागरिकों को 4 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से उपलब्ध कराई जा रही है।
15 वार्डों में कचरा संग्रहण की व्यवस्थित व्यवस्था
नगर परिषद शाहपुर में प्रतिदिन सुबह सफाई अभियान शुरू होता है। इसके लिए 60 सफाई मित्र और 10 वाहन चालक अपनी जिम्मेदारी संभालते हैं। निर्धारित रूट चार्ट के अनुसार नौ कचरा संग्रहण वाहन शहर के 15 वार्डों में भेजे जाते हैं।
ये वाहन घरों, दुकानों, होटलों और सब्जी मंडी से कचरा एकत्रित करके निर्धारित स्थल तक पहुंचाते हैं। कचरे के बेहतर प्रबंधन में स्थानीय नागरिकों की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। गीले और सूखे कचरे को अलग-अलग डिब्बों में रखने से उसके निपटान और पुनर्चक्रण की प्रक्रिया आसान होती है। इसके लिए गीले कचरे को हरे और सूखे कचरे को नीले डिब्बे में डालने की व्यवस्था अपनाई जाती है।
सूखे कचरे को रीसाइक्लिंग के लिए भेजा जाता है
शहर के विभिन्न हिस्सों से इकट्ठा किया गया कचरा ट्रेचिंग ग्राउंड में पहुंचाया जाता है। यहां निर्धारित प्लेटफॉर्म और शेड में कचरे को अलग-अलग श्रेणियों में छांटा जाता है। इस कार्य में लगे सफाई मित्र दस्ताने और मास्क जैसे सुरक्षा उपकरणों का उपयोग करते हैं।
प्लास्टिक, कागज, गत्ता, कांच, धातु और कपड़े जैसी पुनर्चक्रण योग्य वस्तुओं को अलग करके गठानों में तैयार किया जाता है। इसके बाद इन्हें रीसाइक्लिंग के लिए भेज दिया जाता है।
वहीं, फल-सब्जियों के छिलके, फूल, चायपत्ती और बचा हुआ भोजन जैसे जैविक अपशिष्ट को अलग रखा जाता है। इसी सामग्री का इस्तेमाल जैविक खाद तैयार करने में किया जाता है।
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लगभग 45 दिनों में तैयार होती है जैविक खाद
नगर परिषद शाहपुर में जैविक कचरे को कम्पोस्ट शेड में निर्धारित स्थान पर विंडरो पद्धति से रखा जाता है। खाद बनाने की प्रक्रिया को गति देने के लिए इसमें सूक्ष्मजीव कल्चर के रूप में छाछ और गुड़ के पानी का छिड़काव किया जाता है।
कचरे को समय-समय पर पलटने के साथ उसकी नमी और तापमान पर भी निगरानी रखी जाती है। निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार लगभग 45 दिनों में खाद तैयार हो जाती है।
इसके बाद तैयार खाद को छलनी मशीन से छाना जाता है, जिससे बारीक खाद और मोटे अवशेष अलग हो जाते हैं। मोटे अंश को दोबारा कम्पोस्टिंग प्रक्रिया में शामिल कर लिया जाता है। इस तरह जैविक कचरे का उपयोग करके खाद तैयार की जाती है और अनुपयोगी समझे जाने वाले अपशिष्ट को संसाधन में बदला जाता है।
50 किलो जैविक खाद का बैग ₹200 में उपलब्ध
खाद तैयार होने के बाद उसकी तौल और पैकिंग की जाती है। पैकेट पर ‘जैविक खाद-नगर परिषद शाहपुर’ का लेबल लगाया जाता है। नगर परिषद के अनुसार, यह खाद किसानों, नर्सरियों, उद्यानों और आम नागरिकों को 4 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से उपलब्ध कराई जाती है।
इस हिसाब से 50 किलोग्राम खाद के एक बैग की कीमत 200 रुपये निर्धारित है। किसान और बागवानी से जुड़े लोग अपनी जरूरत के अनुसार इस खाद को खरीद सकते हैं।
खाद की बिक्री से नगर विकास को मिलेगा सहयोग
नगर परिषद शाहपुर की इस पहल से कचरे के प्रबंधन के साथ जैविक खाद की उपलब्धता भी बढ़ रही है। खाद की बिक्री से प्राप्त राशि का उपयोग नगर परिषद द्वारा शहर के विकास कार्यों और नागरिकों को बेहतर बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए किया जाता है।
यह पहल स्थानीय स्तर पर कचरे के पृथक्करण, पुनर्चक्रण और जैविक अपशिष्ट के उपयोग को बढ़ावा देने का उदाहरण है। यदि नागरिक भी गीले और सूखे कचरे को अलग-अलग रखने में सहयोग करें, तो ऐसी व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।
शाहपुर नगर परिषद की यह कोशिश स्वच्छता और संसाधनों के बेहतर उपयोग को जोड़ती है। कचरे से खाद तैयार करने की प्रक्रिया न केवल अपशिष्ट प्रबंधन में मदद करती है, बल्कि किसानों और बागवानी करने वाले लोगों के लिए भी एक उपयोगी विकल्प उपलब्ध कराती है।

