कर्नाटक सूखा राहत योजना: कर्नाटक के 217 सूखाग्रस्त तालुकों में किसानों को राहत देने की तैयारी। सरकार ने पहली किस्त जारी करने और कृषि ऋण में मोहलत देने का फैसला किया।
कर्नाटक सूखा राहत योजना: सूखे की मार झेल रहे किसानों को आर्थिक राहत देने के लिए कर्नाटक सरकार ने सहायता राशि की पहली किस्त जारी करने की प्रक्रिया शुरू करने का निर्णय लिया है। उप मुख्यमंत्री एवं राजस्व मंत्री जी. परमेश्वर के अनुसार, इस संबंध में सरकारी आदेश जारी किया जा चुका है। जिला उपायुक्तों को प्रभावित किसानों तक राहत राशि जल्द पहुंचाने के निर्देश दिए जाएंगे।
राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि किसानों को शुरुआती सहायता देने के लिए केंद्र सरकार से मिलने वाली राशि का इंतजार नहीं किया जाएगा। पहली किस्त राज्य के अपने संसाधनों से उपलब्ध कराई जाएगी। केंद्र के राहत मानकों के अनुसार, प्रभावित किसानों के लिए प्रति हेक्टेयर 8,500 रुपये तक की सहायता का प्रावधान बताया गया है।
कर्नाटक के 217 तालुक सूखाग्रस्त घोषित
राज्य में बारिश की कमी और फसलों को हुए नुकसान को देखते हुए अब तक 217 तालुकों को सूखाग्रस्त घोषित किया जा चुका है। कर्नाटक में कुल लगभग 240 तालुक हैं। शेष 23 तालुकों में स्थिति का आकलन करने के लिए मैदानी जांच की जा रही है। अधिकारियों के अनुसार, जांच के बाद 10 से 15 अतिरिक्त तालुकों को भी सूखाग्रस्त सूची में शामिल किया जा सकता है।
इससे पहले 25 सितंबर को विधानसभा में राहत की घोषणा के समय 177 तालुकों को सूखा प्रभावित बताया गया था। उस समय करीब 46 से 50 लाख किसानों को प्रति किसान 2,500 रुपये की एकमुश्त इनपुट सब्सिडी देने की बात कही गई थी।
अब प्रभावित क्षेत्रों की संख्या बढ़ने के साथ राहत वितरण की प्रक्रिया को गति देने पर जोर दिया जा रहा है। सरकार के अनुमान के मुताबिक, सूखे के कारण राज्य की लगभग 90 प्रतिशत फसलें प्रभावित हुई हैं। कई सिंचित क्षेत्रों में भी फसलों को नुकसान पहुंचा है। कुल आर्थिक क्षति का अनुमान लगभग 46,000 करोड़ रुपये लगाया गया है।
केंद्र सरकार से 11,500 करोड़ रुपये तक की सहायता मांगी
सूखा प्रभावित किसानों को राहत देने के लिए कर्नाटक सरकार ने केंद्र सरकार के सामने आर्थिक सहायता की मांग रखी है। राज्य की ओर से दो अलग-अलग ज्ञापन सौंपकर लगभग 11,000 से 11,500 करोड़ रुपये की सहायता मांगी गई है।
हालांकि, उपलब्ध जानकारी के अनुसार, केंद्र की ओर से अभी तक सहायता राशि जारी नहीं की गई है। इसी वजह से राज्य सरकार ने अपने संसाधनों से पहली किस्त देने का निर्णय लिया है, ताकि प्रभावित किसानों को तत्काल आर्थिक मदद मिल सके।
राहत राशि का समय पर वितरण विशेष रूप से उन किसानों के लिए महत्वपूर्ण है, जिन्हें अगली फसल की बुवाई के लिए बीज, खाद और अन्य कृषि सामग्री खरीदनी है।
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किसानों के कृषि ऋण की वसूली पर राहत
सूखे से प्रभावित किसानों पर आर्थिक दबाव कम करने के लिए राज्य सरकार ने बैंकों को कृषि ऋण की वसूली स्थगित करने और ऋण पुनर्गठन की संभावनाओं पर काम करने के निर्देश दिए हैं।
प्रस्तावित राहत व्यवस्था के अनुसार, सूखे से अधिक प्रभावित तालुकों में कृषि ऋण की वसूली के लिए 60 महीने तक की मोहलत देने का प्रावधान बताया गया है। मध्यम स्तर पर प्रभावित क्षेत्रों के लिए यह अवधि 36 महीने और अन्य संबंधित क्षेत्रों के लिए 12 महीने रखी गई है।
इस कदम का उद्देश्य किसानों को तत्काल ऋण चुकाने के दबाव से राहत देना और उन्हें खेती की अगली तैयारी के लिए समय उपलब्ध कराना है।
कर्जमाफी और ब्याज माफी जैसी मांगों पर राज्य सरकार बाद में अलग से समीक्षा करेगी। फिलहाल राहत राशि वितरण, ऋण वसूली में मोहलत और प्रभावित किसानों की जरूरतों को प्राथमिकता दी जा रही है।
बारिश की कमी से खेती और सिंचाई पर गहरा असर
कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष कर्नाटक में औसत वर्षा में लगभग 36 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। इसका सबसे अधिक असर उत्तर और मध्य कर्नाटक के कई जिलों में देखने को मिला है।
बारिश कम होने के कारण अनेक क्षेत्रों में बोरवेल और तालाबों का जलस्तर घट गया है। इससे वर्षा आधारित खेती के साथ सिंचाई पर निर्भर फसलों को भी नुकसान पहुंचा है।
कृषि उत्पादन प्रभावित होने से किसानों की आय पर दबाव बढ़ा है। ऐसे में आर्थिक सहायता के साथ-साथ जल संसाधनों का प्रबंधन और अगली फसल के लिए समय पर कृषि सामग्री उपलब्ध कराना भी जरूरी हो गया है।
पेयजल संकट से निपटने के लिए 117 करोड़ रुपये जारी
सूखे की स्थिति से निपटने के लिए कर्नाटक सरकार ने पेयजल व्यवस्था को मजबूत करने के उद्देश्य से 117 करोड़ रुपये जारी किए हैं। इसके अलावा विधायकों के माध्यम से 189 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राहत उपलब्ध कराने की जानकारी भी दी गई है।
इन प्रयासों का उद्देश्य सूखा प्रभावित इलाकों में लोगों की बुनियादी जरूरतों को पूरा करना और पानी की कमी से पैदा होने वाली समस्याओं को कम करना है।
आने वाले दिनों में राहत पैकेज के अंतर्गत पशुपालन और चारे से संबंधित सहायता को भी शामिल किए जाने की संभावना है। इससे उन ग्रामीण परिवारों को मदद मिल सकती है, जिनकी आजीविका खेती के साथ पशुपालन पर भी निर्भर है।
रबी की बुवाई से पहले राहत राशि का इंतजार
कर्नाटक में रबी सीजन की तैयारियों के बीच किसानों को राहत राशि मिलने की उम्मीद है। किसान संगठनों का कहना है कि सहायता जल्द खातों में पहुंचनी चाहिए, ताकि किसान समय पर बीज, उर्वरक और अन्य आवश्यक कृषि संसाधनों की व्यवस्था कर सकें।
सरकार के सामने अब प्रमुख चुनौती सभी पात्र किसानों की पहचान कर सहायता राशि का पारदर्शी और समयबद्ध वितरण सुनिश्चित करना है। साथ ही ऋण पुनर्गठन और पेयजल जैसी समस्याओं के समाधान पर भी ध्यान देना होगा।
राज्य सरकार द्वारा अपने संसाधनों से पहली किस्त जारी करने का निर्णय सूखा प्रभावित किसानों को तत्काल राहत देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। हालांकि, किसानों को मिलने वाली वास्तविक सहायता और भुगतान की तारीख संबंधित सरकारी आदेशों एवं पात्रता नियमों पर निर्भर करेगी।

