नवरात्रि के बाद अखंड ज्योत विसर्जन कैसे करें, जानें सही नियम, पूजा विधि और बचा घी-तेल उपयोग करने का तरीका।
चैत्र नवरात्रि 2026 के समापन के साथ ही भक्तों के मन में एक महत्वपूर्ण सवाल उठता है—अखंड ज्योत का विसर्जन कैसे करें? धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नवरात्रि के दौरान जलने वाली अखंड ज्योत माता दुर्गा की उपस्थिति और कृपा का प्रतीक होती है, इसलिए इसका विसर्जन भी विधि-विधान से करना बेहद जरूरी माना जाता है।
अखंड ज्योत का धार्मिक महत्व
नवरात्रि में जलाई गई अखंड ज्योत सिर्फ एक दीपक नहीं, बल्कि आस्था, ऊर्जा और सकारात्मकता का प्रतीक होती है।
- यह घर में सुख-शांति और समृद्धि का संकेत देती है
- जीवन में अंधकार को दूर कर ज्ञान का प्रकाश फैलाती है
- भक्तों को मानसिक शक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा प्रदान करती है
कब करें अखंड ज्योत का विसर्जन?
धार्मिक मान्यता के अनुसार:
- अखंड ज्योत का विसर्जन नवमी या दशमी (दशहरा) के दिन किया जाता है
- इस दौरान पूजा समाप्ति के बाद दीपक को स्वयं शांत होने दिया जाता है
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अखंड ज्योत विसर्जन के सही नियम
नवरात्रि के बाद इन नियमों का पालन करना शुभ माना जाता है:
- दीपक को फूंक मारकर या हाथ से कभी न बुझाएं
- ज्योत के शांत होने के बाद बाती और घी/तेल अलग करें
- बची हुई बाती को पवित्र स्थान जैसे नदी, तालाब या पीपल/बरगद के नीचे विसर्जित करें
- मिट्टी के दीपक को स्वच्छ स्थान पर मिट्टी में दबा दें
- तांबे या पीतल के दीपक को साफ करके सुरक्षित रखें
- विसर्जन से पहले माता दुर्गा से क्षमा प्रार्थना करें
बचा हुआ घी या तेल कैसे करें उपयोग?
नवरात्रि के बाद बचे घी/तेल को फेंकना अशुभ माना जाता है:
- इसे घर के अन्य दीपकों में उपयोग कर सकते हैं
- रोज पूजा में इस्तेमाल करना शुभ माना जाता है
- यह सकारात्मक ऊर्जा को बनाए रखने में सहायक होता है
कलश और पूजा स्थान के नियम
- कलश को हटाने से पहले उसे हल्का हिलाकर स्थान परिवर्तन का संकेत दें
- पूजा चौकी को साफ कर सम्मानपूर्वक हटाएं
- पूजा स्थल को स्वच्छ रखना आवश्यक है
निष्कर्ष
नवरात्रि के बाद अखंड ज्योत का विसर्जन केवल एक प्रक्रिया नहीं, बल्कि श्रद्धा और आस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। सही विधि और नियमों का पालन करके भक्त माता दुर्गा की कृपा प्राप्त कर सकते हैं और अपने जीवन में सकारात्मक ऊर्जा बनाए रख सकते हैं।

