हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि सर्वे में दिख रहा जनसमर्थन मान सरकार के प्रदर्शन की पुष्टि करता है और 2027 में विपक्ष की हार तय है।
हरपाल सिंह चीमा ने हालिया सर्वेक्षणों में उभरकर सामने आए जनसमर्थन को भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली सरकार की नीतियों पर जनता की “बड़ी मुहर” बताया है। उन्होंने कहा कि पंजाब में विभिन्न एजेंसियों और संगठनों द्वारा किए गए सर्वे केवल आंकड़े नहीं हैं, बल्कि वे राज्य की जनता की वास्तविक भावना और भरोसे को दर्शाते हैं।
वित्त मंत्री चीमा ने कहा कि मान सरकार का प्रदर्शन पिछले कुछ वर्षों में हर क्षेत्र में स्पष्ट रूप से दिखाई दिया है। उन्होंने दावा किया कि मुफ्त बिजली, बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं, मोहल्ला क्लीनिक, शिक्षा क्षेत्र में सुधार और युवाओं को पारदर्शी तरीके से नौकरियां देने जैसे कदमों ने जनता का विश्वास मजबूत किया है। उनके अनुसार, सरकार ने प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही को प्राथमिकता देते हुए एक ऐसा मॉडल पेश किया है, जिसे अब अन्य राज्य भी अपनाने की दिशा में सोच रहे हैं।
उन्होंने विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए कहा कि जिन पार्टियों ने वर्षों तक सत्ता में रहते हुए राज्य के संसाधनों का दुरुपयोग किया, वे आज जनता के सामने कोई ठोस मुद्दा पेश करने में असफल हैं। चीमा ने कहा कि वर्तमान सरकार के कामकाज से घबराए विपक्षी नेता केवल बयानबाजी और भ्रामक प्रचार का सहारा ले रहे हैं, लेकिन पंजाब की जागरूक जनता अब इन तरीकों को समझ चुकी है।
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2027 के विधानसभा चुनावों को लेकर वित्त मंत्री ने स्पष्ट रूप से कहा कि यह चुनाव अब केवल औपचारिकता बनकर रह जाएगा। उनके अनुसार, जनता पहले ही अपना मन बना चुकी है और आने वाले चुनावों में एक बार फिर आम आदमी पार्टी को भारी बहुमत देने के लिए तैयार है। उन्होंने विश्वास जताया कि सरकार की जन-केंद्रित नीतियां और विकास कार्य विपक्ष के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनेंगे।
चीमा ने यह भी कहा कि राज्य की आर्थिक स्थिति में सुधार और राजस्व संग्रह में बढ़ोतरी ने विकास कार्यों को गति दी है। उन्होंने दावा किया कि जहां पहले खजाना खाली होने की बात कही जाती थी, वहीं अब वित्तीय अनुशासन और बेहतर प्रबंधन के कारण पंजाब नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि हालिया सर्वेक्षणों के नतीजे राज्य की बदलती राजनीतिक दिशा का संकेत दे सकते हैं, हालांकि अंतिम निर्णय चुनाव परिणामों से ही स्पष्ट होगा। इसके बावजूद, सरकार और विपक्ष के बीच बढ़ती बयानबाजी ने आने वाले चुनावी माहौल को पहले से ही गरमा दिया है।
इस पूरे घटनाक्रम ने यह साफ कर दिया है कि पंजाब की राजनीति अब विकास, पारदर्शिता और जनहित के मुद्दों के इर्द-गिर्द केंद्रित होती जा रही है, जहां जनता की भूमिका पहले से कहीं अधिक निर्णायक बन चुकी है।

