नो स्मोकिंग डे पर स्वास्थ्य हरियाणा के निदेशक डॉ. ब्रह्मदीप ने बताया कि भारत में हर साल लगभग 10 लाख लोगों की मौत तंबाकू से जुड़ी बीमारियों से होती है और 27% कैंसर सीधे तंबाकू सेवन से जुड़े हैं।
“नो स्मोकिंग डे” के अवसर पर स्वास्थ्य हरियाणा के निदेशक एवं वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉ. ब्रह्मदीप ने लोगों से तंबाकू और धूम्रपान से दूर रहने की अपील की है। उन्होंने कहा कि धूम्रपान और तंबाकू का सेवन दुनिया भर में रोकी जा सकने वाली बीमारियों और मौतों के प्रमुख कारणों में शामिल है।
डॉ. ब्रह्मदीप के अनुसार विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के आंकड़ों के मुताबिक दुनिया में हर वर्ष लगभग 80 लाख लोगों की मृत्यु तंबाकू के कारण होती है, जबकि भारत में ही हर साल करीब 10 लाख लोगों की मौत तंबाकू से जुड़ी बीमारियों के कारण हो जाती है। उन्होंने बताया कि भारत में होने वाले लगभग 27 प्रतिशत कैंसर सीधे तंबाकू सेवन से जुड़े पाए जाते हैं।
उन्होंने कहा कि तंबाकू के सेवन से फेफड़ों का कैंसर, मुंह और गले का कैंसर, हृदय रोग, स्ट्रोक, क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (COPD) और अस्थमा जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। इसके अलावा गर्भवती महिलाओं में तंबाकू का सेवन गर्भावस्था से जुड़ी जटिलताओं को भी बढ़ा सकता है।
डॉ. ब्रह्मदीप ने बताया कि धूम्रपान करने वाले व्यक्तियों में हृदय रोग का खतरा 2 से 4 गुना तक बढ़ जाता है, जबकि फेफड़ों के कैंसर का खतरा 20 से 25 गुना तक बढ़ सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि तंबाकू का धुआं केवल धूम्रपान करने वाले व्यक्ति को ही नुकसान नहीं पहुंचाता, बल्कि उसके आसपास मौजूद लोगों—विशेषकर बच्चों और महिलाओं—के स्वास्थ्य पर भी गंभीर प्रभाव डालता है।
उन्होंने बताया कि यदि कोई व्यक्ति धूम्रपान छोड़ देता है तो शरीर में सकारात्मक बदलाव बहुत जल्दी दिखाई देने लगते हैं। धूम्रपान छोड़ने के 20 मिनट के भीतर रक्तचाप और नाड़ी सामान्य होने लगती है, 12 घंटे के भीतर रक्त में कार्बन मोनोऑक्साइड का स्तर सामान्य हो जाता है। वहीं 2 से 12 सप्ताह के भीतर फेफड़ों की कार्यक्षमता और रक्त संचार में सुधार होने लगता है। एक वर्ष बाद हृदय रोग का खतरा लगभग 50 प्रतिशत तक कम हो जाता है, जबकि 10 वर्ष बाद फेफड़ों के कैंसर का खतरा लगभग आधा रह जाता है।
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डॉ. ब्रह्मदीप ने बताया कि हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के मार्गदर्शन में प्रदेश के सभी सिविल अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में तंबाकू निषेध (Tobacco Cessation) केंद्र स्थापित किए गए हैं। इन केंद्रों पर प्रशिक्षित डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ धूम्रपान छोड़ने के इच्छुक लोगों को परामर्श, उपचार और आवश्यक मार्गदर्शन प्रदान करते हैं।
उन्होंने धूम्रपान छोड़ने के इच्छुक लोगों को सलाह दी कि वे एक निश्चित तिथि तय कर दृढ़ संकल्प लें, सिगरेट और तंबाकू उत्पादों को अपने आसपास न रखें, इच्छा होने पर गहरी सांस लें या पानी पिएं और अपने ध्यान को किसी अन्य गतिविधि में लगाएं। इसके अलावा परिवार और मित्रों का सहयोग लेना तथा आवश्यकता पड़ने पर डॉक्टर या तंबाकू निषेध केंद्र से परामर्श लेना भी लाभदायक होता है।
डॉ. ब्रह्मदीप ने लोगों से नियमित व्यायाम, योग और संतुलित जीवनशैली अपनाने की भी सलाह दी। उन्होंने सभी नागरिकों से अपील की कि वे तंबाकू से दूर रहकर स्वस्थ जीवन अपनाएं और दूसरों को भी इसके प्रति जागरूक करें, ताकि समाज को तंबाकू मुक्त और स्वस्थ बनाया जा सके।

