जयपुर में पश्चिमी क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन में किसानों की आय बढ़ाने, नवाचार और आधुनिक तकनीकों पर व्यापक मंथन हुआ।
राजस्थान की राजधानी जयपुर में होटल मैरियट में आयोजित पश्चिमी क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन ने देश के कृषि क्षेत्र में नवाचार और विकास की दिशा में एक अहम कदम साबित किया। इस सम्मेलन का आयोजन कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा किया गया, जिसमें विभिन्न राज्यों के कृषि मंत्रियों और नीति निर्माताओं ने भाग लेकर किसानों के भविष्य को लेकर व्यापक चर्चा की।
कार्यक्रम के उद्घाटन अवसर पर वक्ताओं ने नरेंद्र मोदी के ‘सशक्त किसान, समृद्ध भारत’ के विजन को दोहराते हुए कहा कि केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर कृषि क्षेत्र को आधुनिक और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में लगातार कार्य कर रही हैं।
इस महत्वपूर्ण सम्मेलन में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान, राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी सहित राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और गोवा के कृषि मंत्रियों ने हिस्सा लिया। सभी ने मिलकर ‘अन्नदाता’ किसानों के सर्वांगीण विकास, आय वृद्धि और कृषि क्षेत्र में तकनीकी सुधारों पर विस्तार से मंथन किया।
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सम्मेलन में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि बदलते समय के साथ कृषि में आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल बेहद जरूरी है। ड्रोन तकनीक, स्मार्ट सिंचाई प्रणाली, जैविक खेती और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से किसानों को अधिक उत्पादक और आत्मनिर्भर बनाया जा सकता है।
वक्ताओं ने यह भी कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल उत्पादन बढ़ाना नहीं, बल्कि किसानों की आय को स्थायी रूप से बढ़ाना है। इसके लिए बाजार तक बेहतर पहुंच, फसल के उचित दाम, भंडारण सुविधाएं और कृषि आधारित उद्योगों को बढ़ावा देना आवश्यक है।
इसके साथ ही जल संरक्षण, जलवायु परिवर्तन और सतत कृषि पद्धतियों पर भी विशेष चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने सुझाव दिया कि आने वाले समय में खेती को पर्यावरण के अनुकूल बनाना और प्राकृतिक संसाधनों का संतुलित उपयोग करना बेहद जरूरी होगा। सम्मेलन के दौरान राज्यों के बीच आपसी सहयोग और अनुभव साझा करने पर भी जोर दिया गया, ताकि विभिन्न क्षेत्रों में सफल मॉडल को अन्य राज्यों में भी लागू किया जा सके।
इस अवसर पर यह स्पष्ट किया गया कि सरकार किसानों को केवल योजनाओं तक सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि उन्हें तकनीकी रूप से सक्षम और आर्थिक रूप से मजबूत बनाना ही असली लक्ष्य है। जयपुर में आयोजित यह पश्चिमी क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन न केवल नीतिगत चर्चा का मंच बना, बल्कि देश के किसानों के उज्ज्वल भविष्य के लिए एक ठोस रोडमैप तैयार करने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ।

