मोना सिंह ने कहा कि ऑथेंटिक रोल्स और एंटी-डीवा अप्रोच ने उन्हें 20 साल तक दर्शकों का भरोसा दिलाया।
बॉलीवुड और टीवी इंडस्ट्री की जानी-मानी अभिनेत्री मोना सिंह ने अपने दो दशक लंबे करियर की सफलता का राज साझा करते हुए कहा कि दर्शकों का भरोसा उन्होंने ग्लैमर नहीं, बल्कि ईमानदार और ऑथेंटिक किरदारों के जरिए जीता है।
‘एंटी-डीवा’ अप्रोच बनी पहचान
इंडिया टुडे कॉन्क्लेव में बातचीत के दौरान मोना सिंह ने कहा कि वह हमेशा स्क्रीन पर “एंटी-डीवा” अप्रोच अपनाती रही हैं।
उन्होंने कहा,
“मैं अपने किरदार के लिए रॉ, थकी हुई या बिना ग्लैमर के दिखने को तैयार रहती हूं। जो भी कैरेक्टर की मांग होती है, वही करती हूं।”
उनके अनुसार यही ईमानदारी दर्शकों के दिल तक सीधा असर करती है और उन्हें अलग पहचान दिलाती है।
‘मोना का मैजिक’ कैसे बना भरोसे का नाम
मोना सिंह ने बताया कि “Mona Ka Magic” जैसा शब्द यूं ही नहीं बना, बल्कि यह उनके वर्षों की मेहनत और सोच-समझकर चुने गए किरदारों का नतीजा है। उन्होंने कहा कि पिछले 20 सालों में उन्होंने दर्शकों के साथ एक भरोसे का रिश्ता बनाया है, जो केवल अभिनय की सच्चाई से संभव हुआ।
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अलग तरह की कहानियों का चुनाव
मोना सिंह ने यह भी बताया कि वह हमेशा ऐसे प्रोजेक्ट्स चुनती हैं जो सिर्फ कमर्शियल ही नहीं बल्कि सोचने पर मजबूर करने वाले भी हों।
उनके मुताबिक,
- उनकी फिल्मों और सीरीज में मनोरंजन के साथ संदेश भी होता है
- वह ऐसी कहानियों का हिस्सा बनना पसंद करती हैं जो दर्शकों के बीच चर्चा पैदा करें
आने वाले प्रोजेक्ट्स पर नजर
मोना सिंह जल्द ही कई बड़े प्रोजेक्ट्स में नजर आने वाली हैं, जिनमें:
- Happy Patel
- Border 2
- Kohrra Season 2
- Subedaar
इन सभी प्रोजेक्ट्स में भी वह किरदार-प्रधान भूमिकाओं पर फोकस करती नजर आएंगी।
निष्कर्ष
मोना सिंह का मानना है कि इंडस्ट्री में टिके रहने के लिए केवल ग्लैमर नहीं, बल्कि ईमानदार अभिनय और सही कहानी का चुनाव सबसे जरूरी है। उनकी “एंटी-डीवा” सोच ने ही उन्हें दर्शकों के बीच एक भरोसेमंद कलाकार के रूप में स्थापित किया है।

